12 को हड़ताल पर रहेंगे पटना नगर निगम के सफाई कर्मचारी, काली पट्टी बांधकर करेंगे विरोध प्रदर्शन
पटना। राजधानी पटना की सफाई व्यवस्था 12 फरवरी को पूरी तरह प्रभावित रहने की आशंका है। पटना नगर निगम के सफाई कर्मचारी इस दिन हड़ताल पर रहेंगे और काली पट्टी बांधकर विरोध प्रदर्शन करेंगे। यह हड़ताल केंद्र सरकार द्वारा 44 श्रम कानूनों को समाप्त कर चार नए श्रम संहिता लागू किए जाने के विरोध में बुलाई गई है। केंद्रीय श्रमिक संगठनों के आह्वान पर होने वाली इस राष्ट्रीय हड़ताल को पटना नगर निगम के कर्मियों ने नैतिक समर्थन देने का सर्वसम्मति से निर्णय लिया है। नगर निगम कर्मियों के हड़ताल पर जाने से शहर की सफाई व्यवस्था ठप रहने की संभावना है। कर्मचारियों ने साफ कर दिया है कि 12 फरवरी को वे काम पर नहीं आएंगे और अपने विरोध को शांतिपूर्ण तरीके से दर्ज कराएंगे। इस दौरान कर्मचारी काली पट्टी बांधकर प्रदर्शन करेंगे और अदालतगंज से डाकबंगला तक पैदल मार्च करेंगे। इस प्रदर्शन में बड़ी संख्या में सफाईकर्मियों के शामिल होने की उम्मीद जताई जा रही है। पटना नगर निगम चतुर्थ वर्गीय कर्मचारी संघ के अध्यक्ष जितेंद्र कुमार ने बताया कि जिन 44 श्रम कानूनों को खत्म कर चार श्रम संहिताएं लाई गई हैं, वे मजदूरों के हितों के खिलाफ हैं। उनका कहना है कि पुराने श्रम कानून मजदूरों के अधिकारों की रक्षा करते थे, जबकि नई श्रम संहिताएं मालिकों के पक्ष में बनाई गई हैं। इन संहिताओं के लागू हो जाने के बाद मजदूरों के लिए अपने अधिकारों की लड़ाई लड़ना और भी मुश्किल हो जाएगा। जितेंद्र कुमार ने कहा कि पहले यूनियन बनाने के लिए 25 कर्मचारियों की जरूरत होती थी, लेकिन नई व्यवस्था में यूनियन गठन के लिए 300 कर्मचारियों की अनिवार्यता रखी गई है। इससे छोटे संगठनों और यूनियनों के लिए आवाज उठाना लगभग असंभव हो जाएगा। उन्होंने कहा कि ऐसे हालात में छोटे यूनियन वाले अपने अधिकारों के लिए कुछ भी नहीं कर पाएंगे। इसी कारण चार श्रम संहिता वापस लेने की मांग को लेकर यह हड़ताल की जा रही है। हड़ताल को सफल बनाने के लिए 11 फरवरी को भी विरोध मार्च निकाले जाने की योजना है। यह मार्च रामवतार शास्त्री गोलंबर, राजेंद्र नगर से शुरू होकर लोहिया पार्क, कंकड़बाग तक जाएगा। इस दौरान कर्मचारी सरकार के खिलाफ नारेबाजी करेंगे और अपनी मांगों को सार्वजनिक रूप से रखेंगे। कर्मचारी संगठनों का कहना है कि जब तक उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं किया जाएगा, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा। नगर निगम कर्मियों ने केवल श्रम संहिताओं का ही विरोध नहीं किया है, बल्कि अपनी अन्य समस्याओं को भी सामने रखा है। कर्मचारियों ने दैनिक मजदूरों के लिए समान काम के बदले समान वेतन की मांग को लेकर गठित समिति की बैठक नगर विकास विभाग में बुलाने की भी मांग की है। उनका कहना है कि लंबे समय से इस मुद्दे पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है, जिससे दैनिक मजदूरों में असंतोष बढ़ता जा रहा है। इसके अलावा, आउटसोर्स एजेंसियों द्वारा कर्मचारियों के शोषण का मुद्दा भी जोर-शोर से उठाया गया है। कर्मचारियों का आरोप है कि कई आउटसोर्स एजेंसियां नियमों की अनदेखी कर कर्मियों से अधिक काम लेती हैं और समय पर वेतन नहीं देतीं। बायोमीट्रिक हाजिरी प्रणाली में गड़बड़ी कर वेतन में कटौती किए जाने की शिकायतें भी लगातार सामने आ रही हैं। कर्मचारियों का कहना है कि कई बार सही समय पर उपस्थिति दर्ज कराने के बावजूद तकनीकी खामियों का हवाला देकर वेतन काट लिया जाता है। सफाई से जुड़े वाहनों की मरम्मत लागत चालकों से वसूले जाने को लेकर भी कर्मचारियों में नाराजगी है। उनका कहना है कि सरकारी वाहनों की देखरेख की जिम्मेदारी विभाग की होती है, लेकिन इसके बावजूद मरम्मत का खर्च चालकों पर डाल दिया जाता है, जो अनुचित है। कर्मचारियों ने मांग की है कि इस व्यवस्था को तत्काल समाप्त किया जाए। नगर निगम कर्मियों की हड़ताल से आम लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। शहर में कचरे का उठाव और सफाई कार्य बाधित होने से स्वच्छता व्यवस्था पर सीधा असर पड़ेगा। हालांकि, कर्मचारी संगठनों का कहना है कि वे जनता को परेशान नहीं करना चाहते, लेकिन अपने अधिकारों की रक्षा के लिए यह कदम उठाना उनके लिए मजबूरी बन गया है। अब देखना होगा कि सरकार और प्रशासन इस हड़ताल को लेकर क्या रुख अपनाते हैं और कर्मचारियों की मांगों पर क्या निर्णय लिया जाता है।


