वैशाली में गर्भ में बेटी होने पर महिला से मारपीट का आरोप, महिला आयोग पहुंचा मामला

  • भ्रूण जांच कराने और गर्भपात के दबाव का आरोप, ससुराल पक्ष पर दहेज उत्पीड़न का मामला
  • आयोग ने मांगे सबूत, अगली सुनवाई में दोनों पक्षों को उपस्थित होने का निर्देश

वैशाली। बिहार के वैशाली जिले से एक गंभीर घरेलू हिंसा और दहेज उत्पीड़न का मामला सामने आया है, जिसने सामाजिक और प्रशासनिक व्यवस्था पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। जंदाहा थाना क्षेत्र से जुड़े इस मामले में एक महिला ने अपने पति और ससुराल पक्ष पर गंभीर आरोप लगाए हैं। पीड़िता की मां द्वारा बिहार राज्य महिला आयोग में दिए गए आवेदन के आधार पर इस प्रकरण की सुनवाई की जा रही है। आवेदिका के अनुसार उनकी बेटी की शादी 13 दिसंबर 2021 को हुई थी। उन्होंने बताया कि पति के निधन के बाद उन्होंने अपनी बेटी की शादी के लिए करीब 10 लाख रुपए खर्च किए, जो उन्होंने अपनी जमीन बेचकर जुटाए थे। शादी के कुछ समय बाद ही ससुराल पक्ष द्वारा अतिरिक्त 5 लाख रुपए की मांग शुरू कर दी गई। मांग पूरी नहीं होने पर उनकी बेटी को लगातार मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया जाने लगा। मां ने आरोप लगाया कि कई बार मारपीट के बाद उनकी बेटी को मायके भेज दिया जाता था। हालांकि, बाद में दामाद माफी मांगकर उसे वापस ले जाते थे। इसी बीच जब उनकी बेटी गर्भवती हुई, तब उसके साथ एक और गंभीर घटना घटी। आरोप है कि चार महीने की गर्भावस्था के दौरान अपेंडिक्स ऑपरेशन के नाम पर उसकी भ्रूण जांच करवाई गई। जब पति को यह जानकारी मिली कि गर्भ में लड़की है, तो उसने गर्भपात कराने का दबाव बनाना शुरू कर दिया। कथित रूप से यह कहा गया कि घर में दूसरी बेटी नहीं चाहिए और भविष्य में उसकी शादी कराना बोझ होगा। पीड़िता की मां ने बताया कि परिवार में पहले से ही एक बेटी होने के कारण ससुराल पक्ष दूसरी लड़की को स्वीकार नहीं करना चाहता था। पीड़िता किसी तरह प्रताड़ना से बचकर थाने पहुंची, लेकिन वहां उसकी शिकायत दर्ज नहीं की गई और उसे समझौते की सलाह देकर लौटा दिया गया। इसके बाद वर्ष 2024 में पीड़िता ने दलसिंहराय न्यायालय में घरेलू हिंसा, दहेज उत्पीड़न, मारपीट और भ्रूण जांच से संबंधित मामला दर्ज कराया। न्यायालय के आदेश के बाद 13 अक्टूबर 2025 को वह फिर ससुराल गई, लेकिन वहां भी उसके साथ दुर्व्यवहार जारी रहा। 12 जनवरी 2026 को अदालत में पेशी की तारीख होने के बावजूद उसे जबरन घर में रोका गया और मारपीट की गई। आरोप है कि उसके गले में गमछा डालकर जान से मारने का प्रयास भी किया गया। इसके बाद पीड़िता ने आपातकालीन सेवा संख्या 112 पर कॉल कर पुलिस को बुलाया, लेकिन परिवार का आरोप है कि पुलिस ने कोई ठोस कार्रवाई नहीं की। पीड़िता की मां ने यह भी आरोप लगाया कि थाने में प्राथमिकी दर्ज कराने की कोशिश के दौरान उन्हें वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक से मिलने नहीं दिया गया। उनका कहना है कि दामाद स्थानीय जनप्रतिनिधि के प्रभाव का उपयोग कर पुलिस पर दबाव बनाता है, जिसके कारण उन्हें न्याय नहीं मिल पा रहा है। दूसरी ओर पीड़िता का कहना है कि वह अपनी दो वर्ष की बेटी के भविष्य को देखते हुए पति के साथ रहना चाहती है, लेकिन शर्त यह है कि उसके साथ किसी प्रकार की मारपीट या प्रताड़ना न हो। वहीं पति का कहना है कि वह अपने परिवार को साथ रखना चाहता है, लेकिन पत्नी के मायके पक्ष के हस्तक्षेप से समस्या बढ़ रही है। इस पूरे मामले पर बिहार राज्य महिला आयोग की सदस्य रश्मि रेखा सिन्हा ने कहा कि आवेदिका द्वारा भ्रूण जांच और मारपीट के आरोप लगाए गए हैं। आयोग ने इन आरोपों के समर्थन में सबूत प्रस्तुत करने को कहा है। उन्होंने बताया कि अगली सुनवाई में दोनों पक्षों को साक्ष्य के साथ उपस्थित होने का निर्देश दिया गया है। आयोग का प्रयास है कि मामले का निष्पक्ष समाधान हो और यदि संभव हो तो दोनों पक्षों के बीच समझौता कर परिवार को बचाया जा सके। हालांकि, आरोपों की गंभीरता को देखते हुए यह मामला कानूनी और सामाजिक दृष्टि से बेहद संवेदनशील बना हुआ है।

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