February 24, 2026

राजद विधायक चंद्रशेखर पर एक करोड़ की रंगदारी का आरोप, जान से मारने की दी धमकी, मुकदमा दर्ज

पटना। बिहार की राजनीति एक बार फिर विवादों के केंद्र में आ गई है। इस बार मामला मधेपुरा जिले से जुड़ा है, जहां राष्ट्रीय जनता दल के विधायक प्रोफेसर चंद्रशेखर पर एक करोड़ रुपये की रंगदारी मांगने का गंभीर आरोप लगा है। आरोप केवल आर्थिक दबाव तक सीमित नहीं है, बल्कि निर्माण कार्य में बाधा डालने और जान से मारने की धमकी देने जैसे गंभीर आरोप भी लगाए गए हैं। इस पूरे मामले में पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू कर दी है, जिससे राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है।
मामले की पृष्ठभूमि
जानकारी के अनुसार मधेपुरा सदर थाना क्षेत्र में एए पटना (जेवी) नामक फर्म द्वारा एक सरकारी निर्माण कार्य कराया जा रहा है। इस कार्य के संवेदक ने पुलिस को दिए गए आवेदन में आरोप लगाया है कि कार्य शुरू होने के बाद से ही राजद विधायक प्रो. चंद्रशेखर, उनके सहयोगी आलोक कुमार उर्फ मुन्ना और अन्य समर्थक लगातार उस पर दबाव बना रहे थे। संवेदक का दावा है कि उससे एक करोड़ रुपये की रंगदारी की मांग की गई और राशि नहीं देने पर गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी दी गई।
रंगदारी और धमकी के आरोप
संवेदक ने अपने आवेदन में कहा है कि विधायक और उनके प्रतिनिधियों द्वारा बार-बार फोन कॉल और मौखिक रूप से धमकियां दी जाती थीं। आरोप है कि रंगदारी नहीं देने पर निर्माण कार्य को रुकवाने, झूठे आरोपों में फंसाने और जान से मारने की धमकी दी गई। संवेदक के अनुसार, इस तरह के दबाव के कारण वह और उसके कर्मचारी मानसिक तनाव में थे और कार्यस्थल पर भय का माहौल बना हुआ था।
निर्माण कार्य और प्रशासन की भूमिका
संवेदक का यह भी कहना है कि तमाम दबावों के बावजूद उसने विभागीय दिशा-निर्देशों और स्थानीय प्रशासन की निगरानी में निर्माण कार्य को जारी रखा। विधायक द्वारा निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर सवाल उठाए गए, जिसके बाद ग्रामीण विकास मंत्री सह मधेपुरा के प्रभारी मंत्री के निर्देश पर जिला स्तरीय कार्यक्रम क्रियान्वयन समिति की बैठक हुई। इस बैठक में पूरे मामले की जांच के लिए एक टीम का गठन किया गया।
जांच रिपोर्ट और गुणवत्ता का दावा
जांच टीम ने निर्माण स्थल का निरीक्षण किया और कार्य की गुणवत्ता की जांच की। संवेदक का दावा है कि जांच रिपोर्ट में निर्माण कार्य को संतोषजनक बताया गया है। इसके बावजूद कथित तौर पर विधायक और उनके समर्थकों का दबाव कम नहीं हुआ। संवेदक का कहना है कि जांच रिपोर्ट के बाद भी उसे धमकियां मिलती रहीं, जिसके बाद उसने अपनी और अपने कर्मचारियों की सुरक्षा को लेकर पुलिस से गुहार लगाई।
पुलिस में मामला दर्ज
संवेदक के आवेदन के आधार पर मधेपुरा सदर थाना में राजद विधायक प्रो. चंद्रशेखर, उनके सहयोगी आलोक कुमार उर्फ मुन्ना और अन्य लोगों के खिलाफ रंगदारी मांगने, धमकी देने और निर्माण कार्य में बाधा डालने के आरोप में मामला दर्ज किया गया है। पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी है। एएसपी प्रवेन्द्र भारती ने बताया कि आवेदन में लगाए गए सभी आरोपों की गंभीरता से जांच की जा रही है और साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
विधायक का पक्ष और राजनीतिक आरोप
इस पूरे मामले पर विधायक प्रो. चंद्रशेखर ने खुद पर लगे आरोपों को सिरे से खारिज किया है। उन्होंने इसे राजनीतिक साजिश करार देते हुए कहा कि उन्हें और उनके समर्थकों को फंसाने के लिए यह केस दर्ज कराया गया है। विधायक का कहना है कि उन्होंने केवल निर्माण कार्य की गुणवत्ता को लेकर सवाल उठाए थे और जनहित में आवाज उठाई थी। उनके अनुसार, नाला निर्माण सही ढंग से नहीं हो रहा था, इसलिए उन्होंने आंदोलन किया, जिसे गलत तरीके से रंगदारी के आरोप से जोड़ा जा रहा है।
आंदोलन जारी रखने की चेतावनी
विधायक प्रो. चंद्रशेखर ने साफ कहा है कि वे इस तरह के मुकदमों से डरने वाले नहीं हैं। उनका कहना है कि जब तक निर्माण कार्य पूरी तरह मानकों के अनुरूप नहीं होगा, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि संवेदक और कुछ अधिकारी मिलकर उन्हें बदनाम करने की कोशिश कर रहे हैं, ताकि निर्माण में हो रही खामियों पर पर्दा डाला जा सके।
राजनीतिक और सामाजिक असर
इस मामले ने मधेपुरा की राजनीति में नया मोड़ ला दिया है। एक ओर जहां संवेदक सुरक्षा और न्याय की मांग कर रहा है, वहीं दूसरी ओर विधायक इसे राजनीतिक प्रतिशोध बता रहे हैं। विपक्ष और सत्तापक्ष दोनों के लिए यह मामला संवेदनशील बन गया है। आम लोगों के बीच भी यह चर्चा का विषय बना हुआ है कि आखिर सच क्या है और जांच में क्या सामने आएगा। राजद विधायक प्रो. चंद्रशेखर पर लगे रंगदारी और धमकी के आरोप गंभीर हैं और इनका सीधा असर राजनीतिक छवि और प्रशासनिक व्यवस्था पर पड़ता है। फिलहाल मामला जांच के अधीन है और सच्चाई जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगी। यह प्रकरण एक बार फिर यह सवाल खड़ा करता है कि विकास कार्यों और राजनीति के टकराव में कानून और व्यवस्था की भूमिका कितनी महत्वपूर्ण है। अब सभी की नजरें पुलिस जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया पर टिकी हुई हैं।

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