दिल्ली के बाद मुंबई में भी बिखरा इंडिया गठबंधन, उद्धव की पार्टी अकेले लड़ेगी महानगरपालिका चुनाव, ऐलान जल्द

मुंबई। दिल्ली विधानसभा चुनाव में इंडिया गठबंधन की पार्टियों के अलग-अलग चुनाव लड़ने की स्थिति अब मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) चुनाव में भी दिखने की संभावनाएं बन रही हैं। शिवसेना (उद्धव बालासाहब ठाकरे) ने संकेत दिए हैं कि वह इस चुनाव में महाविकास अघाड़ी (एमवीए) से अलग होकर मैदान में उतर सकती है। हालांकि, इसका आधिकारिक ऐलान अभी नहीं हुआ है, लेकिन शिवसेना के वरिष्ठ नेता संजय राउत ने इस ओर इशारा किया है। महाविकास अघाड़ी (एमवीए) गठबंधन में शिवसेना (यूबीटी), कांग्रेस, और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) शामिल हैं। यह गठबंधन महाराष्ट्र में भाजपा और उसके सहयोगियों के खिलाफ एक मजबूत विपक्ष के रूप में उभरा था। लेकिन हाल ही में संपन्न महाराष्ट्र विधानसभा उपचुनाव में एमवीए को भाजपा-शिवसेना (शिंदे गुट) की महायुति के सामने करारी हार का सामना करना पड़ा। इसी बीच, दिल्ली विधानसभा चुनाव में कांग्रेस और आम आदमी पार्टी (आप) के अलग-अलग चुनाव लड़ने की स्थिति ने इंडिया गठबंधन की एकता पर सवाल खड़े किए। दिल्ली में जहां मुकाबला भाजपा और आप के बीच केंद्रित है, वहीं कांग्रेस ने आप पर निशाना साधा। इस स्थिति पर शिवसेना (यूबीटी) ने भी सवाल उठाए हैं। शिवसेना (यूबीटी) के वरिष्ठ नेता और सामना के संपादक संजय राउत ने अपने बयान में कहा, “जो हाल दिल्ली में हो रहा है, वैसा मुंबई में भी हो सकता है।” उनका यह बयान बीएमसी चुनाव को लेकर शिवसेना (यूबीटी) की अलग रणनीति की ओर संकेत देता है। उन्होंने कहा कि दिल्ली में कांग्रेस और आप दोनों इंडिया गठबंधन का हिस्सा हैं, फिर भी अलग-अलग चुनाव लड़ रही हैं। यही स्थिति मुंबई में भी देखने को मिल सकती है। राउत ने कांग्रेस पर कटाक्ष करते हुए कहा कि जब देश मोदी-शाह की तानाशाही के खिलाफ लड़ रहा है, तब कांग्रेस भाजपा की बजाय आप पर निशाना साध रही है। उन्होंने कहा कि यह स्थिति आम जनता के लिए हैरानी का विषय है। बृह्नमुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) भारत की सबसे धनी और महत्वपूर्ण नगरपालिकाओं में से एक है। यहां के चुनाव राजनीतिक दलों के लिए बेहद अहम होते हैं। बीएमसी पर दशकों तक शिवसेना का कब्जा रहा है। लेकिन हालिया राजनीतिक समीकरणों के कारण भाजपा ने भी यहां अपनी पकड़ मजबूत की है। शिवसेना (यूबीटी) के लिए बीएमसी चुनाव उसकी राजनीतिक ताकत को दिखाने का एक महत्वपूर्ण अवसर होगा। अगर पार्टी महाविकास अघाड़ी से अलग होकर चुनाव लड़ती है, तो इसका प्रभाव कांग्रेस और एनसीपी पर भी पड़ेगा। दिल्ली विधानसभा चुनाव में कांग्रेस और आप के अलग चुनाव लड़ने से विपक्षी एकता पर सवाल खड़े हुए। इसी तरह, हरियाणा विधानसभा चुनाव में भी दोनों पार्टियां अलग-अलग चुनावी मैदान में थीं। इस संदर्भ में, अगर मुंबई में भी शिवसेना (यूबीटी) अलग चुनाव लड़ती है, तो यह इंडिया गठबंधन के लिए बड़ा झटका हो सकता है। मुंबई महानगरपालिका चुनाव में शिवसेना (यूबीटी) का अलग चुनाव लड़ने का संकेत महाविकास अघाड़ी और इंडिया गठबंधन दोनों के लिए चुनौतीपूर्ण स्थिति पैदा कर सकता है। जहां शिवसेना अपनी राजनीतिक जमीन को मजबूत करने की कोशिश करेगी, वहीं कांग्रेस और एनसीपी को इस स्थिति का सामना करना होगा। यह घटनाक्रम न केवल बीएमसी चुनाव, बल्कि 2024 के लोकसभा और 2025 के विधानसभा चुनावों के लिए भी विपक्षी एकता पर प्रभाव डाल सकता है।

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