पटना में नगर निगम के कर्मियों ने शुरू की अनिश्चितकालीन हड़ताल, साफ-सफाई बंद, सड़कों पर लगेगा कूड़ा
पटना। पटना की सड़कों पर आने वाले दिनों में गंदगी और कूड़े का अंबार लगने वाला है, क्योंकि नगर निगम के करीब चार हजार कर्मचारी गुरुवार से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले गए हैं। यह हड़ताल बारिश के मौसम में आम जनता के लिए गंभीर परेशानी खड़ी कर सकती है, क्योंकि गंदगी फैलने से डेंगू, मलेरिया जैसी बीमारियों के बढ़ने का खतरा और ज्यादा हो जाएगा। हड़ताल की वजह कर्मचारियों की 11 सूत्री मांगें हैं, जिन्हें लंबे समय से सरकार और नगर निगम प्रशासन के सामने रखा गया था। कर्मचारियों का कहना है कि उन्होंने अपनी मांगों का ज्ञापन मेयर, डिप्टी मेयर, कार्यपालक पदाधिकारी और नगर विकास मंत्री तक सौंपा, लेकिन किसी भी स्तर से उनकी समस्याओं पर बातचीत करने या समाधान निकालने की कोशिश नहीं की गई। यही वजह है कि अब कर्मचारी मजबूर होकर अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले गए हैं। हड़ताल पर गए सफाईकर्मी और वॉटर बोर्ड कर्मियों की मांगों में दैनिक वेतनभोगियों की सेवा को स्थाई करना, निजीकरण की प्रक्रिया को समाप्त करना, स्थाई बहाली, प्रभारी व्यवस्था को खत्म करना, पद के अनुरूप वेतनमान देना शामिल है। इसके अलावा सेवानिवृत्त और मृत कर्मचारियों की बकाया राशि का भुगतान, समान काम के लिए समान वेतन की व्यवस्था और निजी एजेंसियों की मनमानी पर रोक लगाने जैसी मांगें भी शामिल हैं। इन सभी 11 सूत्री मांगों को लेकर कर्मचारी संगठन का कहना है कि यदि सरकार ने समय रहते ध्यान दिया होता तो हड़ताल की नौबत ही नहीं आती। कर्मचारियों की इस हड़ताल से पटना नगर निगम की पूरी सफाई व्यवस्था ठप हो जाएगी। शहर की सड़कों और मोहल्लों से कचरा उठना बंद हो जाएगा, जिससे कूड़ा सड़कों पर सड़ने लगेगा। बारिश के मौसम में यह स्थिति और खतरनाक हो सकती है, क्योंकि पानी जमा होने और गंदगी फैलने से मच्छरों का प्रकोप बढ़ेगा और संक्रामक बीमारियों का खतरा आम लोगों को परेशान करेगा। लगभग 25 लाख की आबादी वाले पटना शहर पर इस हड़ताल का सीधा असर पड़ेगा। पटना नगर निगम चतुर्थवर्गीय कर्मचारी महासंघ के प्रधान महासचिव नंद किशोर दास ने कहा कि सरकार और नगर निगम के जिम्मेदार लोग जानबूझकर कर्मचारियों की समस्याओं को अनदेखा कर रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रशासन ने न तो कर्मचारियों से वार्ता करने की कोशिश की और न ही हड़ताल रोकने के लिए पहल की। उनका मानना है कि इस रवैये से सरकार खुद जनता को गंदगी और परेशानियों की ओर धकेल रही है। पटना नगर निगम कर्मियों की अनिश्चितकालीन हड़ताल केवल कर्मचारियों और प्रशासन के बीच का मुद्दा नहीं है, बल्कि यह सीधे-सीधे आम जनता की जिंदगी से जुड़ा प्रश्न है। यदि सरकार और नगर निगम ने जल्द ही कर्मचारियों की समस्याओं का समाधान नहीं किया, तो पटना शहर गंदगी के ढेर में तब्दील हो जाएगा और स्वास्थ्य संकट गहराने लगेगा। ऐसे में आवश्यक है कि बातचीत और समझौते से इस समस्या का समाधान शीघ्र निकाला जाए।


