January 28, 2026

औरंगाबाद में उत्पाद विभाग की टीम असामाजिक तत्वों का हमला, एसआई समेत चार घायल, 3 शराबी को छुड़ाया

औरंगाबाद। बिहार के औरंगाबाद जिले से मंगलवार की देर रात एक गंभीर घटना सामने आई है, जिसमें असामाजिक तत्वों द्वारा उत्पाद विभाग की टीम पर हमला किया गया। यह हमला कुटुंबा थाना क्षेत्र के धोबनी गांव के पास, बिहार-झारखंड बॉर्डर इलाके में हुआ। इस हमले में उत्पाद विभाग के एसआई कृषनंदन कुमार, चालक सुमंत कुमार सहित चार पुलिसकर्मी गंभीर रूप से घायल हो गए हैं।
शराबियों की गिरफ्तारी बनी विवाद की जड़
घटना की शुरुआत उस वक्त हुई जब उत्पाद विभाग की टीम टंडवा थाना क्षेत्र के पिछुलिया चेकपोस्ट पर ड्यूटी कर रही थी। वहां वाहन जांच के दौरान टीम ने झारखंड से शराब पीकर लौट रहे तीन युवकों को गिरफ्तार किया और उन्हें स्कॉर्पियो वाहन में बैठाकर अपने साथ ले जा रही थी। इसी दौरान किसी तरह से यह सूचना शराबियों के परिजनों और ग्रामीणों को मिल गई।
अचानक हमला और पुलिसकर्मियों से मारपीट
सूचना मिलते ही परिजन और ग्रामीण एक पिकअप वाहन में सवार होकर घटनास्थल पर पहुंचे और उत्पाद विभाग की स्कॉर्पियो में टक्कर मार दी। इसके बाद ग्रामीणों ने एसआई, चालक और अन्य पुलिसकर्मियों पर हमला कर दिया। लाठी-डंडों से लैस भीड़ ने पुलिसकर्मियों के साथ बुरी तरह मारपीट की और तीनों शराबियों को जबरन छुड़ाकर अपने साथ ले गई। इस हिंसक घटना में उत्पाद विभाग की गाड़ी को भी बुरी तरह क्षतिग्रस्त कर दिया गया।
घायलों की स्थिति गंभीर, अस्पताल में भर्ती
इस हमले में घायल पुलिसकर्मियों को पहले कुटुंबा के अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां प्राथमिक इलाज के बाद एसआई कृषनंदन कुमार और चालक सुमंत कुमार की गंभीर हालत को देखते हुए उन्हें सदर अस्पताल रेफर कर दिया गया।
पुलिस की कार्रवाई और ग्रामीणों की भूमिका
घटना की सूचना मिलते ही कुटुंबा थानाध्यक्ष अक्षयवर सिंह के नेतृत्व में पुलिस टीम घटनास्थल पर पहुंची, लेकिन तब तक ग्रामीण मौके से फरार हो चुके थे। थानाध्यक्ष ने बताया कि फिलहाल उत्पाद विभाग की ओर से कोई लिखित आवेदन नहीं मिला है। आवेदन मिलते ही एफआईआर दर्ज कर उचित कार्रवाई की जाएगी।
रुपए की मांग का आरोप, विवाद की दूसरी परत
ग्रामीण सूत्रों के अनुसार, यह आरोप लगाया गया है कि उत्पाद विभाग की टीम ने गिरफ्तार शराबियों को छोड़ने के बदले उनके परिजनों से रुपए की मांग की थी। परिजनों को पैसे लेकर धोबनी गांव के पास बुलाया गया था, जहां बातचीत विवाद में बदल गई और हिंसक झड़प हुई।
पहले भी हो चुके हैं ऐसे हमले
गौरतलब है कि यह पहली बार नहीं है जब टंडवा इलाके में उत्पाद विभाग की टीम पर हमला हुआ है। करीब दो महीने पहले भी इसी इलाके में एक बारात के दौरान उत्पाद विभाग द्वारा की जा रही चेकिंग के दौरान बारातियों ने टीम पर हमला कर दिया था। उस घटना में भी एक दरोगा और तीन अन्य पुलिसकर्मी घायल हुए थे।
कानून व्यवस्था पर उठते सवाल
लगातार दो महीनों में ऐसी दो घटनाएं यह स्पष्ट करती हैं कि उत्पाद विभाग की कार्रवाई ग्रामीणों और असामाजिक तत्वों के निशाने पर है। पुलिस पर हमला और शराबियों को छुड़ाना न केवल कानून व्यवस्था पर सवाल उठाता है, बल्कि यह दर्शाता है कि शराबबंदी कानून के क्रियान्वयन में कितनी चुनौतियां हैं।
समाप्ति और कार्रवाई की उम्मीद
यह घटना प्रशासन के लिए चेतावनी है कि शराबबंदी को सफल बनाने के लिए न केवल सख्त कार्रवाई की जरूरत है, बल्कि पुलिसकर्मियों की सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम भी अनिवार्य हैं। उत्पाद विभाग की ओर से आवेदन दिए जाने के बाद उम्मीद है कि इस मामले में कठोर कानूनी कदम उठाए जाएंगे।

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