February 19, 2026

पूर्व पीएम अटल बिहारी वाजपेयी की जयंती पर सीएम नीतीश ने दी श्रद्धांजलि, सोशल मीडिया से किया नमन

पटना। भारत रत्न और पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की 101वीं जयंती पर पूरा देश उन्हें श्रद्धा और सम्मान के साथ याद कर रहा है। हर वर्ष 25 दिसंबर को उनकी जयंती को सुशासन दिवस के रूप में भी मनाया जाता है, ताकि उनके द्वारा स्थापित सुशासन, लोकतांत्रिक मूल्यों और राष्ट्रीय एकता के आदर्शों को स्मरण किया जा सके। इस अवसर पर राजनीतिक, सामाजिक और सांस्कृतिक स्तर पर कई कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं, जिनमें अटल जी के विचारों और योगदान पर चर्चा होती है।
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की श्रद्धांजलि
अटल बिहारी वाजपेयी की जयंती पर बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने भी उन्हें सादर नमन किया। उन्होंने सुबह-सुबह सोशल मीडिया के माध्यम से अटल जी को श्रद्धांजलि अर्पित की। अपने संदेश में मुख्यमंत्री ने लिखा कि भारत रत्न पूर्व प्रधानमंत्री श्रद्धेय अटल बिहारी वाजपेयी जी को उनकी जयंती पर सादर नमन। यह संदेश केवल औपचारिक श्रद्धांजलि नहीं था, बल्कि उस आत्मीय संबंध की अभिव्यक्ति भी था, जो नीतीश कुमार और अटल जी के बीच रहा है।
अटल बिहारी वाजपेयी का जीवन परिचय
अटल बिहारी वाजपेयी का जन्म 25 दिसंबर 1924 को मध्य प्रदेश के ग्वालियर में हुआ था। वे बचपन से ही मेधावी और विचारशील प्रवृत्ति के थे। पढ़ाई के साथ-साथ उनमें साहित्य और राजनीति के प्रति गहरी रुचि थी। आगे चलकर उन्होंने राजनीति को अपना जीवन लक्ष्य बनाया और भारतीय राजनीति में एक अलग पहचान स्थापित की। वे न केवल एक कुशल राजनेता थे, बल्कि एक प्रभावशाली वक्ता और संवेदनशील कवि भी थे।
राजनीतिक यात्रा की शुरुआत
अटल बिहारी वाजपेयी ने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से की। इसके बाद वे भारतीय जनसंघ से जुड़े और धीरे-धीरे उसके प्रमुख नेताओं में शामिल हो गए। जब भारतीय जनता पार्टी की स्थापना हुई, तब अटल जी ने उसमें अहम भूमिका निभाई। पार्टी को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने में उनका योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण रहा। वे ऐसे नेता थे, जिन्होंने विचारधारा के साथ-साथ संवाद और सहमति की राजनीति को भी महत्व दिया।
प्रधानमंत्री के रूप में योगदान
अटल बिहारी वाजपेयी तीन बार भारत के प्रधानमंत्री बने। पहली बार 1996 में वे 13 दिनों के लिए प्रधानमंत्री रहे। इसके बाद 1998 से 1999 और फिर 1999 से 2004 तक उन्होंने देश का नेतृत्व किया। प्रधानमंत्री के रूप में उन्होंने कई ऐसे फैसले लिए, जो भारत के इतिहास में मील का पत्थर साबित हुए। पोखरण परमाणु परीक्षण के माध्यम से उन्होंने भारत की सामरिक ताकत को दुनिया के सामने रखा। राष्ट्रीय राजमार्ग विकास परियोजना और स्वर्णिम चतुर्भुज योजना ने देश के बुनियादी ढांचे को नई दिशा दी।
विदेश नीति और संवाद की पहल
अटल बिहारी वाजपेयी की पहचान एक ऐसे नेता के रूप में भी रही, जो संवाद में विश्वास रखते थे। भारत-पाक संबंधों में उन्होंने बातचीत और शांति की पहल की। लाहौर बस यात्रा इसका एक प्रमुख उदाहरण है। उन्होंने यह दिखाया कि मतभेदों के बावजूद संवाद के रास्ते खुले रखे जा सकते हैं। यही कारण था कि विपक्षी दल भी उनके व्यक्तित्व और कार्यशैली का सम्मान करते थे।
कवि हृदय और मानवीय संवेदनाएं
राजनीति के साथ-साथ अटल बिहारी वाजपेयी एक संवेदनशील कवि भी थे। उनकी कविताओं में राष्ट्रप्रेम, मानवता, लोकतंत्र और जीवन की जटिलताओं की झलक मिलती है। वे शब्दों के माध्यम से अपने भाव व्यक्त करने में माहिर थे। उनकी कविताएं आज भी लोगों को प्रेरित करती हैं और यह साबित करती हैं कि राजनीति और साहित्य एक-दूसरे से अलग नहीं हैं।
भारत रत्न और अंतिम विदाई
देश के प्रति उनके अद्वितीय योगदान को देखते हुए वर्ष 2015 में अटल बिहारी वाजपेयी को भारत के सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न से सम्मानित किया गया। 16 अगस्त 2018 को उनके निधन के साथ ही भारतीय राजनीति के एक युग का अंत हो गया। हालांकि वे आज हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनके विचार, नीतियां और आदर्श आज भी मार्गदर्शन करते हैं।
नीतीश कुमार और अटल जी का संबंध
गौरतलब है कि नीतीश कुमार अटल बिहारी वाजपेयी के मंत्रिमंडल में रेल मंत्री रह चुके हैं। उस दौरान अटल जी का उन्हें विशेष स्नेह और भरोसा प्राप्त था। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि नीतीश कुमार के राजनीतिक जीवन को दिशा देने में अटल जी की भूमिका काफी अहम रही है। कम सीटों के बावजूद अटल जी के नेतृत्व में ही नीतीश कुमार को बिहार का मुख्यमंत्री बनाया गया था। यही कारण है कि विभिन्न राजनीतिक परिस्थितियों और गठबंधनों के बावजूद नीतीश कुमार ने हमेशा अटल बिहारी वाजपेयी के प्रति सम्मान बनाए रखा। अटल बिहारी वाजपेयी की जयंती केवल एक महान नेता को याद करने का दिन नहीं है, बल्कि उनके द्वारा स्थापित मूल्यों को आत्मसात करने का अवसर भी है। सुशासन, सहमति, संवाद और राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखने की उनकी सोच आज भी प्रासंगिक है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा दी गई श्रद्धांजलि इस बात का प्रमाण है कि अटल जी का व्यक्तित्व और योगदान सीमाओं से परे है और आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा स्रोत बना रहेगा।

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