लैंड फॉर जॉब मामले में दिल्ली की कोर्ट में फिर टली सुनवाई, अब 21 को मामला सुनेगा कोर्ट
नई दिल्ली/पटना। लैंड फॉर जॉब घोटाले से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में दिल्ली के राउज एवेन्यू कोर्ट में सोमवार को सुनवाई होनी थी, लेकिन केंद्रीय जांच ब्यूरो द्वारा आवश्यक स्पष्टीकरण दाखिल करने के लिए समय मांगे जाने के कारण अदालत ने सुनवाई स्थगित कर दी। अब इस मामले की अगली सुनवाई 21 फरवरी को निर्धारित की गई है। यह दूसरी बार है जब सुनवाई टाली गई है, इससे पहले 7 फरवरी को भी मामले की सुनवाई स्थगित कर दी गई थी।
क्या है लैंड फॉर जॉब घोटाला?
यह मामला तब का है जब राष्ट्रीय जनता दल प्रमुख लालू प्रसाद यादव केंद्र सरकार में रेल मंत्री थे। आरोप है कि उनके कार्यकाल (2004-2009) के दौरान रेलवे में नौकरियां देने के बदले जमीनें ली गई थीं। इस घोटाले में आरोप लगाया गया है कि रेलवे में नियुक्तियां उन लोगों को दी गईं, जिन्होंने अपनी जमीनें बेहद कम कीमत पर लालू प्रसाद यादव और उनके परिवार के सदस्यों को या उनके करीबी लोगों को ट्रांसफर कर दीं।
कोर्ट की पिछली कार्यवाही
इस मामले में 30 जनवरी को दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने दो अधिकारियों के खिलाफ मुकदमा चलाने की अनुमति दी थी। इन अधिकारियों में एक पूर्व प्रशासनिक अधिकारी आर.के. महाजन भी शामिल हैं, जो उस समय रेलवे बोर्ड में एक महत्वपूर्ण पद पर थे। उस वक्त लालू प्रसाद यादव रेल मंत्री थे। इस मामले में लालू प्रसाद यादव के परिवार के पांच सदस्य आरोपी हैं—लालू प्रसाद यादव, उनकी पत्नी और बिहार की पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी, उनके बेटे और बिहार के उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव, और उनकी दो बेटियां मीसा भारती एवं हेमा यादव।
सुनवाई के दौरान क्या हुआ?
सोमवार को हुई सुनवाई के दौरान सीबीआई ने अदालत से कुछ और समय मांगा ताकि वह अदालत द्वारा मांगे गए स्पष्टीकरण को दाखिल कर सके। इस पर कोर्ट ने सुनवाई को स्थगित कर दिया और अगली तारीख 21 फरवरी तय की। पिछली सुनवाई के दौरान विशेष लोक अभियोजक (स्पेशल पब्लिक प्रोसिक्यूटर) डी.पी. सिंह वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से अदालत में पेश हुए थे, जबकि बचाव पक्ष के वकील मनु मिश्रा अदालत में शारीरिक रूप से मौजूद थे।
मामले का प्रभाव और राजनीतिक सरगर्मी
इस मामले का राजनीतिक असर बिहार समेत पूरे देश की राजनीति पर देखा जा सकता है। चूंकि लालू यादव और उनका परिवार बिहार की राजनीति में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, इसलिए यह मामला सत्तारूढ़ महागठबंधन और विपक्ष के बीच बहस का विषय बना हुआ है। विपक्षी दल इस मामले को लेकर लालू यादव और उनके परिवार पर हमलावर रहते हैं, वहीं राजद इसे राजनीतिक प्रतिशोध का परिणाम बताता रहा है। लालू यादव पहले ही चारा घोटाले में सजायाफ्ता हैं और इस नए मामले में कानूनी दांव-पेंच के चलते उनकी मुश्किलें बढ़ सकती हैं। अब देखना होगा कि 21 फरवरी को होने वाली अगली सुनवाई में अदालत का क्या रुख रहता है और सीबीआई इस मामले में क्या नई दलीलें पेश करती है।


