2026 के लिए शिक्षा विभाग का कैलेंडर जारी, स्कूलों में होगा 75 दिनों का अवकाश, कई त्यौहार शामिल
पटना। नए वर्ष 2026 के लिए बिहार शिक्षा विभाग ने सरकारी स्कूलों का अवकाश कैलेंडर जारी कर दिया है। इस कैलेंडर में पूरे वर्ष में कुल 75 दिनों की छुट्टियों का प्रावधान किया गया है। यदि रविवारों को अलग कर दिया जाए, तो यह संख्या 65 दिनों पर आ जाती है। विभाग के अनुसार छुट्टियों का यह निर्धारण इस तरह किया गया है कि छात्र और शिक्षक दोनों पर्याप्त विश्राम पा सकें तथा नियमित पठन-पाठन पर कोई बड़ा नकारात्मक प्रभाव न पड़े।
गर्मियों की छुट्टियां
कैलेंडर में सबसे पहले गर्मियों की छुट्टियों का उल्लेख किया गया है, जो कुल 20 दिनों की होंगी। बिहार में मई और जून के महीनों में तापमान काफी बढ़ जाता है, जिससे बच्चों और शिक्षकों को गर्म हवाओं और लू के प्रकोप का सामना करना पड़ता है। इसी कारण यह अवकाश अवधि रखी जाती है, ताकि छात्र घर पर सुरक्षित रह सकें और विश्राम ले सकें। गर्मियों की छुट्टियों का उद्देश्य केवल आराम देना नहीं होता, बल्कि बच्चों को परिवार के साथ समय बिताने और पढ़ाई के लिए मानसिक रूप से तैयार होने का अवसर प्रदान करना भी है। इस दौरान विद्यार्थी अपने समय का सदुपयोग करते हुए पिछले अध्यायों की पुनरावृत्ति कर सकते हैं या नई कक्षाओं की तैयारी भी कर सकते हैं।
दीपावली से छठ पूजा तक छुट्टी
बिहार में दीपावली और छठ पूजा अत्यंत महत्वपूर्ण त्यौहार हैं। इसलिए इस बार इन दोनों त्योहारों को मिलाकर 10 दिनों की लंबी छुट्टी निर्धारित की गई है। दीपावली रोशनी और उत्सव का पर्व है, जबकि छठ पूजा बिहार की सांस्कृतिक पहचान का प्रमुख हिस्सा है। इस अवधि में अधिकांश परिवार सामूहिक रूप से त्योहार मनाते हैं, इसलिए छात्रों के लिए भी यह समय विशेष मायने रखता है। यह अवकाश काल स्कूल और शिक्षण गतिविधियों के पूर्ण विराम का समय माना जाता है, जिसमें बच्चों को पारिवारिक और सामाजिक गतिविधियों में हिस्सा लेने का उचित अवसर मिलता है।
शीतकालीन अवकाश
सर्दियों के मौसम को ध्यान में रखते हुए शिक्षा विभाग ने इस वर्ष शीतकालीन अवकाश सात दिनों का रखा है। बिहार में दिसंबर और जनवरी के दौरान ठंड काफी बढ़ जाती है, जिससे बच्चों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की संभावना रहती है। इसलिए इस छोटी अवधि की छुट्टी का उद्देश्य बच्चों को कड़कड़ाती ठंड से राहत देना है। इन दिनों में स्कूल बंद रहने से विद्यार्थी घर पर ही अपनी रुचियों, रचनात्मक गतिविधियों और हॉबीज को विकसित करने में समय लगा सकते हैं।
दुर्गा पूजा अवकाश
दुर्गा पूजा देशभर में मनाए जाने वाले प्रमुख त्योहारों में से एक है और बिहार में भी इसे काफी श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जाता है। इस बार दुर्गा पूजा पर पांच दिनों की छुट्टियां तय की गई हैं। यह समय न केवल धार्मिक महत्व रखता है, बल्कि सांस्कृतिक दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण होता है। छात्र अपने परिवारों के साथ त्योहार की तैयारियों और आयोजनों में भाग लेकर अपनी सांस्कृतिक जड़ों से भी जुड़ाव महसूस करते हैं।
होली की छुट्टियां
रंगों के त्योहार होली को ध्यान में रखते हुए शिक्षा विभाग ने दो दिनों की छुट्टी प्रदान की है। होली खुशियों, उमंग और सामाजिक मेलजोल का पर्व है। इन छुट्टियों के दौरान बच्चे रंगों, खेलकूद और पारंपरिक गतिविधियों के माध्यम से आनंदित होते हैं। होली का अवकाश छात्रों के लिए मानसिक तरोताज़गी का समय भी माना जाता है।
अवकाश कैलेंडर का संतुलन
शिक्षा विभाग का मानना है कि छुट्टियों का यह संतुलित वितरण छात्रों के समग्र विकास में सहायक होगा। त्योहारों और मौसम के अनुसार अवकाश निर्धारण से जहां बच्चों को विश्राम मिलता है, वहीं शिक्षण कार्य भी व्यवस्थित ढंग से चलता है। शिक्षकों और अभिभावकों ने भी इस नए कैलेंडर पर संतोष व्यक्त किया है। उनका कहना है कि छुट्टियों का यह क्रम बच्चों को पढ़ाई और अन्य गतिविधियों के बीच उचित संतुलन बनाने में मदद करेगा। बिहार सरकार द्वारा जारी 2026 का यह अवकाश कैलेंडर न केवल शिक्षण व्यवस्था को सुचारु रखने में सहायक है, बल्कि छात्रों के सांस्कृतिक, मानसिक और पारिवारिक जीवन के संतुलन को भी प्राथमिकता देता है। यह स्पष्ट रूप से दर्शाता है कि विभाग ने बच्चों के हितों को ध्यान में रखते हुए एक संतुलित और सुव्यवस्थित छुट्टियों का कार्यक्रम तैयार किया है।


