February 25, 2026

सीवान में नगर परिषद के कार्यपालक पदाधिकारी के तीन ठिकानों पर ईओयू छापेमारी, मचा हड़कंप, आय से अधिक संपत्ति का मामला

सीवान। बिहार में भ्रष्टाचार के खिलाफ लगातार कार्रवाई कर रही आर्थिक अपराध इकाई (Economic Offences Unit – EOU) ने एक बार फिर बड़ा कदम उठाया है। बुधवार को सीवान नगर परिषद की कार्यपालक पदाधिकारी अनुभूति श्रीवास्तव के तीन ठिकानों पर छापेमारी की गई। इस कार्रवाई ने न केवल स्थानीय प्रशासनिक हलकों में बल्कि पूरे प्रदेश में हड़कंप मचा दिया है। सूत्रों के अनुसार, छापेमारी एक साथ तीन स्थानों पर की गई— पहला लखनऊ के गोमती नगर स्थित आवास, दूसरा पटना के रुपसपुर इलाके के अर्पणा मेंशन और तीसरा सीवान नगर परिषद स्थित सरकारी आवास पर। ईओयू की टीम सुबह से ही दस्तावेजों, बैंक खातों और संपत्ति से जुड़े कागजातों की बारीकी से जांच कर रही है। ईओयू की प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि अनुभूति श्रीवास्तव ने अपनी वैध आय से करीब 79 प्रतिशत अधिक संपत्ति अर्जित की है। यानी उनकी घोषित आय और वास्तविक संपत्ति के बीच भारी अंतर पाया गया है। यही कारण है कि आर्थिक अपराध इकाई ने विस्तृत जांच की कार्रवाई तेज कर दी है। यह पहला अवसर नहीं है जब अनुभूति श्रीवास्तव का नाम भ्रष्टाचार के मामलों में आया हो। अगस्त 2021 में भी विशेष निगरानी इकाई (Special Vigilance Unit) ने उनके खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (Prevention of Corruption Act) के तहत मामला दर्ज किया था। उस मामले में चार्जशीट दाखिल हो चुकी है और फिलहाल वह न्यायालय में विचाराधीन है। मामला दर्ज होने के बाद उन्हें निलंबित कर दिया गया था, लेकिन हाल ही में निलंबन खत्म होने के बाद उनकी सीवान नगर परिषद में कार्यपालक पदाधिकारी के रूप में तैनाती की गई। तैनाती के कुछ ही महीनों के भीतर एक बार फिर उन पर कार्रवाई होने से प्रशासनिक हलकों में चर्चा का विषय बन गया है। ईओयू की टीम फिलहाल संपत्ति के स्रोत और वैधता की जांच कर रही है। टीम यह पता लगाने में जुटी है कि उनकी आय के मुकाबले इतनी अधिक संपत्ति कैसे और किन माध्यमों से अर्जित की गई। यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो उनके खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई तय मानी जा रही है।इस पूरी कार्रवाई से यह स्पष्ट हो गया है कि राज्य सरकार भ्रष्टाचार के मामलों में किसी भी स्तर पर समझौता करने के मूड में नहीं है। नगर परिषद जैसी संस्थाओं में कार्यरत अधिकारी अगर पारदर्शिता और ईमानदारी से काम नहीं करेंगे तो जनता का विश्वास टूटेगा। ऐसे में आर्थिक अपराध इकाई की छापेमारी को भ्रष्टाचार पर लगाम लगाने की एक गंभीर पहल के रूप में देखा जा रहा है। कुल मिलाकर, सीवान की इस कार्रवाई ने एक बार फिर यह संदेश दिया है कि भ्रष्टाचार के मामलों में चाहे अधिकारी कितना भी प्रभावशाली क्यों न हो, कानून के शिकंजे से बच पाना कठिन है। अब सबकी निगाहें आगे आने वाली जांच रिपोर्ट और न्यायालय के फैसले पर टिकी होंगी।

You may have missed