January 25, 2026

नीति आयोग ने कहा- हवा में ज्यादा तेजी से फैल रहा कोरोना, आईसीएमआर ने कहा-दूसरी लहर कम खतरनाक, लेकिन लड़ने के तरीकों में तुरंत बदलाव जरूरी

CENTRAL DESK : कोरोना के दूसरे लहर के बीच जहां डराने वाली बाते सामने आयी है, वहीं कुछ हद तक राहत देने वाली भी बाते हैं। नीति आयोग के सदस्य वीके पॉल ने सोमवार को बताया कि कोरोना वायरस का संक्रमण हवा में ज्यादा तेजी से फैल रहा है। जिसे आखिरकार केंद्र सरकार ने भी मान लिया है। राहत वाली बात यह है कि युवाओं में संक्रमण ज्यादा होने जैसी बात नहीं है। आईसीएमआर ने कहा कि दूसरी लहर कम खतरनाक है। आईसीएमआर और नीति आयोग ने ये बातें मेडिकल जर्नल लैंसेट की रिपोर्ट के हवाले से कही है। लैंसेट ने कुछ दिन पहले कहा था कि डब्लूएचओ और दूसरी स्वास्थ्य एजेंसियों को अब इस वायरस से लड़ने के तरीके में तुरंत बदलाव करना होगा।
नीति आयोग के सदस्य वीके पॉल ने बताया कि पिछले साल आई कोरोना लहर में जितने लोग संक्रमित हुए, उनमें 30 साल से कम उम्र वाले 31% थे। इस बार की लहर में ये 32% है। जबकि 30 से 45 साल के बीच की उम्र वाले 21% हैं। पिछले साल भी संक्रमितों में इनकी तादाद इतनी ही थी। ऐसे में साफ है कि युवाओं में संक्रमण ज्यादा होने जैसी बात नहीं है।
वहीं इंडियन काउंसिल आफ मेडिकल रिसर्च (आईसीएमआर) के डीजी बलराम भार्गव ने कहा कि पिछले साल की लहर जितनी खतरनाक थी, उसके मुकाबले इस साल की कोरोना की लहर कम खतरनाक है।
लैंसेट ने अपनी रिपोर्ट में क्या कहा?
दुनिया के प्रमुख हेल्थ रिसर्च जर्नल लैंसेट ने दावा किया था कि कोरोना वायरस हवा के जरिए तेजी से फैलता है। वायरस को लेकर अब तक छपी अलग-अलग स्टडी का रिव्यू कर एक्सपर्ट्स ने अपनी बात को साबित करने के लिए कई कारण भी सामने रखे थे। रिव्यू की मुख्य लेखक आॅक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी की त्रिश ग्रीनहाल ने कहा था कि नए खुलासे के बाद विश्व स्वास्थ्य संगठन समेत दूसरी हेल्थ एजेंसियों को वायरस के ट्रांसमिशन होने की परिभाषा को बदलने की जरूरत है। उन्होंने फिजिकल डिस्टेंसिंग, मास्क समेत जो अन्य नियम बनाए हैं, वह इस वायरस को रोकने में काफी नहीं हैं। इस रिव्यू को यूके, यूएसए और कनाडा के छह एक्सपर्ट्स ने लिखा है।
गर्मी के मौसम में सांस तेजी से भाप बन जाती है
15 महीने के कोरोना काल में रिसर्च के बाद भारतीय वैज्ञानिकों ने स्पष्ट किया है कि वायरस गर्मी में बहुत तेजी से फैल रहा है। इससे पहले माना जा रहा था कि वायरस सर्दियों में ज्यादा असर दिखाएगा। भारत सरकार के 17 वैज्ञानिकों के रिसर्च में सामने आया है कि गर्मी के कारण वायरस के फैलाव की क्षमता बढ़ जाती है। सेंटर फॉर सेलुलर एंड मॉलिक्यूलर बॉयोलॉजी (सीसीएमबी) हैदराबाद के डायरेक्टर डॉ. राकेश के. मिश्रा बताते हैं कि गर्मी के मौसम में सांस तेजी से भाप बन जाती है। ऐसे में जब कोई संक्रमित व्यक्ति सांस छोड़ता है तो वायरस छोटे-छोटे टुकड़ों में बंट जाता है। वायरस के अतिसूक्ष्म कण सांस के साथ स्प्रे की तरह तेजी से बाहर आते हैं। फिर देर तक हवा में रहते हैं। अगर कोई व्यक्ति बिना मास्क उस जगह पहुंचता है तो उसके संक्रमित होने की आशंका होती है। हालांकि खुले वातावरण में संक्रमण का खतरा कम है, लेकिन अगर किसी हॉल, कमरे, लिफ्ट आदि में कोई संक्रमित व्यक्ति छींक भी दे, तो वहां मौजूद लोगों को संक्रमित होने की आशंका बहुत ज्यादा बढ़ जाती है। हवा में वायरस के असर को समझने के लिए वैज्ञानिकों ने हैदराबाद और मोहाली में 64 जगहों पर सैंपल लिए। इसमें अस्पतालों के आईसीयू, सामान्य वार्ड, स्टाफ रूम, गैलरी, मरीज के घर के बंद और खुले कमरे, बिना वेंटिलेशन और वेंटिलेशन वाले घर शामिल हैं।

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