January 28, 2026

नीतीश उपराष्ट्रपति बनने पर जदयू मंत्री का बड़ा बयान, मदन सहनी बोले- वे बिहार के सीएम हैं, आगे भी रहेंगे

पटना। देश के उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने अचानक पद से इस्तीफा देकर राजनीतिक हलकों में हलचल पैदा कर दी है। उनका कार्यकाल वर्ष 2027 तक था, लेकिन उन्होंने सोमवार की रात इस्तीफा दिया, जिसे मंगलवार को राष्ट्रपति ने स्वीकार भी कर लिया। इस अप्रत्याशित घटनाक्रम के बाद बिहार की राजनीति में एक नई बहस छिड़ गई है।
आरजेडी का दावा – नीतीश बनेंगे उपराष्ट्रपति
उपराष्ट्रपति के इस्तीफे के बाद आरजेडी विधायक मुकेश रोशन ने बड़ा राजनीतिक दावा किया। उन्होंने कहा कि उपराष्ट्रपति पद के लिए नीतीश कुमार का नाम तय हो गया है और उसी उद्देश्य से धनखड़ से इस्तीफा लिया गया है। उनका यह भी कहना है कि बीजेपी बिहार में चुनाव पूर्व अपनी सरकार का चेहरा बदलना चाहती है और नीतीश कुमार को केंद्रीय राजनीति में भेजकर बिहार में अपना मुख्यमंत्री नियुक्त करना चाहती है।
जेडीयू का पलटवार – अफवाहें हैं बेबुनियाद
आरजेडी के इस बयान पर जेडीयू की ओर से कड़ा जवाब आया है। जेडीयू कोटे के मंत्री मदन सहनी ने स्पष्ट किया कि नीतीश कुमार उपराष्ट्रपति नहीं बनने जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि नीतीश बिहार के मुख्यमंत्री हैं और आगे भी इसी पद पर बने रहेंगे। सहनी ने आरजेडी पर झूठ फैलाने और अफवाहें फैलाकर जनता को भ्रमित करने का आरोप लगाया। उनका कहना है कि एनडीए में कोई जबरन फैसला नहीं लिया जाता और न ही धनखड़ को जबरन इस्तीफा दिलवाया गया है।
स्वास्थ्य कारणों से दिया इस्तीफा
मदन सहनी ने उपराष्ट्रपति के इस्तीफे को केवल स्वास्थ्य कारणों से लिया गया व्यक्तिगत निर्णय बताया। उन्होंने अपील की कि इस मामले को नीतीश कुमार से जोड़ना गलत है और इस तरह की अटकलें बेबुनियाद हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि नीतीश कुमार न तो इस्तीफा देने वाले हैं और न ही उपराष्ट्रपति बनने की तैयारी कर रहे हैं।
वोटर लिस्ट पुनरीक्षण को लेकर भी राजनीति तेज
सदन के अंदर और बाहर विपक्ष वोटर लिस्ट पुनरीक्षण अभियान को लेकर सरकार को घेर रहा है। आरजेडी समेत विपक्षी दल इस अभियान को वापस लेने की मांग कर रहे हैं। उनका आरोप है कि इस प्रक्रिया के जरिए गरीब और अल्पसंख्यक मतदाताओं के नाम सूची से काटे जा रहे हैं।
मदन सहनी ने दी सफाई
जेडीयू नेता मदन सहनी ने इस मुद्दे पर भी विपक्ष पर हमला बोला। उन्होंने कहा कि वोटर लिस्ट का विशेष पुनरीक्षण अभियान पूरी तरह निष्पक्ष और तकनीकी प्रक्रिया है। इसमें सिर्फ उन्हीं लोगों के नाम हटाए जा रहे हैं, जो अब जीवित नहीं हैं, बिहार छोड़ चुके हैं, दो स्थानों पर पंजीकृत हैं या फिर अवैध रूप से सूची में शामिल हैं। उन्होंने कहा कि विपक्ष जानबूझकर इस अभियान को मुद्दा बनाकर राजनीतिक लाभ उठाना चाहता है।
भविष्य की राजनीति की बिसात
आरजेडी विधायक मुकेश रोशन ने यह भी आरोप लगाया कि बीजेपी का असली मकसद जेडीयू को कमजोर करना है और नीतीश कुमार के नजदीकी नेताओं को अपने पाले में लाकर जेडीयू को तोड़ना है। उन्होंने यह संकेत भी दिया कि अगला इस्तीफा मुख्यमंत्री का हो सकता है, जिससे स्पष्ट होता है कि विपक्ष राज्य में राजनीतिक उथल-पुथल की संभावना को हवा दे रहा है। उपराष्ट्रपति के इस्तीफे ने भले ही एक संवैधानिक प्रक्रिया की ओर इशारा किया हो, लेकिन बिहार की राजनीति में इसे सत्ता परिवर्तन के संकेत के रूप में देखा जा रहा है। हालांकि जेडीयू ने इस पर स्पष्ट स्टैंड ले लिया है, फिर भी आने वाले दिनों में बिहार की सियासी जमीन में और उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकते हैं।

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