पटना से दिल्ली रवाना हुए सीएम नीतीश, एनडीए में सीट शेयरिंग पर पीएम से करेंगे चर्चा, तेज हुई सियासी अटकलें

पटना। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के अचानक दिल्ली दौरे ने एनडीए खेमे में सियासी हलचल तेज कर दी है। जदयू नेता ललन सिंह और संजय झा के साथ पहुंचे नीतीश की भाजपा नेताओं से मुलाकात की अटकलें तेज हैं। हालांकि जदयू खेमे में कोई साफ जानकारी नहीं दे रहा, लेकिन सियासी गलियारों में चर्चाओं का दौर जारी है। बिहार विधानसभा चुनाव से पहले ये दौरा बड़े संकेत दे रहा हैं इसको लेकर सस्पेंस बरकरार है! मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के दिल्ली दौरे ने बिहार की सियासत में हलचल मचा दी है। जदयू एमएलसी संजय गांधी ने बताया कि मुख्यमंत्री मेडिकल चेकअप के लिए गए हैं, लेकिन भाजपा नेताओं से मुलाकात की संभावना से इनकार नहीं किया। दिल्ली रवाना होने से पहले नीतीश ने पटना में केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से संजय झा और सम्राट चौधरी की मौजूदगी में बैठक की। खुद प्रधान ने सोशल मीडिया पर इस मुलाकात की पुष्टि की है। उधर, एनडीए के अन्य नेता भी दिल्ली में मौजूद हैं, जिसमें उपेंद्र कुशवाहा भी शामिल हैं। ऐसे में संभावित एनडीए रणनीति बैठक के कयास तेज हो गए हैं। बिहार में विधानसभा चुनाव नजदीक हैं और एनडीए में सीट बंटवारे को लेकर घमासान तेज होता जा रहा है। चर्चा है कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार दिल्ली में केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह और बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा से मुलाकात कर सकते हैं। एनडीए में अब तक सीट शेयरिंग का फार्मूला तय नहीं हुआ है। बीजेपी और जदयू के 100 से अधिक सीटों पर चुनाव लड़ना तय माना जा रहा है। दोनों दल के बीच बटवारा 105 और 106 सीट का हो सकता है उसके बाद जो सीट बच जाएगा। सूत्रों के अनुसार, शेष सीटें चिराग पासवान, उपेंद्र कुशवाहा और जीतन राम मांझी की पार्टियों में बंटनी हैं। हालांकि कई सीटों पर दावेदारी को लेकर पेंच फंसा है। कुछ बागी विधायक भी एनडीए में शामिल हो चुके हैं, जिससे सीटों की गणित और उलझ गई है। चिराग पासवान ‘जीताऊ’ सीटों की मांग पर अड़े हैं, वहीं जीतन राम मांझी और उपेंद्र कुशवाहा भी अपनी ताकत के हिसाब से अधिक सीटों की मांग कर रहे हैं। ऐसे में नीतीश कुमार का यह दौरा सिर्फ चेकअप भर नहीं, बल्कि एनडीए की सियासी सर्जरी की तैयारी माना जा रहा है। 2020 के विधानसभा चुनाव में चिराग पासवान अकेले चुनाव लड़े थे। लेकिन इस बार एनडीए में हैं तो वहीं उपेंद्र कुशवाहा भी 2020 में अलग मोर्चा बनाकर चुनाव लड़े थे लेकिन इस बार एनडीए में हैं। 2020 में एनडीए में भाजपा जदयू और हम के साथ वीआईपी था, लेकिन इस बार वीआईपी नहीं है लेकिन दो नए दल आ गए हैं और इसके कारण ही सीटों के बंटवारे को लेकर थोड़ी परेशानी बढ़ी हुई है। विधानसभा स्तर पर हो रहे सम्मेलनों में भाजपा, जदयू, लोजपा (रामविलास), हम और रालोसपा के प्रदेश अध्यक्ष और वरिष्ठ नेता एक साथ मंच साझा कर रहे हैं। लेकिन इसी बीच मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के अचानक दिल्ली दौरे ने सियासी चर्चाओं को गर्म कर दिया है। जब भी नीतीश दिल्ली जाते हैं, अटकलें लगती हैं कि उनकी भाजपा शीर्ष नेताओं अमित शाह और जेपी नड्डा से मुलाकात होगी। इस बार भी वही कयास लगाए जा रहे हैं खासकर जब सीट बंटवारे की तैयारी अंतिम चरण में है। सूत्रों के मुताबिक, भले ही अक्टूबर में एनडीए सीट शेयरिंग की औपचारिक घोषणा करे, लेकिन पांचों घटक दलों ने पहले ही अपनी-अपनी सीटों की सूची तैयार कर ली है और आपसी सहमति बनाने की कोशिश में हैं। कुछ सीटों पर बागी नेताओं की एंट्री और जीताऊ सीट की मांगों ने पेच बढ़ा दिया है।
