केंद्रीय मंत्रिमंडल में शामिल हो सकते हैं ललन सिंह तथा आरसीपी सिंह,गेंद सीएम नीतीश के पाले में
पटना।(बन बिहारी)आसन्न में विधानसभा चुनाव के मद्देनजर भाजपा तथा जदयू में सीटों के तालमेल को लेकर जदयू के दो सांसद नरेंद्र मोदी की सरकार में केंद्रीय मंत्री परिषद का हिस्सा बन सकते हैं।राजनीति के गलियारों में ऐसी संभावनाएं जताई जा रही है।राजनीतिक सूत्रों के अनुसार जदयू के मुंगेर सांसद राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह तथा राज्यसभा सदस्य आरसीपी सिंह के जदयू कोटे से केंद्र में मंत्री बनने के आसार प्रतीत हो रहे हैं। राजनीतिक सूत्रों ने बताया कि आसन्न विधानसभा चुनाव के मद्देनजर बिहार में भाजपा तथा जदयू के बीच सीटों के तालमेल को लेकर संभावित रस्साकशी को सुव्यवस्थित करने के लिए भाजपा जदयू के दो सांसदों को केंद्रीय मंत्रिमंडल में शामिल कराने पर राजी हो गई है। हालांकि अभी तक किसी वरिष्ठ भाजपा नेता ने इसकी पुष्टि नहीं की है।मगर राजनीतिक गलियारों में इस संभावना को लेकर कयासें लगाई जा रही हैं।बताया जाता है कि लॉकडाउन के दौरान लगातार 50 दिनों तक इन दोनों सांसदों ने बिहार सरकार के कामकाज को लेकर चुप्पी साध रखी थी।जबकि सांसद ललन सिंह तथा आरसीपी सिंह को जदयू में नीतीश कुमार के बाद सर्वाधिक ताकतवर नेता माना जाता है।जानकारों का मानना है कि विगत वर्ष नरेंद्र मोदी सरकार के गठन के समय भाजपा शिवसेना की तरह जदयू को केंद्रीय मंत्रिपरिषद में एक सीट ऑफर कर रही थी।जिसे मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने ठुकरा दिया।मगर अब बिहार में आसन्न विधानसभा चुनाव को लेकर सीटों के तालमेल में जदयू के मुकाबले बराबर सीट हासिल करने के लिए भाजपा जदयू के इन दोनों सांसदों को केंद्रीय मंत्रिमंडल में शामिल कराने की संभावनाओं पर इकरार कर रही है।उल्लेखनीय है कि मुंगेर के सांसद ललन सिंह तथा राज्यसभा सदस्य आरसीपी सिंह बिहार की राजनीति में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के सर्वाधिक करीबी-विश्वस्त तथा पॉलिटिकली ‘स्ट्रांग’ माने जाते हैं।ऐसे में इन अटकलों को एक सिरे से राजनीतिक विश्लेषक खारिज भी नहीं कर रहे हैं।जानकारों का मानना है कि लॉकडाउन समाप्ति के समय जदयू तथा भाजपा के थिंक टैंक इस मुद्दे पर चर्चा भी कर चुके हैं। जदयू नेताओं का यह भी मानना है कि केंद्रीय मंत्रिपरिषद में इन दोनों सांसदों के शामिल हो जाने से जदयू कार्यकर्ताओं का मनोबल भी मजबूत होगा। फिलहाल गेंद पूरी तरह से सीएम नीतीश के पाले में है।ऐसे में राजनीतिक रूप से भविष्य के गर्भ में क्या छिपा है? फिलहाल जदयू के कार्यकर्ता समेत राजनीतिक विश्लेषकों को भी इसका इंतजार है।


