बिजली दरों को लेकर तेजस्वी यादव का सरकार पर हमला, नई व्यवस्था से बढ़ी सियासी गर्मी

  • समय आधारित टैरिफ लागू, दिन में सस्ती तो शाम में महंगी होगी बिजली
  • विपक्ष ने खजाना खाली होने का लगाया आरोप, सरकार की नीतियों पर उठाए सवाल

पटना। बिहार में बिजली दरों में बदलाव को लेकर सियासी माहौल गर्म हो गया है। नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने राज्य की राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए आरोप लगाया है कि सरकार ने चुनावी वादों से मुकरते हुए आम जनता पर आर्थिक बोझ डाल दिया है। उन्होंने बिजली की नई दरों और व्यवस्था को लेकर सरकार की नीतियों पर सवाल खड़े किए हैं। तेजस्वी यादव ने एक बयान में कहा कि चुनाव के समय मुफ्त बिजली देने का वादा किया गया था, लेकिन अब नई व्यवस्था लागू कर जनता से अधिक वसूली की जा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने कुछ ही महीनों में अपना असली चेहरा दिखा दिया है और आम लोगों की जेब पर अतिरिक्त बोझ डाल दिया है। उन्होंने यह भी दावा किया कि राज्य का खजाना खाली हो चुका है और बची हुई राशि भी भ्रष्टाचार के कारण समाप्त हो सकती है। विपक्ष के इन आरोपों के बीच राज्य में बिजली की नई दरें लागू होने जा रही हैं, जो 1 अप्रैल से प्रभावी होंगी। बिहार विद्युत विनियामक आयोग ने बिजली कंपनियों की याचिका पर समय आधारित टैरिफ प्रणाली को मंजूरी दे दी है। इस नई व्यवस्था के तहत बिजली की दरें दिन के अलग-अलग समय के अनुसार निर्धारित की गई हैं। नई प्रणाली के अनुसार, रात 11 बजे से सुबह 9 बजे तक बिजली खपत पर सामान्य दर लागू होगी। सुबह 9 बजे से शाम 5 बजे तक उपभोक्ताओं को बिजली सस्ती दर पर मिलेगी, जिसमें निर्धारित दर का लगभग 80 प्रतिशत भुगतान करना होगा। वहीं शाम 5 बजे से रात 11 बजे तक बिजली खपत पर उपभोक्ताओं को अधिक भुगतान करना होगा, जो सामान्य दर का लगभग 120 प्रतिशत होगा। इस व्यवस्था का सीधा प्रभाव उन उपभोक्ताओं पर पड़ेगा, जिनके यहां स्मार्ट प्रीपेड मीटर लगे हुए हैं। राज्य में ऐसे उपभोक्ताओं की संख्या 87 लाख से अधिक बताई जा रही है। इसके अलावा जिन उपभोक्ताओं के यहां स्मार्ट मीटर नहीं है और जिनका लोड 10 किलोवाट से अधिक है, उन पर भी यह नियम लागू होगा। बिजली कंपनी ने कृषि कनेक्शन को छोड़कर सभी श्रेणी के उपभोक्ताओं के लिए इस प्रणाली का प्रस्ताव रखा था, जिसे आयोग ने विचार-विमर्श के बाद मंजूरी दे दी। इससे पहले यह व्यवस्था केवल औद्योगिक और व्यावसायिक उपभोक्ताओं के लिए लागू थी, लेकिन अब इसे आम उपभोक्ताओं तक विस्तारित कर दिया गया है। सरकार का कहना है कि इस नई प्रणाली का उद्देश्य बिजली की खपत को संतुलित करना और ऊर्जा संसाधनों का बेहतर उपयोग सुनिश्चित करना है। अधिकारियों के अनुसार, इससे पीक आवर के दौरान बिजली की मांग को नियंत्रित करने में मदद मिलेगी और उपभोक्ताओं को अपनी खपत के अनुसार योजना बनाने का अवसर मिलेगा। हालांकि विपक्ष का आरोप है कि यह व्यवस्था आम जनता के लिए परेशानी का कारण बनेगी, खासकर उन लोगों के लिए जो शाम के समय अधिक बिजली का उपयोग करते हैं। विपक्षी नेताओं का कहना है कि यह नीति आम लोगों के हितों के खिलाफ है और इससे घरेलू बजट पर असर पड़ेगा। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बिजली दरों को लेकर उठे इस विवाद का असर आगामी समय में राज्य की राजनीति पर भी पड़ सकता है। एक ओर जहां सरकार इसे आवश्यक सुधार बता रही है, वहीं विपक्ष इसे जनविरोधी कदम करार दे रहा है। फिलहाल, राज्य में बिजली दरों को लेकर बहस जारी है और 1 अप्रैल से लागू होने वाली नई व्यवस्था को लेकर लोगों के बीच मिश्रित प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। आने वाले दिनों में इसका वास्तविक प्रभाव सामने आने की संभावना है, जिससे यह स्पष्ट हो सकेगा कि यह निर्णय जनता के लिए कितना लाभकारी या चुनौतीपूर्ण साबित होता है।

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