पटना में नदी में डूबे पांच बच्चे, ग्रामीणों ने बचाया, दो की हालत गंभीर, पीएमसीएच रेफर

पटना। जिले के फतुहा थाना अंतर्गत नियाज़ीपुर गांव में एक दुखद घटना सामने आई है, जहां धोबा नदी में बाढ़ का पानी भर जाने के बाद वहां नहाने गए पांच बच्चे डूबने लगे। ग्रामीणों के अनुसार, बारिश के कारण नदी में जलस्तर काफी बढ़ गया था, लेकिन बच्चे इसकी गहराई का अंदाज़ा नहीं लगा सके और नहाते-नहाते नदी के बहाव में बहने लगे।
स्थानीय ग्रामीणों की तत्परता से बची जानें
बच्चों के डूबते ही घटनास्थल के पास मौजूद स्थानीय लोगों की नजर उन पर पड़ी। बिना समय गंवाए ग्रामीणों ने तत्परता दिखाते हुए नदी में कूदकर सभी बच्चों को बाहर निकाला। ग्रामीणों की सजगता और साहस की वजह से समय रहते सभी बच्चों को बचा लिया गया। यदि थोड़ी भी देरी होती, तो बड़ी दुर्घटना हो सकती थी।
गंभीर रूप से घायल बच्चों की स्थिति
इस घटना में पांचों बच्चों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया, लेकिन दो बच्चों की हालत गंभीर बताई जा रही है। इनमें एक उपेन्द्र यादव की बेटी सिंपी कुमारी और दूसरा चंद्रशेखर कुमार का बेटा ऋषभ कुमार शामिल हैं। दोनों बच्चों को पहले फतुहा स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) में प्राथमिक उपचार के लिए ले जाया गया।
पीएमसीएच रेफर और इलाज जारी
फतुहा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के डॉक्टरों ने प्राथमिक उपचार के बाद दोनों बच्चों की गंभीर हालत को देखते हुए उन्हें पटना मेडिकल कॉलेज अस्पताल (पीएमसीएच) रेफर कर दिया। फिलहाल, दोनों बच्चों का इलाज पीएमसीएच में चल रहा है और डॉक्टरों की टीम लगातार उनकी स्थिति पर नज़र रख रही है। अस्पताल प्रबंधन ने बताया है कि बच्चों की हालत अब स्थिर करने की कोशिश की जा रही है, लेकिन वे अभी भी खतरे से बाहर नहीं हैं।
ग्रामीणों में चिंता और प्रशासन की चुप्पी
इस घटना के बाद गांव में अफरा-तफरी मच गई है। परिजन और स्थानीय लोग बेहद चिंतित हैं। हालांकि बच्चों को बचा लिया गया, लेकिन यह घटना प्रशासन के लिए भी एक चेतावनी है कि बाढ़ के मौसम में जलभराव वाले क्षेत्रों में सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम किए जाएं। स्थानीय प्रशासन की ओर से अब तक किसी प्रकार की प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, जिससे ग्रामीणों में नाराजगी भी देखी जा रही है। यह घटना बताती है कि बाढ़ के मौसम में बच्चों को अकेले जलस्रोतों के पास जाने से रोकना कितना जरूरी है। ग्रामीणों की जागरूकता और साहस ने पांच परिवारों को एक बड़ा हादसा झेलने से बचा लिया, लेकिन इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए प्रशासन को भी ठोस कदम उठाने की जरूरत है।

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