कांग्रेस विधायक सुरेंद्र कुशवाहा का सोशल मीडिया पर बड़ा बयान, कहा- गलत उम्मीदवार दिया, तभी नहीं किया वोट
पटना। बिहार में हुए राज्यसभा चुनाव के बाद राजनीतिक माहौल और अधिक गरमाता जा रहा है। चुनाव परिणाम आने के बाद महागठबंधन के भीतर ही मतभेद खुलकर सामने आने लगे हैं। इसी कड़ी में वाल्मीकिनगर से कांग्रेस विधायक सुरेंद्र प्रसाद कुशवाहा ने सोशल मीडिया के माध्यम से बड़ा बयान देते हुए महागठबंधन के उम्मीदवार चयन पर सवाल खड़े कर दिए हैं। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि महागठबंधन ने राज्यसभा चुनाव के लिए गलत उम्मीदवार का चयन किया, जिसके कारण उन्होंने मतदान नहीं किया। उनके इस बयान के बाद बिहार की राजनीति में नई बहस छिड़ गई है।
उम्मीदवार चयन पर जताई नाराजगी
सुरेंद्र प्रसाद कुशवाहा ने अपने बयान में कहा कि राज्यसभा चुनाव में महागठबंधन के पास केवल एक सीट जीतने का मौका था, ऐसे में उम्मीदवार का चयन बेहद सोच-समझकर किया जाना चाहिए था। उन्होंने कहा कि महागठबंधन के पास दीपक यादव जैसे नेता मौजूद थे, जो बेहतर उम्मीदवार हो सकते थे। उन्होंने यह भी कहा कि यदि दीपक यादव को मौका नहीं देना था, तो मुकेश सहनी जैसे नेता को उम्मीदवार बनाया जा सकता था। लेकिन इन विकल्पों को नजरअंदाज करते हुए ऐसे व्यक्ति को उम्मीदवार बना दिया गया, जिसका जनाधार कमजोर है और जो महागठबंधन के हित में प्रभावी नहीं था।
वोट नहीं देने का दिया कारण
कांग्रेस विधायक ने साफ कहा कि वे विपक्ष में होने के कारण राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन का समर्थन नहीं कर सकते थे, लेकिन उम्मीदवार चयन से असंतुष्ट होने के कारण उन्होंने मतदान से दूरी बनाए रखना ही उचित समझा। उन्होंने कहा कि जब उम्मीदवार ही सही नहीं चुना गया, तो वोट देने का कोई औचित्य नहीं रह जाता। इसलिए उन्होंने वोट नहीं देने का निर्णय लिया।
खुद पर लगे आरोपों पर दी सफाई
अपने ऊपर लग रहे आरोपों को लेकर सुरेंद्र कुशवाहा ने सफाई भी दी। उन्होंने कहा कि वे जनता के भरोसे चुनाव जीतकर विधानसभा पहुंचे हैं और उन्होंने अपने क्षेत्र में विकास कार्यों के जरिए जनता का विश्वास बनाए रखा है। उन्होंने कहा कि उन्होंने मुख्यमंत्री के प्रभाव वाले क्षेत्र में भी पूरे सरकारी तंत्र को हराकर जीत हासिल की है। ऐसे में उनके खिलाफ लगाए जा रहे आरोप राजनीतिक हैं। उन्होंने यह भी कहा कि विरोधी उन्हें बदनाम करने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन जनता सच्चाई को समझती है और उनके साथ खड़ी है।
जनता के प्रति जताया विश्वास
सुरेंद्र कुशवाहा ने कहा कि उन्होंने हमेशा दलित, पिछड़े और अल्पसंख्यक वर्ग के हित में काम किया है और उनका यह समर्पण जनता समझती है। उन्होंने कहा कि जनता विरोधियों के बहकावे में नहीं आएगी और सच्चाई का साथ देगी।
मतदान के दौरान बदल गया समीकरण
बिहार में 16 मार्च को राज्यसभा की पांच सीटों के लिए मतदान हुआ था। इस चुनाव में कुल छह उम्मीदवार मैदान में थे। राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन की ओर से पांच उम्मीदवार और महागठबंधन की ओर से एक उम्मीदवार चुनाव लड़ रहे थे। गठबंधन के आंकड़ों के अनुसार राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन के पास पर्याप्त संख्या थी, जिससे वह चार सीटों पर आसानी से जीत दर्ज कर सकता था। लेकिन पांचवीं सीट के लिए उसे अतिरिक्त समर्थन की जरूरत थी। दूसरी ओर महागठबंधन ने भी अपनी एक सीट जीतने के लिए अन्य दलों का समर्थन जुटाया था। इस प्रकार उनके पास आवश्यक संख्या पूरी होती नजर आ रही थी।
चार विधायकों ने नहीं किया मतदान
हालांकि मतदान के दौरान स्थिति अचानक बदल गई। महागठबंधन के चार विधायक मतदान के लिए उपस्थित नहीं हुए। इनमें राष्ट्रीय जनता दल और कांग्रेस के विधायक शामिल थे। इन विधायकों के मतदान नहीं करने से महागठबंधन का गणित बिगड़ गया और उसकी स्थिति कमजोर हो गई। यही कारण रहा कि महागठबंधन का उम्मीदवार जीत दर्ज नहीं कर सका।
वोटों के आधार पर बदला परिणाम
मतदान के बाद हुए परिणाम में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन के सभी उम्मीदवारों को अपेक्षित समर्थन मिला। वहीं महागठबंधन के उम्मीदवार को पर्याप्त वोट नहीं मिल सके। बताया जाता है कि दूसरी वरीयता के वोटों के आधार पर भी परिणाम प्रभावित हुआ, जिससे राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन के उम्मीदवार को फायदा मिला और महागठबंधन का उम्मीदवार हार गया।
महागठबंधन के भीतर बढ़ी असहमति
इस पूरे घटनाक्रम के बाद महागठबंधन के भीतर असहमति खुलकर सामने आ गई है। सुरेंद्र कुशवाहा के बयान ने यह स्पष्ट कर दिया है कि गठबंधन के भीतर उम्मीदवार चयन को लेकर सहमति नहीं बन पाई थी। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस तरह के बयान आने वाले समय में महागठबंधन की एकजुटता पर असर डाल सकते हैं।
आगे की राजनीति पर असर
राज्यसभा चुनाव के इस परिणाम और उसके बाद सामने आए बयानों का असर बिहार की आगामी राजनीति पर पड़ सकता है। गठबंधन की रणनीति और आंतरिक समन्वय को लेकर अब नए सिरे से विचार करने की जरूरत महसूस की जा रही है। फिलहाल कांग्रेस विधायक के इस बयान ने बिहार की राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है और यह मुद्दा आने वाले दिनों में और अधिक चर्चा का विषय बना रहेगा।


