बेगूसराय में शौच करने गया व्यक्ति नाले में डूबा, दर्दनाक मौत, परिवार में मचा हड़कंप

बेगूसराय। बिहार के बेगूसराय में एक हृदयविदारक घटना सामने आई है, जिसने पूरे इलाके को शोक और आक्रोश से भर दिया। नगर थाना क्षेत्र के ट्रैफिक चौक के पास उस समय अफरातफरी मच गई जब लोगों ने एक व्यक्ति का शव नाले में पड़ा देखा। मृतक की पहचान मुंगेरीगंज निवासी मोहम्मद फारूक के रूप में हुई है, जो पेशे से मुर्गा काटने और सप्लाई करने का काम करते थे। जानकारी के मुताबिक, फारूक बीती रात मुर्गा सप्लाई करने ट्रैफिक चौक पहुंचे थे। इसी दौरान उन्हें शौच की आवश्यकता पड़ी और वे पास ही बने नवनिर्मित नाले के किनारे चले गए। दुर्भाग्य से उनका पैर फिसल गया और वे सीधे नाले में जा गिरे। पानी भरने की वजह से वे बाहर निकल नहीं पाए और घटनास्थल पर ही उनकी मौत हो गई। रातभर घर न लौटने पर जब परिजनों को चिंता हुई तो उन्होंने तलाश शुरू की। अगली सुबह स्थानीय लोगों ने नाले में शव देखा तो इलाके में सनसनी फैल गई। इसके बाद नगर थाना पुलिस को सूचना दी गई। मौके पर पहुंची पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। जैसे ही यह खबर मृतक के परिवारवालों तक पहुंची, घर में कोहराम मच गया। पत्नी और परिजन इस अचानक हुई मौत से सदमे में आ गए। स्थानीय लोगों का कहना है कि इस हादसे के पीछे साफ तौर पर नगर निगम और प्रशासन की लापरवाही जिम्मेदार है। उन्होंने बताया कि नाले का निर्माण तो कर दिया गया, लेकिन उसकी सुरक्षा के लिए घेराबंदी नहीं की गई। अंधेरे या असावधानी के कारण कोई भी व्यक्ति आसानी से नाले में गिर सकता है। यही लापरवाही फारूक की मौत का कारण बनी। हादसे ने न केवल एक परिवार को उजाड़ दिया, बल्कि प्रशासनिक लापरवाही की पोल भी खोल दी। लोग सवाल उठा रहे हैं कि आखिर क्यों विकास कार्यों में केवल निर्माण पर ध्यान दिया जाता है, लेकिन सुरक्षा की अनदेखी कर दी जाती है। अगर नाले पर रेलिंग या घेराबंदी होती तो यह दर्दनाक घटना शायद टल जाती। फिलहाल पुलिस मामले की जांच कर रही है, लेकिन इस घटना ने इलाके में गम और गुस्से की लहर पैदा कर दी है। स्थानीय लोग प्रशासन से मांग कर रहे हैं कि इस प्रकार के सभी नालों को सुरक्षित किया जाए ताकि आगे किसी और को इस तरह अपनी जान न गंवानी पड़े। यह घटना साफ तौर पर इस बात का उदाहरण है कि लापरवाह विकास कभी-कभी जीवन को तबाह कर देता है। एक मेहनतकश व्यक्ति, जो अपने परिवार की रोज़ी-रोटी के लिए संघर्ष कर रहा था, केवल प्रशासनिक सुस्ती और सुरक्षा की अनदेखी की वजह से अपनी जान से हाथ धो बैठा। अब यह देखना होगा कि नगर निगम इस हादसे से सबक लेकर कितनी जल्दी आवश्यक कदम उठाता है।
