तेज आंधी-बारिश से बिहटा औद्योगिक क्षेत्र को भारी नुकसान, उत्पादन व्यवस्था ठप

  • जलभराव से फैक्ट्रियों में तैयार और कच्चा माल बर्बाद, 70–80 लाख रुपये की क्षति का अनुमान
  • उद्योग संचालकों ने मुआवजा और स्थायी जल निकासी व्यवस्था की उठाई मांग

बिहटा , (मोनू कुमार मिश्रा)। जिले के बिहटा प्रखंड में 4 मई को आई तेज आंधी और मूसलाधार बारिश ने औद्योगिक क्षेत्र में व्यापक तबाही मचा दी। अचानक आए इस प्राकृतिक प्रकोप ने कई औद्योगिक इकाइयों को गंभीर रूप से प्रभावित किया, जिससे न केवल आर्थिक नुकसान हुआ बल्कि उत्पादन व्यवस्था भी पूरी तरह से ठप पड़ गई। इस घटना ने औद्योगिक क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे और आपदा प्रबंधन की कमजोरियों को उजागर कर दिया है। भारी बारिश के कारण औद्योगिक क्षेत्र के विभिन्न परिसरों में जलभराव की स्थिति उत्पन्न हो गई। जल निकासी की समुचित व्यवस्था नहीं होने के कारण वर्षा का पानी फैक्ट्रियों के अंदर तक पहुंच गया। इससे मशीनों के संचालन पर असर पड़ा और उत्पादन कार्य तत्काल प्रभाव से बंद करना पड़ा। कई इकाइयों में तैयार उत्पाद और कच्चा माल पानी में भीगकर पूरी तरह खराब हो गया, जिससे उद्योगों को भारी आर्थिक क्षति उठानी पड़ी। सबसे अधिक नुकसान सिकंदरपुर स्थित प्लॉट संख्या बी-6 में संचालित एक प्रमुख औद्योगिक इकाई को हुआ है। इस इकाई के परिसर में बड़ी मात्रा में पानी प्रवेश कर गया, जिससे वहां रखा तैयार माल और कच्चा माल पूरी तरह नष्ट हो गया। फैक्ट्री प्रबंधन के अनुसार प्रारंभिक आकलन में लगभग 70 से 80 लाख रुपये तक के नुकसान का अनुमान लगाया गया है। यह नुकसान न केवल तत्काल आर्थिक संकट पैदा करता है, बल्कि आने वाले दिनों में उत्पादन और आपूर्ति प्रणाली पर भी असर डाल सकता है। बारिश के बाद फैक्ट्री में उत्पादन कार्य पूरी तरह बंद करना पड़ा है। इससे दैनिक संचालन प्रभावित हुआ है और वस्तुओं की आपूर्ति शृंखला पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है। उद्योग संचालकों का कहना है कि यदि जल्द ही स्थिति सामान्य नहीं होती है, तो इसका असर बाजार में उपलब्धता और कीमतों पर भी पड़ सकता है। प्रबंधन ने इस घटना की सूचना बीमा कंपनी और संबंधित विभागों को दे दी है तथा नुकसान के आकलन की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। हालांकि, उद्योग संचालकों ने चिंता जताई है कि पूर्व में हुई प्राकृतिक आपदाओं के मामलों में भी उन्हें समय पर पूर्ण मुआवजा नहीं मिल पाया था। इस कारण उद्यमियों में असंतोष की स्थिति बनी रहती है और भविष्य के प्रति अनिश्चितता भी बढ़ जाती है। इस घटना के बीच राज्य सरकार द्वारा औद्योगिक विकास को बढ़ावा देने के प्रयासों की चर्चा भी सामने आई है। सरकार का ध्यान नए उद्योगों को प्रोत्साहित करने, निवेश आकर्षित करने और औद्योगिक क्षेत्रों में आधारभूत संरचना को मजबूत बनाने पर केंद्रित है। इसके बावजूद जमीनी स्तर पर उद्यमियों का मानना है कि कई औद्योगिक क्षेत्रों में मूलभूत सुविधाओं की कमी अब भी बनी हुई है। उद्योग संचालकों ने स्पष्ट रूप से कहा है कि जल निकासी व्यवस्था और आपदा प्रबंधन प्रणाली को और सुदृढ़ करने की आवश्यकता है। उनका कहना है कि यदि समय रहते इन समस्याओं का समाधान नहीं किया गया, तो भविष्य में भी इस प्रकार की घटनाएं उद्योगों को बार-बार नुकसान पहुंचाती रहेंगी। इस घटना के बाद प्रभावित उद्योगों ने सरकार और प्रशासन से शीघ्र राहत और मुआवजा प्रदान करने की मांग की है। साथ ही बिहार औद्योगिक क्षेत्र विकास प्राधिकरण से किराए में राहत देने और स्थायी जल निकासी व्यवस्था सुनिश्चित करने की अपील की गई है। स्थानीय स्तर पर यह घटना औद्योगिक ढांचे की कमजोरियों को उजागर करती है, जिस पर अब सरकार और प्रशासन दोनों की नजर टिकी हुई है। यदि समय रहते आवश्यक सुधार नहीं किए गए, तो यह स्थिति औद्योगिक विकास की गति को प्रभावित कर सकती है। वहीं, इस आपदा के बाद उद्योगों के पुनः संचालन और नुकसान की भरपाई को लेकर आने वाले दिनों में प्रशासन की भूमिका महत्वपूर्ण होगी।

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