January 1, 2026

पटना में जमीन और फ्लैट की खरीद-बिक्री में कमी, 45 फ़ीसदी कम हुआ राजस्व, नए साल में वृद्धि की उम्मीद

पटना। शहर में जमीन और फ्लैट की खरीद-बिक्री इस समय मंदी के दौर से गुजर रही है। खासकर पटना सदर इलाके में इस वित्तीय वर्ष के दौरान संपत्ति लेन-देन में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई है। निबंधन विभाग के ताजा आंकड़े यह साफ संकेत देते हैं कि पिछले वर्ष की तुलना में न केवल दस्तावेजों की संख्या घटी है, बल्कि सरकार को मिलने वाले राजस्व में भी भारी कमी आई है। इस स्थिति ने प्रशासन और रियल एस्टेट क्षेत्र से जुड़े लोगों की चिंता बढ़ा दी है।
निबंधन और राजस्व के आंकड़े क्या कहते हैं
पटना जिला अवर निबंधन कार्यालय के अनुसार वित्तीय वर्ष 2024-25 में दिसंबर माह तक कुल 18,435 दस्तावेजों का निबंधन हुआ था। इससे सरकार को 457.20 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ था। वहीं, चालू वित्तीय वर्ष 2025-26 में इसी अवधि के दौरान केवल 15,950 दस्तावेज ही निबंधित हो सके, जिससे 395.36 करोड़ रुपये का राजस्व मिला। इस तरह विभाग द्वारा निर्धारित 714.81 करोड़ रुपये के वार्षिक लक्ष्य की तुलना में करीब 45 प्रतिशत कम राजस्व ही जुट पाया है।
संपत्ति की बढ़ती कीमतें बनी बड़ी वजह
विशेषज्ञों और निबंधन विभाग के अधिकारियों का मानना है कि जमीन और फ्लैट की लगातार बढ़ती कीमतें इस गिरावट का सबसे बड़ा कारण हैं। पटना में बीते कुछ वर्षों में संपत्ति के दाम तेजी से बढ़े हैं, जिससे आम मध्यमवर्गीय खरीदार की पहुंच से घर और जमीन दूर होती चली गई है। महंगे दामों के कारण लोग खरीदारी टाल रहे हैं या फिर छोटे निवेश की ओर रुख कर रहे हैं, जिसका सीधा असर निबंधन की संख्या पर पड़ा है।
नए नियमों का असर और निर्माण में कमी
रियल एस्टेट रगुलेटरी अथॉरिटी द्वारा लागू किए गए नए नियमों ने भी इस स्थिति को प्रभावित किया है। इन नियमों के कारण कई बिल्डर और डेवलपर नए प्रोजेक्ट शुरू करने में सतर्कता बरत रहे हैं। नए फ्लैटों के निर्माण में आई कमी के चलते बाजार में उपलब्ध संपत्तियों की संख्या भी घटी है। जब नए प्रोजेक्ट कम होंगे, तो स्वाभाविक रूप से निबंधन के आंकड़ों पर इसका नकारात्मक असर पड़ेगा।
जुलाई से दिसंबर तक गिरावट का सिलसिला
अगर महीनेवार आंकड़ों पर नजर डालें तो साफ दिखता है कि जुलाई से दिसंबर के बीच निबंधन में लगातार कमी आई है। जुलाई 2025 में 2,362 दस्तावेजों का निबंधन हुआ, जबकि पिछले वर्ष जुलाई में यह संख्या 2,413 थी। अगस्त में स्थिति और खराब हुई, जहां इस साल केवल 1,990 दस्तावेज निबंधित हुए, जबकि पिछले साल यह संख्या 2,664 थी। सितंबर में गिरावट और तेज हो गई और केवल 1,200 दस्तावेज ही निबंधित हो सके, जबकि एक साल पहले यह आंकड़ा 2,451 था।
अक्टूबर से दिसंबर तक की स्थिति
अक्टूबर, नवंबर और दिसंबर महीनों में भी यही रुझान देखने को मिला। अक्टूबर 2025 में 1,701 दस्तावेजों का निबंधन हुआ, नवंबर में 1,669 और दिसंबर में मात्र 868 दस्तावेज ही दर्ज किए जा सके। दिसंबर का आंकड़ा विशेष रूप से चिंताजनक माना जा रहा है, क्योंकि यह पूरे वर्ष का सबसे कम निबंधन रहा। इसके साथ ही राजस्व में भी भारी गिरावट दर्ज की गई।
माहवार राजस्व का विश्लेषण
वित्तीय वर्ष 2025-26 के अप्रैल से दिसंबर तक के राजस्व आंकड़े भी मंदी की तस्वीर पेश करते हैं। अप्रैल में 56.96 करोड़ रुपये, मई में 57.48 करोड़, जून में 44.37 करोड़ और जुलाई में 51.68 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ। अगस्त में 51.60 करोड़ रुपये मिले, लेकिन सितंबर में यह घटकर 28.71 करोड़ रुपये रह गया। अक्टूबर में 43.65 करोड़, नवंबर में 38.87 करोड़ और दिसंबर में केवल 21.64 करोड़ रुपये का राजस्व जुटाया जा सका।
निबंधन विभाग की चिंता और रणनीति
निबंधन विभाग के अधिकारी इस स्थिति को गंभीरता से ले रहे हैं। उनका कहना है कि यदि जमीन और फ्लैट की कीमतों में स्थिरता नहीं आई और नए निर्माण को बढ़ावा नहीं मिला, तो राजस्व लक्ष्य हासिल करना मुश्किल होगा। विभाग की योजना है कि आम लोगों और निवेशकों को जागरूक किया जाए, ताकि वे मौजूदा नियमों और बाजार की स्थिति को समझकर निर्णय ले सकें।
विशेषज्ञों की राय और आगे की उम्मीद
रियल एस्टेट विशेषज्ञों का मानना है कि पटना में संपत्ति बाजार को दोबारा रफ्तार देने के लिए सरकार और निजी कंपनियों को मिलकर काम करना होगा। नए फ्लैट निर्माण को प्रोत्साहन देना, नियमों को व्यावहारिक बनाना और कीमतों को संतुलित रखना बेहद जरूरी है। इससे न केवल खरीदारों का भरोसा बढ़ेगा, बल्कि निबंधन और राजस्व में भी सुधार देखने को मिलेगा। वर्तमान वित्तीय वर्ष के आंकड़े यह स्पष्ट करते हैं कि पटना सदर इलाके में संपत्ति बाजार की सुस्ती का सीधा असर निबंधन और सरकारी राजस्व पर पड़ा है। जुलाई से दिसंबर तक लगातार गिरावट यह संकेत देती है कि महंगी होती संपत्ति आम लोगों की पहुंच से बाहर होती जा रही है। आने वाले महीनों में यदि कीमतों में स्थिरता आती है और नए निर्माण कार्य शुरू होते हैं, तो नए साल में संपत्ति बाजार और राजस्व दोनों में सुधार की उम्मीद की जा सकती है।

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