होर्मुज संकट के बीच भारत पहुंचा गैस से भरा जहाज, आपूर्ति को मिली बड़ी राहत

  • ईरान युद्ध के कारण फंसे भारतीय जहाज ‘जग वसंत’ ने गुजरात बंदरगाह पर लगाई लंगर
  • कूटनीतिक प्रयासों से सुरक्षित निकास, हजारों टन रसोई गैस लेकर लौटे भारतीय पोत

अहमदाबाद/नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में जारी युद्ध और होर्मुज जलडमरूमध्य में बढ़े तनाव के बीच भारत के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। कई दिनों से फंसा भारतीय ध्वज वाला जहाज ‘जग वसंत’ शुक्रवार सुबह सुरक्षित रूप से गुजरात के एक बंदरगाह पर पहुंच गया। इस जहाज के भारत पहुंचने से देश में द्रवीकृत पेट्रोलियम गैस की आपूर्ति को लेकर बनी चिंता काफी हद तक कम हो गई है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, ‘जग वसंत’ उन भारतीय जहाजों में शामिल था जो ईरान और अन्य देशों के बीच बढ़ते तनाव के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य में फंसे हुए थे। इस जहाज के साथ एक अन्य भारतीय पोत ‘पाइन गैस’ भी इसी मार्ग से होकर गुजरा था। जहाजों की निगरानी करने वाले तंत्र के अनुसार, बीते सोमवार को इन दोनों जहाजों को ईरान के लारक और केश्म द्वीपों के बीच देखा गया था, जिसके बाद इनके सुरक्षित मार्ग से निकलने की संभावना जताई जा रही थी। बताया जा रहा है कि ‘जग वसंत’ और ‘पाइन गैस’ उन 22 भारतीय जहाजों में शामिल थे, जो पश्चिम एशिया में युद्ध के चलते इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग में फंसे हुए थे। होर्मुज जलडमरूमध्य विश्व के सबसे महत्वपूर्ण तेल परिवहन मार्गों में से एक है, जहां से वैश्विक स्तर पर बड़े पैमाने पर कच्चे तेल और गैस का परिवहन होता है। युद्ध के कारण ईरान द्वारा इस मार्ग को आंशिक रूप से बाधित किए जाने से पूरी दुनिया में ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित हुई थी। इन दोनों जहाजों पर कुल 92,612 मीट्रिक टन द्रवीकृत पेट्रोलियम गैस लदी हुई है, जो भारत के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। ‘जग वसंत’ पर 33 भारतीय नाविक सवार हैं, जबकि ‘पाइन गैस’ पर 27 भारतीय नाविक मौजूद हैं। सभी नाविक सुरक्षित बताए जा रहे हैं और जहाज के सुरक्षित पहुंचने के साथ ही उनके परिवारों ने भी राहत की सांस ली है। इससे पहले भी भारतीय जहाज ‘शिवालिक’ और ‘नंदा देवी’ लगभग 92 हजार मीट्रिक टन गैस लेकर भारत पहुंच चुके हैं। इन जहाजों के लगातार आगमन से देश में गैस आपूर्ति को बनाए रखने में मदद मिल रही है। भारत में घरेलू और व्यावसायिक उपयोग के लिए रसोई गैस की मांग काफी अधिक है, जिसके चलते होर्मुज मार्ग में आई बाधा ने आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ा दी थी। हालांकि, भारत सरकार ने समय रहते सक्रिय कूटनीतिक प्रयास किए और ईरान के साथ संवाद स्थापित कर भारतीय जहाजों के सुरक्षित आवागमन को सुनिश्चित कराया। ईरान ने भी स्पष्ट किया है कि भारतीय जहाजों को रोका नहीं जा रहा है और उन्हें सुरक्षित मार्ग दिया जा रहा है। इस सहयोग से भारत को ऊर्जा संकट से उबरने में काफी मदद मिली है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस संकट के दौरान भारत ने जिस प्रकार त्वरित और समन्वित कदम उठाए, वह उसकी ऊर्जा सुरक्षा नीति की मजबूती को दर्शाता है। वैकल्पिक स्रोतों से आयात बढ़ाने और कूटनीतिक स्तर पर सक्रियता दिखाने के कारण देश को बड़े संकट से बचाया जा सका। इस पूरे घटनाक्रम ने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि वैश्विक स्तर पर किसी भी प्रकार का भू-राजनीतिक तनाव सीधे ऊर्जा आपूर्ति को प्रभावित करता है। ऐसे में भारत जैसे बड़े उपभोक्ता देश के लिए समय पर रणनीतिक निर्णय लेना अत्यंत आवश्यक होता है। फिलहाल ‘जग वसंत’ के सुरक्षित भारत पहुंचने से देश में रसोई गैस की आपूर्ति को लेकर बनी अनिश्चितता काफी हद तक समाप्त हो गई है। सरकार और संबंधित एजेंसियां आगे भी स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं, ताकि भविष्य में इस प्रकार की चुनौतियों से प्रभावी ढंग से निपटा जा सके।

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