January 28, 2026

गांधी मैदान थाना के थानेदार किए गए सस्पेंड, एसएसपी ने की कार्रवाई, लापरवाही का आरोप

पटना। पटना शहर में कानून व्यवस्था को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। गांधी मैदान थाना क्षेत्र के थानेदार राजेश कुमार को उनके कार्यकाल के महज चार महीनों के भीतर ही सस्पेंड कर दिया गया है। यह कार्रवाई पटना के एसएसपी कार्तिकेय शर्मा की सिफारिश पर हुई, जिसे आईजी पटना रेंज जितेंद्र राणा ने स्वीकृति दी।
लापरवाही के आरोप बने कार्रवाई का आधार
राजेश कुमार पर मुख्य रूप से लापरवाही बरतने का आरोप है। उनके कार्यकाल में कानून व्यवस्था की स्थिति संतोषजनक नहीं रही। खासकर गोपाल खेमका हत्याकांड जैसे संवेदनशील मामले में उनकी भूमिका पर गंभीर सवाल उठे। इस मामले में यह पाया गया कि थाने से महज कुछ दूरी पर एक बड़े व्यापारी की हत्या कर दी गई और पुलिस समय पर घटनास्थल पर नहीं पहुंच पाई। यही नहीं, घटना के बाद परिजनों और स्थानीय लोगों ने भी थानेदार की कार्यशैली पर सवाल उठाए।
गोपाल खेमका हत्याकांड बना मुख्य कारण
गौरतलब है कि गोपाल खेमका की हत्या गांधी मैदान थाना क्षेत्र में हुई थी। वे एक जाने-माने व्यवसायी थे और उनकी हत्या दिनदहाड़े, थाने से कुछ ही दूरी पर कर दी गई थी। परिजनों ने आरोप लगाया कि जब उन्होंने पुलिस को सूचना दी, तब भी पुलिस घटनास्थल पर काफी देर से पहुंची। इस देरी के चलते अपराधी आसानी से भागने में सफल हो गए। इस पूरे मामले ने प्रशासन को कटघरे में खड़ा कर दिया था।
एसएसपी ने की समीक्षा, पाई गई गंभीर चूक
घटना के बाद जब मामले की जांच की गई तो पटना के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक कार्तिकेय शर्मा ने राजेश कुमार की कार्यशैली की समीक्षा की। इस दौरान कई ऐसे बिंदु सामने आए, जिनसे यह सिद्ध हुआ कि थानेदार की ओर से कार्य में लापरवाही बरती गई थी। न केवल खेमका हत्याकांड बल्कि अन्य घटनाओं में भी उनका रवैया निष्क्रिय और उदासीन रहा। इन सभी तथ्यों के आधार पर एसएसपी ने उन्हें सस्पेंड करने की सिफारिश की, जिसे आईजी ने मंजूरी दे दी।
चार महीने में ही कार्यकाल समाप्त
राजेश कुमार ने मार्च महीने में गांधी मैदान थाने का पदभार संभाला था। लेकिन उनके चार महीने के कार्यकाल में क्षेत्र की विधि व्यवस्था में सुधार के बजाय गिरावट देखने को मिली। अपराधियों के हौसले बुलंद रहे और पुलिस की उपस्थिति का असर क्षेत्र में नजर नहीं आया। इन सबके चलते केवल जनता ही नहीं, बल्कि प्रशासनिक तंत्र में भी असंतोष था।
पुलिस की भूमिका पर उठे सवाल
घटना के बाद जब मीडिया ने एसएसपी से सवाल पूछे तो उन्होंने स्पष्ट किया कि पुलिस की ओर से कोई लापरवाही नहीं बरती गई थी। उनके अनुसार जैसे ही सूचना मिली, पुलिस मौके पर पहुंच गई थी। लेकिन परिजनों और स्थानीय लोगों के बयान इसके उलट रहे। उनका कहना था कि यदि पुलिस समय पर पहुंचती तो शायद अपराधी पकड़े जा सकते थे और हत्या रोकी जा सकती थी।
सख्त प्रशासनिक कार्रवाई का संदेश
थानेदार राजेश कुमार को निलंबित किए जाने की कार्रवाई प्रशासन की ओर से यह स्पष्ट संकेत देती है कि लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। खासकर ऐसे समय में जब कानून व्यवस्था को लेकर जनता में असंतोष है, प्रशासन की यह सख्ती आवश्यक और समयोचित मानी जा रही है। इस प्रकरण ने एक बार फिर यह याद दिलाया है कि पुलिस प्रशासन की जवाबदेही केवल अपराधियों को पकड़ने तक सीमित नहीं, बल्कि समय पर कार्रवाई और जनता में भरोसा कायम रखने की भी जिम्मेदारी उस पर होती है।

You may have missed