August 30, 2025

विशेष भूमि सर्वेक्षण के 146 कर्मियों को विभाग ने किया बर्खास्त, आदेश जारी, नियम उल्लंघन पर हुई कार्रवाई

पटना। पटना से एक बड़ी खबर सामने आई है, जहाँ राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने विशेष सर्वेक्षण कर्मियों के हड़ताल पर जाने के मामले में कठोर कार्रवाई की है। विभाग ने दो दिनों में कुल 256 कर्मियों की सेवाएँ समाप्त कर दी हैं। मंगलवार को विभाग ने 146 कर्मियों को बर्खास्त करने का आदेश जारी किया, जबकि सोमवार को 110 कर्मियों की सेवाएँ पहले ही समाप्त की जा चुकी थीं। बर्खास्त किए गए इन संविदा कर्मियों में विशेष सर्वेक्षण अमीन, कानूनगो, लिपिक और सहायक बंदोबस्त पदाधिकारी शामिल हैं। विभाग का कहना है कि ये सभी संविदा कर्मचारी अनुचित मांगों को लेकर हड़ताल पर चले गए थे और इस कारण राज्य सरकार के महत्वाकांक्षी “राजस्व महा–अभियान” पर सीधा असर पड़ा। इस अभियान के तहत सरकार का लक्ष्य है कि पूरे बिहार में जमाबंदी की त्रुटियों का सुधार हो, ऑफलाइन जमाबंदी को ऑनलाइन किया जाए और बंटवारा व नामांतरण जैसी सेवाएँ लोगों को शीघ्र उपलब्ध हों। लेकिन बड़ी संख्या में कर्मियों के काम छोड़ने से अभियान की गति रुक गई, जिससे आम जनता प्रभावित हुई। हड़ताल पर गये कर्मचारियों पर आरोप है कि उन्होंने संविदा शर्तों का उल्लंघन किया। विभाग ने स्पष्ट किया कि इनकी नियुक्ति संविदा नियमावली 2019 और संशोधित नियमावली 2022 के तहत हुई थी। नियमों में साफ उल्लेख है कि इनकी सेवाएँ किसी भी स्थिति में नियमित नियुक्ति में परिवर्तित नहीं होंगी। इसके बावजूद कर्मचारी नियमितीकरण, पदनाम परिवर्तन और स्थायी सरकारी कर्मचारियों के समान वेतनमान जैसी मांगों को लेकर आंदोलन पर उतर आए। विभाग का मानना है कि यह न केवल शपथपत्र का उल्लंघन है बल्कि सरकारी आदेश की अवहेलना और अनुशासनहीनता भी है।राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने मंगलवार को जिन 146 कर्मचारियों को बर्खास्त किया, उनमें 97 विशेष सर्वेक्षण अमीन, 24 कानूनगो और 25 लिपिक शामिल हैं। सभी पर हड़ताल भड़काने और सरकारी कार्य में बाधा डालने का आरोप लगा है। विभाग ने यह कार्रवाई जिलों से प्राप्त प्रतिवेदन के आधार पर की। सरकार ने इस संकट से निपटने के लिए वैकल्पिक व्यवस्था भी की है। राजस्व महाअभियान को सुचारु रूप से जारी रखने के लिए अब 11,549 सीएससी (CSC) कर्मियों को इस कार्य में लगाया गया है। इससे यह संकेत मिलता है कि सरकार आंदोलनकारियों के दबाव में आने के बजाय सख्त रुख अपनाने के पक्ष में है। गौरतलब है कि पटना के गर्दनीबाग धरनास्थल पर पिछले कई दिनों से दस हजार से अधिक संविदा सर्वेक्षण कर्मी अपनी मांगों को लेकर आंदोलनरत हैं। लेकिन सरकार ने स्पष्ट संदेश दिया है कि जनहित से जुड़े इस अभियान में किसी भी तरह की बाधा बर्दाश्त नहीं की जाएगी। यही कारण है कि विभाग ने अनुशासनहीन कर्मियों की संविदा सेवाएँ नियमावली की धारा 8(4) के तहत समाप्त कर दी हैं और शेष अनुपस्थित कर्मचारियों पर भी कार्रवाई की तैयारी चल रही है। इस तरह यह मामला न केवल कर्मियों और सरकार के बीच टकराव को उजागर करता है, बल्कि यह भी दिखाता है कि राज्य सरकार अपने महत्वाकांक्षी कार्यक्रमों को लेकर कितनी गंभीर है।

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