पश्चिम चंपारण में मत्स्य पदाधिकारी घूस लेते गिरफ्तार, एक लाख के साथ निगरानी विभाग की टीम ने दबोचा
पश्चिम चंपारण। बिहार के पश्चिम चंपारण जिले से सोमवार को एक बड़ी खबर सामने आई, जिसने पूरे प्रशासनिक तंत्र को हिला कर रख दिया। यहां जिला मत्स्य पदाधिकारी पीयूष रंजन को निगरानी विभाग की विशेष टीम ने रंगे हाथ घूस लेते हुए गिरफ्तार किया। उनके पास से एक लाख रुपये नकद बरामद किए गए। दरअसल, यह मामला प्रधानमंत्री की महत्वाकांक्षी योजना “प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना” से जुड़ा हुआ है। इस योजना के तहत मछली पालन से जुड़े लाभुकों को आर्थिक सहायता और सब्सिडी प्रदान की जाती है। पश्चिम चंपारण के रहने वाले मछली पालक मुराद अनवर को इस योजना के तहत 25 लाख रुपये की स्वीकृति मिली थी, जिसमें 10 लाख रुपये की सब्सिडी शामिल थी। पीयूष रंजन पर आरोप है कि उन्होंने मुराद अनवर से सब्सिडी की राशि दिलाने के नाम पर 10 प्रतिशत घूस यानी एक लाख रुपये की मांग की। उन्होंने साफ कह दिया था कि यदि पैसा नहीं दिया गया तो योजना की फाइल को “अटका” दिया जाएगा। इससे परेशान लाभुक ने निगरानी विभाग से शिकायत की। शिकायत की गंभीरता को देखते हुए डीएसपी पवन कुमार के नेतृत्व में एक विशेष धावा दल का गठन किया गया। पहले आरोप की गुप्त रूप से जांच-पड़ताल हुई और इसे सही पाया गया। इसके बाद टीम ने योजना बनाकर सोमवार को पश्चिम चंपारण में ऑपरेशन चलाया। निगरानी विभाग ने शिकायतकर्ता को खास केमिकल लगे नोट उपलब्ध कराए। योजना के अनुसार लाभुक ने यह पैसा मत्स्य पदाधिकारी को सौंपा। जैसे ही अधिकारी ने नोट हाथ में लिए, टीम ने उन्हें रंगे हाथ पकड़ लिया। अचानक हुई इस कार्रवाई से कुछ देर तक अफरातफरी का माहौल बन गया। वहां मौजूद कई लोग भाग खड़े हुए, लेकिन अधिकारी को गिरफ्तार कर निगरानी टीम अपने साथ पटना ले गई। सूत्रों के अनुसार, मंगलवार को उन्हें कोर्ट में पेश किया जाएगा, जहां से उन्हें जेल भेजे जाने की संभावना है। यह घटना केवल एक अधिकारी की गिरफ्तारी भर नहीं है, बल्कि यह पूरे सिस्टम की उस गहरी समस्या को उजागर करती है जिसमें जनहित योजनाओं का लाभ पाने वाले वास्तविक पात्रों को भी भ्रष्टाचार का सामना करना पड़ता है। प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना जैसी योजनाएं किसानों और मछुआरों की आय बढ़ाने और उनके जीवन स्तर को सुधारने के लिए चलाई जाती हैं, लेकिन भ्रष्टाचार के कारण लाभुकों तक समय पर इसका फायदा नहीं पहुंच पाता। इस गिरफ्तारी ने जिले ही नहीं, बल्कि पूरे राज्य के प्रशासनिक तंत्र में चेतावनी का संदेश दिया है। यह स्पष्ट हो गया है कि अब रिश्वतखोरी जैसी गतिविधियों पर निगरानी विभाग की पैनी नजर है और कोई भी अधिकारी पकड़े जाने से बच नहीं सकता। संक्षेप में, पश्चिम चंपारण की यह कार्रवाई न केवल एक भ्रष्ट अधिकारी की गिरफ्तारी है, बल्कि यह उन गरीब और मेहनतकश लाभुकों के लिए उम्मीद की किरण है, जो सरकारी योजनाओं का लाभ पाने के लिए वर्षों से जद्दोजहद कर रहे हैं। यदि ऐसे ही ठोस कदम नियमित रूप से उठाए जाएं, तो निश्चित ही सरकारी योजनाओं का वास्तविक फायदा जनता तक बिना किसी बाधा के पहुंच सकेगा।


