February 25, 2026

पटना में एसटीईटी अभ्यर्थियों पर लाठीचार्ज, पुलिस ने दौड़ा-दौड़ाकर पीटा, महिलाएं समेत कई घायल

पटना। पटना में माध्यमिक शिक्षक पात्रता परीक्षा (एसटीईटी) को लेकर अभ्यर्थियों ने जोरदार प्रदर्शन किया, जिसमें हजारों युवक-युवतियों ने भाग लिया। उनकी मांग थी कि एसटीईटी की परीक्षा टीआरई-4 (शिक्षक भर्ती परीक्षा) से पहले कराई जाए ताकि वे आगामी भर्ती प्रक्रिया में हिस्सा ले सकें। यह प्रदर्शन पटना कॉलेज से शुरू हुआ और डाकबंगला चौराहा होते हुए मुख्यमंत्री आवास की ओर बढ़ने लगा। अभ्यर्थियों के हाथों में ‘एसटीईटी नहीं तो वोट नहीं’ और ‘बिहार मांगे एसटीईटी’ जैसे पोस्टर थे। उनका कहना था कि अगर एसटीईटी परीक्षा समय पर नहीं होती तो हजारों प्रशिक्षु छात्र शिक्षक बनने की पात्रता ही नहीं रख पाएंगे।
सरकारी घोषणा से असंतोष
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की हालिया घोषणा ने अभ्यर्थियों के मन में असंतोष पैदा कर दिया है। उन्होंने कहा था कि टीआरई-4 की परीक्षा वर्ष 2025 में और टीआरई-5 की परीक्षा 2026 में आयोजित की जाएगी, जबकि एसटीईटी परीक्षा टीआरई-5 से पहले करवाई जाएगी। इसका अर्थ है कि एसटीईटी 2026 में ही आयोजित होगी, जिससे 2022-24 और 2023-25 के बीएड और बीटीसी प्रशिक्षु छात्र टीआरई-4 के लिए अपात्र हो जाएंगे। अभ्यर्थियों का तर्क है कि जब सरकार ने पहले साल में दो बार एसटीईटी कराने की बात कही थी तो अब इस तरह परीक्षा टालना अन्याय है।
प्रदर्शन में शामिल युवाओं की व्यथा
प्रदर्शन में भाग ले रहे अभ्यर्थियों ने भास्कर से बातचीत में कहा कि वे दिन-रात इसी चिंता में डूबे हैं कि एसटीईटी कब होगी। एक छात्र ने कहा कि जब से टीआरई-4 की घोषणा हुई है, वे सो नहीं पा रहे हैं। दूसरे ने कहा कि सरकार की परीक्षा नीति बार-बार बदल रही है, जिससे तैयारी कर रहे हजारों युवाओं का भविष्य अधर में लटक गया है। एक महिला अभ्यर्थी ने कहा कि वे सरकार से बस यही मांग कर रही हैं कि एसटीईटी को टीआरई-4 से पहले आयोजित किया जाए, जिससे लगभग दो लाख छात्रों को मौका मिल सके।
पुलिस कार्रवाई और हिंसा
जब प्रदर्शनकारी सीएम हाउस की ओर बढ़े, तो पुलिस ने जेपी गोलंबर के पास बैरिकेडिंग लगाकर उन्हें रोक दिया। अभ्यर्थी बैरिकेडिंग पार कर नारेबाजी करने लगे, जिसके बाद पुलिस ने वाटर कैनन मंगवाया और फिर लाठीचार्ज किया। इस लाठीचार्ज में कई महिलाएं और पुरुष घायल हो गए। एक अभ्यर्थी के सिर में गंभीर चोट आई है। पुलिस ने उन्हें दौड़ा-दौड़ाकर पीटा। प्रदर्शन स्थल पर अफरा-तफरी मच गई और जाम की स्थिति बन गई, जिससे 250 से अधिक गाड़ियाँ फंस गईं।
सरकार से बातचीत की कोशिश और प्रशासनिक रवैया
प्रदर्शन के बीच मुख्य सचिव ने पांच प्रतिनिधियों को बातचीत के लिए बुलाया, लेकिन इससे पहले ही पुलिस की सख्ती शुरू हो गई। कई अधिकारी मौके पर पहुंचकर समझाने की कोशिश भी कर रहे थे, लेकिन अभ्यर्थी सिर्फ मुख्यमंत्री से सीधी बातचीत की मांग पर अड़े थे। उनका कहना था कि अब केवल वादे नहीं, ठोस फैसले चाहिए, क्योंकि समय बहुत कम है और आचार संहिता लगने के बाद कुछ भी संभव नहीं होगा।
अभ्यर्थियों की नाराजगी और चेतावनी
प्रदर्शनकारी छात्रों का कहना है कि अगर एसटीईटी परीक्षा जल्द नहीं करवाई गई तो वे आगामी चुनावों में वोट नहीं देंगे। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर सरकार ने उनकी मांग नहीं मानी तो वे आंदोलन तेज करेंगे। छात्रों का यह भी कहना है कि उन्हें सड़कों पर उतरने के लिए मजबूर किया गया है, क्योंकि सरकार पिछले दो वर्षों से एसटीईटी परीक्षा आयोजित नहीं करवा रही है। पटना में हुआ यह प्रदर्शन केवल एक परीक्षा की मांग भर नहीं है, बल्कि यह युवाओं की हताशा और सरकारी वादों से टूते भरोसे का प्रतीक बन गया है। शिक्षित और प्रशिक्षित युवा जब सड़कों पर उतरकर लाठियाँ खाने को मजबूर हों, तो यह व्यवस्था पर एक बड़ा सवाल है। सरकार को चाहिए कि छात्रों की मांगों को गंभीरता से लेकर समयबद्ध तरीके से परीक्षा आयोजित करे, जिससे लाखों युवाओं का भविष्य सुरक्षित रह सके।

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