वरिष्ठ आईएएस अधिकारी प्रत्यय अमृत ने संभाला बिहार के नए मुख्य सचिव का पदभार, सीएम से की मुलाकात
पटना। वरिष्ठ आईएएस अधिकारी प्रत्यय अमृत ने बिहार के नए मुख्य सचिव के रूप में पदभार ग्रहण कर लिया है। यह महत्वपूर्ण बदलाव बिहार सरकार के प्रशासनिक इतिहास में एक नए अध्याय की शुरुआत का प्रतीक है। प्रतिनियुक्ति पर लौटकर बिहार में अपनी सेवाओं को समर्पित करते हुए, प्रत्यय अमृत ने आज मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से मुलाकात भी की। यह नियुक्ति सरकारी अधिसूचना के अनुसार 4 अगस्त को घोषित की गई थी, और पिछले मुख्य सचिव अमृतलाल मीणा ने पदभार सौंपा। इस अवसर पर दोनों अधिकारी परिवार वालों और राज्य सरकार के उच्च अधिकारियों के साथ मौजूद रहे। प्रत्यय अमृत का प्रशासनिक अनुभव और उनकी उपलब्धियां बेहद प्रभावशाली हैं। कटिहार के जिला मजिस्ट्रेट रहते हुए उन्होंने जिला अस्पताल में पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मॉडल लागू किया, जो स्वास्थ्य सुविधाओं के विकास में एक महत्वपूर्ण पहल थी। इसके अतिरिक्त, छपरा के डीएम के रूप में उन्होंने सोनपुर पशु मेले में अश्लीलता पर रोक लगाई और सिनेमाघरों में CCTV कैमरों की अनिवार्यता लागू की, जिससे कानून-व्यवस्था में सुधार हुआ। उनका परिवार और शिक्षा भी अत्यंत प्रभावशाली रहा है। दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रतिष्ठित हिंदू कॉलेज से शिक्षा ग्रहण करने वाले प्रत्यय अमृत के पिता रूपसूदन श्रीवास्तव बिहार विश्वविद्यालय में दर्शनशास्त्र के प्राध्यापक थे, जबकि उनकी माता कविता श्रीवास्तव बीएन मंडल विश्वविद्यालय में प्रोफेसर रहीं। उनकी बहन प्रज्ञा ऋचा मध्य प्रदेश में ADG रैंक की आईपीएस अधिकारी हैं और उनकी पत्नी पटना के AN कॉलेज में प्रोफेसर हैं। यह पारिवारिक पृष्ठभूमि उनके व्यक्तित्व और प्रशासनिक करियर में अनुशासन और ज्ञान के तत्वों को प्रतिबिंबित करती है। प्रतय अमृत ने नवम्बर 2001 से अप्रैल 2006 तक दिल्ली में केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर कार्य किया, लेकिन छह महीने पहले ही वे वापस बिहार लौट आए थे। उनकी कार्यक्षमता और नेतृत्व के कारण उन्हें 2011 में प्रधानमंत्री लोक प्रशासन उत्कृष्टता पुरस्कार भी व्यक्तिगत श्रेणी में मिला, जो देश में इस सम्मान को पाने वाले वे एकमात्र आईएएस अधिकारी हैं।मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के करीबी सहयोगी माने जाने वाले प्रत्यय अमृत बिहार लौटकर उनकी सरकार की कई परियोजनाओं का नेतृत्व कर चुके हैं। जब नीतीश कुमार पहली बार 2005 में मुख्यमंत्री बने थे, तब उनकी पहल पर ही अमृत दिल्ली से लौट आए और बिहार राज्य पुल निर्माण निगम के निदेशक बने। उनके कार्यकाल में बिहार के पुलों, पुलियों और सड़कों की गुणवत्ता में अभूतपूर्व सुधार हुआ। इसके बाद, उन्हें राज्य में घर-घर बिजली पहुंचाने की जिम्मेदारी दी गई, जिसे उन्होंने बड़ी सफलता के साथ पूरा किया। इस प्रकार, प्रत्यय अमृत का प्रशासनिक सफर उनके कर्मठता, दूरदर्शिता और समर्पण का परिचायक है। उनके नेतृत्व में बिहार सरकार के प्रशासनिक ढांचे को नए आयाम और गति मिली है, जो आने वाले समय में राज्य के विकास में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। उनके पदभार ग्रहण से बिहार के प्रशासन में नई ऊर्जा और प्रतिबद्धता का संचार होगा। यह नई जिम्मेदारी उनके लिए एक चुनौती भी है और अवसर भी, जिसे वे अपनी विशेषज्ञता और अनुभव के आधार पर सफलतापूर्वक निभाएंगे। इस पूरी प्रक्रिया में उनके अनुभव, परिवारिक मूल्यों और मुख्यमंत्री के साथ मजबूत संबंध बिहार की प्रशासनिक सफलता की कुंजी साबित होंगे।


