February 21, 2026

मनीष कश्यप के मुख्य मोबाइल की बरामदगी के लिए ईओयू की छापेमारी जारी, यूपी पुलिस ने नोएडा स्थित फ्लाइट को भी खंगाला

पटना। आर्थिक अपराध इकाई (ईओयू) की टीम यूपी पुलिस के साथ नोएडा में मनीष कश्यप के फ्लैट पर छापेमारी की। टीम को फ्लैट से वह मोबाइल नहीं मिला, जिससे फर्जी वीडियो शूट करने और वायरल करने का आरोप है। ईओयू अफसरों का कहना है कि मनीष कश्यप न सही बात बता रहे हैं और न ही कोर्ट में सही जानकारी दे रहें। मनीष कश्यप के बताए जगह पर मोबाइल तलाशने ईओयू के डीएसपी शुक्रवार को नोएडा पहुंचे थे। जिस चीज की तलाश में टीम बिहार से वहां गई, घंटों तलाशने के बाद भी वो नहीं मिली। टीम ने फ्लैट का चप्पा-चप्पा खंगाल दिया था। नोएडा के सेक्टर-70 में मनीष कश्यप ने एक फ्लैट ले रखा है। टीम ने इसी फ्लैट पर छापेमारी की है। टीम को इसके और दो ठिकानों का पता चला है। अब जल्द ही उन ठिकानों पर भी छापेमारी होगी।
ईओयू को मोबाइल की है तलाश
आर्थिक अपराध इकाई को मनीष कश्यप के उस मोबाइल की तलाश है, जिससे वो वीडियो बनाया करता था। फिर उसे सोशल मीडिया के अलग-अलग प्लेटफॉर्म पर अपलोड किया करता था। वही जांच एजेंसी ने ट्विटर, फेसबुक और यूट्यूब जैसे सोशल मीडिया से मनीष कश्यप की तरफ से अपलोड किए गए वीडियो से संबंधित एविडेंस जुटा लिए हैं, लेकिन डिजिटल एविडेंस को और पुख्ता करने के लिए ईओयू उस मोबाइल को जब्त करना चाहती है, जिससे उसने वीडियो बनाए। ताकि फोरेंसिक टेस्ट कराकर डिजिटल एविडेंस को और भी पुख्ता कराया जा सके।
कोर्ट में भी झूठ बोल रहा मनीष : ईओयू
ईओयू ने पहली बार मनीष कश्यप को रिमांड पर लिया था, तब उससे बहुत अधिक पूछताछ नहीं हो सकी थी, क्योंकि वो रिमांड मात्र 24 घंटे की ही थी। इसीलिए जब दोबारा रिमांड के लिए ईओयू ने कोर्ट में अपनी अर्जी दी तो उसमें इस बात को अपना आधार बनाया कि उन्हें मनीष कश्यप का वो मोबाइल चाहिए, जिससे वो वीडियो बनाया करता था। इस संबंध में उससे पूछताछ करने के लिए और वक्त भी चाहिए। सूत्रों के अनुसार उसी दौरान कोर्ट में मनीष कश्यप ने बताया था कि उसका वो मोबाइल नोएडा के फ्लैट पर रखा है। इसी आधार पर कोर्ट ने भी 4 दिनों के रिमांड की अनुमति भी दी। पर नोएडा में छापेमारी के बाद वो मोबाइल मिला ही नहीं। ईओयू की माने तो मनीष कश्यप लगातार झूठ पर झूठ बोल रहा है। जांच एजेंसी के साथ-साथ वो कोर्ट को भी बरगला रहा है। वहां भी उसने झूठ ही बोला। पूछताछ के दौरान वो को-ऑपरेट नहीं कर रहा है।

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