नए साल में आज से शुभ मुहूर्त, शुरू होंगे शादी-विवाह, 14 मार्च से खरमास
पटना। नए साल की शुरुआत के साथ ही मांगलिक कार्यों के इंतजार में बैठे लोगों के लिए अच्छी खबर है। भगवान सूर्य के उत्तरायण होने के साथ खरमास समाप्त हो गया है और आज गुरुवार से विवाह सहित अन्य शुभ कार्यों के लिए मुहूर्त खुल गए हैं। माघ शुक्ल एकादशी के दिन साल 2026 का पहला शुभ विवाह मुहूर्त बन रहा है। इसके साथ ही एक बार फिर शादी-ब्याह की शहनाइयों की गूंज सुनाई देने लगेगी।
उत्तरायण के साथ खत्म हुआ खरमास
हिंदू पंचांग के अनुसार सूर्य के उत्तरायण होने के साथ ही खरमास की अवधि समाप्त मानी जाती है। खरमास के दौरान विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन जैसे मांगलिक कार्य वर्जित रहते हैं। बीते एक महीने से शुभ कार्यों पर रोक लगी हुई थी, लेकिन अब इस प्रतिबंध के हटते ही लोगों ने राहत की सांस ली है। ज्योतिषाचार्यों के मुताबिक सूर्य के मकर राशि में प्रवेश करते ही मांगलिक कार्यों का मार्ग प्रशस्त हो जाता है।
आज से शुरू होगा विवाह का सिलसिला
इस वर्ष का पहला शुभ विवाह मुहूर्त आज माघ शुक्ल एकादशी को बन रहा है। हालांकि इस साल विवाह की शुरुआत अपेक्षाकृत थोड़ी देर से हो रही है। ज्योतिषियों का कहना है कि इसका प्रमुख कारण शुक्र ग्रह का अस्त होना है, जिसकी वजह से शुरुआती दिनों में सीमित मुहूर्त ही उपलब्ध हो पाए। इसके बावजूद आज से शादी-विवाह का सिलसिला औपचारिक रूप से शुरू हो जाएगा।
फरवरी में सबसे ज्यादा विवाह मुहूर्त
वर्ष 2026 में विवाह के लिए सबसे अनुकूल महीना फरवरी माना जा रहा है। इस महीने में सबसे अधिक शुभ लग्न उपलब्ध हैं। 4 फरवरी से लेकर 26 फरवरी तक लगातार विवाह मुहूर्त बन रहे हैं। यही कारण है कि विवाह योग्य युवाओं और उनके परिवारों ने पहले से ही फरवरी महीने में शादियों की तैयारी शुरू कर दी है। मैरिज हॉल, बैंड-बाजा और कैटरिंग से जुड़े कारोबारियों के लिए भी फरवरी महीना काफी व्यस्त रहने वाला है।
जुलाई और साल के अंत में भी मिलेंगे अवसर
फरवरी के बाद जुलाई महीने में भी विवाह के लिए छह शुभ मुहूर्त बनेंगे। इसके अलावा चातुर्मास समाप्त होने के बाद नवंबर में चार और दिसंबर में सात शुभ मुहूर्त उपलब्ध रहेंगे। इस तरह साल के अंतिम दो महीनों में भी शादियों का अच्छा खासा दौर देखने को मिलेगा। हालांकि बीच के महीनों में ग्रह-नक्षत्रों और धार्मिक कारणों से कई बार विराम भी लगेगा।
14 मार्च से फिर लगेगा खरमास
इस वर्ष का दूसरा खरमास 14 मार्च से 14 अप्रैल तक रहेगा। पंचांग के अनुसार चैत्र कृष्ण एकादशी की देर रात 14 मार्च को 3 बजकर 7 मिनट पर सूर्य मीन राशि में प्रवेश करेंगे। इसी के साथ खरमास की शुरुआत हो जाएगी। खरमास लगते ही हिंदू धर्म में सभी शुभ और मांगलिक कार्यों पर एक बार फिर रोक लग जाएगी। इस अवधि में विवाह, गृह प्रवेश जैसे संस्कार नहीं किए जाएंगे।
अधिक मास के कारण 13 महीनों का साल
साल 2026 को धार्मिक दृष्टि से खास माना जा रहा है, क्योंकि इस वर्ष अधिक मास का संयोग बन रहा है। इसी वजह से यह साल सामान्य 12 महीनों के बजाय 13 महीनों का हो गया है। पंचांग के अनुसार इस वर्ष ज्येष्ठ मास दो बार आएगा। पहला ज्येष्ठ मास 2 मई से 31 मई तक और दूसरा 1 जून से 29 जून तक रहेगा।
मलमास में नहीं होंगी शादियां
अधिक मास के दौरान 15 मई से 17 जून तक मलमास रहेगा। हिंदू धर्म में मलमास को शुभ कार्यों के लिए वर्जित माना जाता है। इस अवधि में विवाह सहित सभी मांगलिक कार्य नहीं किए जाते। यही कारण है कि मई और जून महीने में शादियों का सिलसिला पूरी तरह से थमा रहेगा।
चातुर्मास में भी रहेगा विराम
मलमास के बाद 25 जुलाई से 20 नवंबर तक चातुर्मास की अवधि रहेगी। मान्यता है कि इस दौरान भगवान विष्णु चार महीने के लिए योगनिद्रा में चले जाते हैं। इसलिए चातुर्मास के चार महीनों में विवाह, गृह प्रवेश और अन्य शुभ कार्य नहीं होते। इस वजह से जुलाई के बाद नवंबर तक शादियों की संख्या काफी कम हो जाएगी।
शादी-ब्याह के मौसम को लेकर उत्साह
देखा जाए तो साल 2026 में विवाह के लिए सीमित लेकिन महत्वपूर्ण अवसर उपलब्ध हैं। फरवरी, जुलाई और साल के अंत के महीने शादियों के लिहाज से खास रहने वाले हैं। लंबे अंतराल के बाद खुले शुभ मुहूर्तों को लेकर लोगों में खासा उत्साह है। अब जब आज से मांगलिक कार्यों की शुरुआत हो गई है, तो एक बार फिर घर-आंगन में शादी की रौनक लौटने वाली है।


