पटना में सिलेंडर की कमी से चाय और नाश्ते की दुकानों पर संकट, लकड़ी-कोयले के सहारे चल रहा कारोबार

  • सिलेंडर नहीं मिलने से कई दुकानों पर ताला, कुछ दुकानदार वैकल्पिक ईंधन से चला रहे काम
  • चाय के दाम 10 से बढ़कर 12 रुपये तक पहुंचे, बढ़ती लागत का असर आम लोगों की जेब पर

पटना। देश के कई हिस्सों में घरेलू और व्यावसायिक गैस सिलेंडर की कमी का असर अब छोटे कारोबारों पर भी स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगा है। गैस सिलेंडर की आपूर्ति प्रभावित होने के कारण चाय और नाश्ते की छोटी दुकानों के सामने रोजमर्रा का काम चलाना चुनौती बन गया है। कई दुकानदारों को मजबूरी में अपनी दुकानें बंद करनी पड़ी हैं, जबकि कुछ लोग लकड़ी और कोयले के चूल्हे का सहारा लेकर कारोबार चला रहे हैं। इसका सीधा असर आम उपभोक्ताओं पर भी पड़ रहा है, क्योंकि रोजमर्रा की चीजों की कीमतों में धीरे-धीरे बढ़ोतरी होने लगी है। शहरों और कस्बों के चौक-चौराहों पर मिलने वाली चाय की कीमत पहले जहां लगभग 10 रुपये हुआ करती थी, अब वह बढ़कर करीब 12 रुपये तक पहुंच गई है। कई जगहों पर तो कीमत इससे भी अधिक हो गई है। दुकानदारों का कहना है कि गैस सिलेंडर आसानी से उपलब्ध नहीं हो पा रहा है, जिसके कारण उन्हें दूसरे ईंधन का उपयोग करना पड़ रहा है। इससे उनका खर्च बढ़ गया है और उसी का असर चाय तथा नाश्ते की कीमतों पर दिखाई दे रहा है। दुकानदारों के अनुसार पहले लकड़ी की कीमत 12 से 15 रुपये प्रति किलोग्राम के आसपास होती थी, लेकिन अब यह बढ़कर लगभग 25 से 30 रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच गई है। इसी तरह कोयले की कीमत भी पहले लगभग 20 रुपये प्रति किलोग्राम थी, जो अब बढ़कर करीब 30 रुपये प्रति किलोग्राम हो गई है। ईंधन की इन बढ़ती कीमतों ने छोटे व्यापारियों के सामने नई आर्थिक चुनौती खड़ी कर दी है। चाय विक्रेता कन्हैया मंडल ने बताया कि गैस सिलेंडर नहीं मिलने की वजह से दुकान चलाना काफी मुश्किल हो गया है। उन्होंने कहा कि परिवार का पालन-पोषण इसी दुकान से होता है, इसलिए मजबूरी में लकड़ी और कोयले पर चाय बनानी पड़ रही है। हालांकि इस तरीके से चाय बनाने में अधिक समय लगता है और काम की रफ्तार भी धीमी हो जाती है। इसके साथ ही लकड़ी और कोयले की कीमतें भी लगातार बढ़ रही हैं, जिससे खर्च और अधिक बढ़ गया है। इसी वजह से उन्हें चाय की कीमत में थोड़ी बढ़ोतरी करनी पड़ी है। गैस सिलेंडर की कमी का असर केवल छोटी चाय दुकानों तक सीमित नहीं है। कई होटल और भोजनालय भी इस संकट से प्रभावित हो रहे हैं। गैस की आपूर्ति नियमित नहीं होने के कारण कई होटल और रेस्टोरेंट अब कोयले या अन्य वैकल्पिक साधनों पर खाना बनाने को मजबूर हैं। इससे उनके संचालन खर्च में वृद्धि हो गई है, जिसके कारण कई जगहों पर भोजन की कीमतों में भी बढ़ोतरी देखने को मिल रही है। ग्राहकों का कहना है कि गैस सिलेंडर की कमी के कारण आम लोगों की परेशानी बढ़ती जा रही है। कई घरों में भी खाना बनाने में कठिनाई हो रही है और लोग लकड़ी, विद्युत आधारित चूल्हे या कोयले के चूल्हे का सहारा लेने लगे हैं। इसका असर दैनिक जीवन पर पड़ रहा है और छोटी-छोटी चीजों के दाम भी बढ़ने लगे हैं। आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि यदि गैस की आपूर्ति जल्द सामान्य नहीं हुई तो छोटे व्यापारियों और आम उपभोक्ताओं दोनों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। फिलहाल लोग उम्मीद कर रहे हैं कि जल्द ही गैस सिलेंडर की आपूर्ति सामान्य होगी और रोजमर्रा के कारोबार तथा घरेलू कामकाज पर पड़ रहा यह असर कम होगा।

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