लैंड फॉर जॉब मामले में सुनवाई तेज, हाईकोर्ट ने राबड़ी देवी की याचिका पर सीबीआई को भेजा नोटिस
- ट्रायल कोर्ट के फैसले को चुनौती, 1600 दस्तावेजों तक पहुंच की मांग पर अगली सुनवाई 1 अप्रैल को
- लालू यादव की याचिका खारिज, अदालत ने कहा—मुकदमे में देरी की कोशिश
नई दिल्ली। चर्चित लैंड फॉर जॉब मामले में न्यायिक प्रक्रिया तेज होती नजर आ रही है। एक ओर जहां राष्ट्रीय जनता दल के सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव की याचिका को अदालत ने खारिज कर दिया है, वहीं दूसरी ओर पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी की याचिका पर दिल्ली उच्च न्यायालय ने केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो को नोटिस जारी किया है। इस मामले में अब अगली सुनवाई 1 अप्रैल को तय की गई है, जिस पर सभी की निगाहें टिकी हैं। दिल्ली उच्च न्यायालय में सोमवार को इस मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति मनोज जैन की पीठ द्वारा की गई। सुनवाई के दौरान राबड़ी देवी की ओर से दायर याचिका पर अदालत ने केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो से जवाब मांगा है। याचिका में ट्रायल कोर्ट के उस फैसले को चुनौती दी गई है, जिसमें उन्हें करीब 1600 ऐसे दस्तावेज उपलब्ध कराने से इनकार कर दिया गया था, जिन पर जांच एजेंसी ने भरोसा नहीं जताया है। याचिका में यह तर्क दिया गया है कि निष्पक्ष सुनवाई के लिए इन दस्तावेजों तक पहुंच आवश्यक है, ताकि बचाव पक्ष अपना पक्ष प्रभावी ढंग से रख सके। राबड़ी देवी का कहना है कि बिना इन दस्तावेजों के उन्हें उचित न्याय मिलना कठिन होगा। इससे पहले राऊज एवेन्यू स्थित विशेष अदालत ने लालू प्रसाद यादव, राबड़ी देवी और अन्य आरोपियों की याचिकाओं को खारिज कर दिया था। इन याचिकाओं में उन दस्तावेजों की मांग की गई थी, जिन्हें जांच एजेंसी ने अब तक अदालत में प्रस्तुत नहीं किया है। ट्रायल कोर्ट ने अपने फैसले में स्पष्ट कहा था कि जिन दस्तावेजों पर अभियोजन पक्ष भरोसा नहीं कर रहा है, उन्हें उपलब्ध कराना अनिवार्य नहीं है। अदालत ने यह भी कहा कि बचाव पक्ष इन दस्तावेजों की मांग अपने साक्ष्य के समय कर सकता है। इसके अलावा कोर्ट ने यह टिप्पणी भी की थी कि एक साथ 1600 से अधिक दस्तावेजों की मांग से मुकदमे की सुनवाई प्रभावित हो सकती है और इसमें अनावश्यक देरी हो सकती है। इसी दौरान लालू प्रसाद यादव की याचिका पर सुनवाई करते हुए अदालत ने कड़ी टिप्पणी की और उनकी याचिका को खारिज कर दिया। अदालत ने कहा कि इस प्रकार की याचिकाएं मुकदमे को अनावश्यक रूप से जटिल बनाने और कार्रवाई में देरी करने का प्रयास प्रतीत होती हैं। अदालत ने यह भी कहा कि याचिकाकर्ता न्यायिक प्रक्रिया से बचने के लिए अदालत को भ्रमित करने की कोशिश कर रहे हैं। लैंड फॉर जॉब मामला वर्ष 2004 से 2009 के बीच का है, जब लालू प्रसाद यादव रेल मंत्री के पद पर कार्यरत थे। आरोप है कि इस दौरान रेलवे में नौकरी दिलाने के बदले उम्मीदवारों या उनके परिजनों से कम कीमत पर जमीन ली गई और उन जमीनों को परिवार के सदस्यों या करीबी संस्थाओं के नाम पर स्थानांतरित कराया गया। हालांकि, लालू यादव और उनके परिवार ने इन आरोपों को लगातार खारिज किया है। उनका कहना है कि यह मामला राजनीतिक द्वेष से प्रेरित है और वे अदालत में अपने पक्ष को मजबूती से रखेंगे। केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो द्वारा की जा रही जांच के आधार पर यह मामला फिलहाल न्यायालय में विचाराधीन है। अब उच्च न्यायालय द्वारा नोटिस जारी किए जाने के बाद इस मामले में नई कानूनी बहस की संभावना बन गई है। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि उच्च न्यायालय का यह नोटिस मामले की दिशा को प्रभावित कर सकता है, क्योंकि अब यह तय होगा कि बचाव पक्ष को किन दस्तावेजों तक पहुंच मिलनी चाहिए और किस हद तक। फिलहाल इस बहुचर्चित मामले में अगली सुनवाई 1 अप्रैल को होगी, जिसमें केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो अपना पक्ष रखेगा। इस सुनवाई के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि मामले की आगे की प्रक्रिया किस दिशा में बढ़ेगी।


