अररिया में चुनाव के बीच कांग्रेस और भाजपा कार्यकर्ताओं में झड़प, इलाके में तनाव, पुलिस ने संभाला मोर्चा

अररिया। बिहार विधानसभा चुनाव के दूसरे चरण के मतदान के दौरान अररिया जिले के फारबिसगंज में काफी तनावपूर्ण स्थिति देखने को मिली। मतदान प्रक्रिया शांतिपूर्ण ढंग से चल रही थी, लेकिन दो प्रमुख दलों—कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी—के कार्यकर्ताओं के बीच अचानक विवाद बढ़ गया। इस विवाद ने देखते ही देखते पूरे इलाके में तनाव का माहौल पैदा कर दिया। हालांकि पुलिस प्रशासन की तत्परता के कारण स्थिति को नियंत्रण में ले लिया गया।
झड़प की शुरुआत कैसे हुई
फारबिसगंज कॉलेज चौक पर झड़प तब शुरू हुई जब बीजेपी प्रत्याशी विद्या सागर केसरी मतदान केंद्रों का जायजा लेने पहुंचे। उनकी गाड़ी पर पार्टी का झंडा लगा हुआ था, जिसे देखकर कांग्रेस समर्थकों ने आपत्ति जताई। चुनाव आयोग के नियमों के अनुसार प्रत्याशी मतदान केंद्रों के पास प्रचार सामग्री या पार्टी प्रतीक नहीं दिखा सकते। इसी बात को लेकर कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने विरोध दर्ज कराया। इसके जवाब में बीजेपी प्रत्याशी ने भी कांग्रेस उम्मीदवार मनोज विश्वास की गाड़ी पर लगे झंडे पर सवाल उठाए। जैसे ही दोनों पक्षों ने एक-दूसरे के खिलाफ आपत्ति जताना शुरू किया, वहां मौजूद कार्यकर्ताओं के बीच कहासुनी बढ़ गई और माहौल तनावपूर्ण हो गया।
कार्यकर्ताओं के बीच बढ़ा तनाव
कांग्रेस और बीजेपी के कार्यकर्ता बड़ी संख्या में मौके पर मौजूद थे। देखते-देखते दोनों दलों के कार्यकर्ता आमने-सामने आ गए और नारेबाजी शुरू हो गई। स्थानीय लोगों के अनुसार स्थिति इतनी तनावपूर्ण हो गई कि कांग्रेस समर्थकों ने बीजेपी प्रत्याशी विद्या सागर केसरी को वहां से वापस लौटने के लिए मजबूर कर दिया। दोनों दलों के बीच हुई बहस और धक्का-मुक्की ने कुछ समय के लिए मतदान केंद्र के आसपास भय का माहौल बना दिया।
पुलिस-प्रशासन की त्वरित कार्रवाई
स्थिति बिगड़ती देख फारबिसगंज के अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी मुकेश कुमार साहा तुरंत पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। पुलिस ने दोनों दलों के समर्थकों को समझाया और उन्हें अलग किया। कुछ समय बाद मामले को शांत कर दिया गया। पुलिस अधिकारियों ने कहा कि वास्तविक अर्थों में कोई गंभीर भिड़ंत नहीं हुई, बल्कि झंडे को लेकर हुई कहासुनी ने मामला बढ़ा दिया था। एसडीपीओ मुकेश कुमार साहा ने बताया कि दो गाड़ियों को जब्त किया गया है और आगे की कार्रवाई जांच रिपोर्ट के आधार पर की जाएगी। उन्होंने स्पष्ट कहा कि मतदान शांतिपूर्ण ढंग से जारी है और क्षेत्र में किसी प्रकार की अव्यवस्था नहीं है।
राजनीतिक पृष्ठभूमि और मुकाबला
फारबिसगंज विधानसभा सीट पर इस बार फिर से भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस के बीच सीधा मुकाबला नजर आ रहा है। बीजेपी से विद्या सागर केसरी चुनाव लड़ रहे हैं, जबकि कांग्रेस ने मनोज विश्वास को मैदान में उतारा है। इनके अलावा जन सुराज पार्टी से मो. एकरामुल हक तथा राष्ट्रीय जनसंभावना पार्टी से फातमा खातून भी उम्मीदवार हैं, लेकिन मुख्य टक्कर बीजेपी और कांग्रेस के बीच ही मानी जा रही है। 2020 के विधानसभा चुनाव में इस सीट पर बीजेपी ने जीत हासिल की थी, इसलिए इस बार भी पार्टी के लिए यह सीट प्रतिष्ठा का सवाल बनी हुई है। वहीं कांग्रेस इस क्षेत्र में अपनी स्थिति मजबूत करने के लिए पूरे दमखम से चुनाव लड़ रही है।
चुनावी मौसम में झड़पें और विवाद आम बात
चुनावी मौसम में झड़पें और विवाद आम बात कही जाती हैं, लेकिन इस प्रकार की घटनाएं मतदान प्रक्रिया को प्रभावित कर सकती हैं। फारबिसगंज की घटना भी इसी श्रेणी में आती है। यहां झंडे को लेकर शुरू हुई कहासुनी यह दर्शाती है कि दोनों दल मतदान के दिन भी सक्रिय रूप से अपनी उपस्थिति दिखाना चाहते थे। चुनावी रणनीति का बड़ा हिस्सा मतदान केंद्रों के आसपास कार्यकर्ताओं की उपस्थिति और प्रत्याशी की सक्रियता पर निर्भर करता है। लेकिन ऐसे समय में किसी भी छोटी घटना का राजनीतिक रूप से बड़ा असर पड़ सकता है। यही कारण है कि पुलिस प्रशासन ने तुरंत मामले को शांत करने के लिए हस्तक्षेप किया। कुल मिलाकर फारबिसगंज में हुई यह घटना चुनावी तनाव का एक उदाहरण है, जहां छोटी-सी आपत्ति भी बड़े विवाद का रूप ले सकती है। हालांकि पुलिस की तत्परता से स्थिति सामान्य हो गई और मतदान प्रक्रिया पर कोई बड़ा प्रभाव नहीं पड़ा। क्षेत्र में मतदान शांतिपूर्ण ढंग से जारी है और प्रशासन ने आश्वासन दिया है कि दोषियों पर कार्रवाई की जाएगी। यह घटना इस बात की भी याद दिलाती है कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया में शांति और व्यवस्था बनाए रखना उतना ही जरूरी है जितना मतदान का अधिकार।

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