February 26, 2026

पटना में शराब बेचने का विरोध करने पर भतीजे ने चाचा को मारी गोली, अस्पताल में भर्ती, आरोपी फरार

पटना। मनेर प्रखंड के दोस्तनगर गांव में शुक्रवार देर रात एक चौंकाने वाली घटना सामने आई, जिसमें शराब बेचने का विरोध करने पर भतीजे ने अपने ही चाचा पर गोली चला दी। यह मामला न केवल पारिवारिक विवाद का उदाहरण है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि अवैध शराब कारोबार को लेकर समाज में किस तरह तनाव की स्थिति बन रही है।
घटना का कारण और पृष्ठभूमि
दोस्तनगर निवासी हुकुम नारायण लंबे समय से अपने भतीजे गुड्डू को शराब बेचने से मना करते आ रहे थे। बिहार में शराबबंदी लागू होने के बावजूद अवैध शराब बिक्री की घटनाएं समय-समय पर सामने आती हैं, और इसी अवैध कारोबार के खिलाफ आवाज उठाने के कारण यह विवाद गहराता चला गया। हुकुम नारायण ने शुक्रवार को भी अपने भतीजे को इस काम से रोकने की कोशिश की। यह बात गुड्डू को नागवार गुजरी और उसने इस पर बेहद हिंसक प्रतिक्रिया दी।
वारदात की रात की घटनाएं
घटना शुक्रवार रात करीब आठ बजे की है। जानकारी के अनुसार, उस समय हुकुम नारायण मजदूरी का काम करके घर लौटे थे। उसी दौरान गुड्डू कट्टा लेकर उनके घर पहुंचा। बिना किसी कहासुनी या बहस के उसने सीधे हुकुम नारायण पर गोली चला दी। गोली उनके हाथ में लगी, जिससे वे गंभीर रूप से घायल हो गए।
घायल को अस्पताल पहुंचाया गया
गोली लगने के बाद परिवार के सदस्यों ने तत्काल हुकुम नारायण को प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया, जहां प्रारंभिक इलाज के बाद उन्हें मनेर अस्पताल में भर्ती कराया गया। डॉक्टरों ने बताया कि उनकी हालत फिलहाल स्थिर है और वे खतरे से बाहर हैं। हालांकि, उनके हाथ में गंभीर चोट आई है, जिसका इलाज जारी है।
गोली चलाने बाद आरोपी मौके से फरार
गोली चलाने के तुरंत बाद आरोपी गुड्डू मौके से फरार हो गया। पुलिस के अनुसार, इस मामले में हुकुम नारायण के बयान के आधार पर गुड्डू सहित तीन लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की जा रही है। मनेर पुलिस ने बताया कि मामले की जांच शुरू हो गई है और आरोपियों की तलाश जारी है। पुलिस स्थानीय स्तर पर छापेमारी कर रही है ताकि आरोपी जल्द से जल्द पकड़े जा सकें।
समाज में अवैध शराब कारोबार की समस्या
यह घटना एक बार फिर यह सवाल खड़ा करती है कि शराबबंदी के बावजूद राज्य में अवैध शराब का कारोबार कैसे फल-फूल रहा है। अवैध शराब की बिक्री न केवल कानून व्यवस्था के लिए चुनौती है, बल्कि यह सामाजिक रिश्तों में भी दरार पैदा कर रही है। यहां तक कि पारिवारिक संबंध भी इस अवैध व्यापार के कारण हिंसा की चपेट में आ रहे हैं। मनेर की यह घटना दिखाती है कि कानून तोड़ने वालों को रोकने के प्रयास कभी-कभी कितने खतरनाक मोड़ ले सकते हैं। हुकुम नारायण ने अपने परिवार और समाज के हित में शराब बिक्री का विरोध किया, लेकिन उन्हें इसका खामियाजा अपनी जान जोखिम में डालकर चुकाना पड़ा। अब यह जिम्मेदारी पुलिस और प्रशासन की है कि वे न केवल आरोपी को जल्द गिरफ्तार करें, बल्कि ऐसे अवैध कारोबार पर भी सख्त कार्रवाई करें, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके।

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