पटना में पीएनजी विस्तार पर ब्रेक, अनापत्ति प्रमाण पत्र के अभाव में हजारों उपभोक्ता परेशान

  • मुख्य पाइपलाइन बिछी, फिर भी गलियों तक नहीं पहुंच पा रही गैस आपूर्ति
  • नगर निगम से अनुमति में देरी, बढ़ती मांग के बीच योजना अटकी

पटना। राजधानी पटना में पाइप्ड नेचुरल गैस यानी पाइपलाइन से मिलने वाली प्राकृतिक गैस के विस्तार की रफ्तार प्रशासनिक अड़चनों के कारण थम सी गई है। नगर निकाय से अनापत्ति प्रमाण पत्र नहीं मिलने के चलते कई इलाकों में गैस आपूर्ति का अंतिम चरण पूरा नहीं हो पा रहा है। इससे हजारों उपभोक्ता इस सुविधा से वंचित रह गए हैं, जबकि मुख्य पाइपलाइन का ढांचा पहले से तैयार है। शहर के महुआबाग, धनौत, सिद्धेश्वर नगर, रूपसपुर नालापर, त्रिशूल विहार कॉलोनी, लोहिया पथ, राम नगरी, मजिस्ट्रेट कॉलोनी, एजी कॉलोनी, आकाशवाणी रोड, सीडीए कॉलोनी, जगदेव पथ और इंदिरा गांधी आयुर्विज्ञान संस्थान क्षेत्र समेत कई इलाकों में पाइपलाइन बिछ चुकी है। इसके अलावा फ्रेंड्स कॉलोनी, समनपुरा, इंद्रपुरी, राजाबाजार और एनटीपीसी फेज-1, 2 व 3 जैसे क्षेत्रों में भी गैस नेटवर्क का ढांचा मौजूद है। इसके बावजूद घरों तक गैस कनेक्शन नहीं पहुंच पाने से लोग लंबे समय से इंतजार कर रहे हैं। इसी तरह आदर्श विहार कॉलोनी, नीति बाग, पटेल नगर, खाजपुरा, विजय नगर, वेद नगर, अंबा विहार, कल्याण विहार, ईएसआईसी कॉलोनी, जयप्रकाश नगर, कृषि नगर, आरके पुरम, सगुना मोड़, लेखा नगर, खगौल, कोथवां, गोला रोड, एसके पुरम, बेली रोड, हड़ताली मोड़, शास्त्रीनगर, बोरिंग कैनाल रोड, नागेश्वर कॉलोनी, पाटलिपुत्रा, किदवईपुरी और कवि रमण पथ जैसे इलाकों में भी यही स्थिति बनी हुई है। मुख्य पाइपलाइन होने के बावजूद गलियों और आवासीय समूहों तक नेटवर्क विस्तार न होने से योजना अधूरी नजर आ रही है। गैस आपूर्ति करने वाली एजेंसी का कहना है कि उन्होंने कई बार पटना नगर निगम से अनापत्ति प्रमाण पत्र के लिए आवेदन किया है, लेकिन अनुमति नहीं मिलने के कारण गलियों में पाइपलाइन बिछाने का कार्य शुरू नहीं हो पा रहा है। खासकर नेहरू नगर वन विभाग क्षेत्र में यह समस्या अधिक गंभीर बनी हुई है, जहां बड़ी संख्या में लोगों ने गैस कनेक्शन के लिए आवेदन किया है, लेकिन अंतिम चरण का काम अटका हुआ है। पाटलिपुत्र क्षेत्र में भी मुख्य पाइपलाइन गुजरने के बावजूद घरों तक गैस नहीं पहुंच पा रही है। इस स्थिति से उपभोक्ताओं में नाराजगी बढ़ रही है। लोगों का कहना है कि जब मुख्य पाइपलाइन पहले से मौजूद है, तो कनेक्शन देने में इतनी देरी उचित नहीं है। इस बीच राजधानी में रसोई गैस सिलिंडर की किल्लत के कारण पाइपलाइन गैस की मांग तेजी से बढ़ी है। गैस कंपनी के अधिकारियों के अनुसार प्रतिदिन लगभग 100 से 150 नए कनेक्शन दिए जा रहे हैं, जबकि आवेदन इससे कहीं अधिक संख्या में प्राप्त हो रहे हैं। लोग अब सुरक्षित, सस्ती और निर्बाध गैस आपूर्ति के लिए पाइपलाइन गैस को प्राथमिकता दे रहे हैं। वर्तमान में पटना में करीब 30 हजार घरेलू उपभोक्ता पाइपलाइन गैस सेवा का लाभ उठा रहे हैं, जबकि लगभग 90 व्यावसायिक संस्थानों में भी इसकी आपूर्ति की जा रही है। हालांकि नेटवर्क विस्तार की धीमी गति के कारण बढ़ती मांग को पूरा करना एक बड़ी चुनौती बन गया है। विशेषज्ञों का कहना है कि गलियों में पाइपलाइन बिछाने के लिए सड़कों की खुदाई, यातायात प्रबंधन और विभिन्न विभागों से अनुमति की आवश्यकता होती है, जिससे प्रक्रिया जटिल हो जाती है। लेकिन यदि संबंधित विभाग समय पर अनुमति दें, तो इस कार्य को तेजी से पूरा किया जा सकता है। उपभोक्ताओं का मानना है कि यदि नगर निगम और अन्य संबंधित विभाग अनापत्ति प्रमाण पत्र जारी करने में तेजी दिखाएं, तो हजारों घरों तक जल्द ही गैस कनेक्शन पहुंचाया जा सकता है। इससे न केवल गैस संकट की समस्या कम होगी, बल्कि पर्यावरण के दृष्टिकोण से भी यह एक सकारात्मक कदम साबित होगा। पटना में पाइपलाइन गैस योजना का विस्तार प्रशासनिक बाधाओं के कारण प्रभावित हो रहा है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि संबंधित विभाग इस समस्या का समाधान कितनी जल्दी करते हैं, ताकि लोगों को इस सुविधा का लाभ मिल सके और शहर में स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा दिया जा सके। लोगों का मानना है कि यदि नगर निगम और संबंधित विभाग समय पर एनओसी जारी करें, तो हजारों घरों तक पीएनजी कनेक्शन जल्द पहुंच सकता है। इससे न केवल गैस संकट की समस्या कम होगी, बल्कि पर्यावरण के लिहाज से भी यह एक बड़ा सकारात्मक कदम साबित होगा।