पटना में मुख्यमंत्री ने नवनियुक्त इंजीनियरों को दिया नियुक्ति पत्र, मीडिया की एंट्री रही बैन, नहीं हुआ कार्यक्रम का प्रसारण

पटना। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से जुड़ा एक घटनाक्रम इन दिनों राजनीतिक और सामाजिक बहस का केंद्र बना हुआ है। सोमवार को आयुष डॉक्टरों को नियुक्ति पत्र देने के दौरान हुई एक घटना के बाद विपक्षी दलों ने मुख्यमंत्री पर तीखा हमला बोला। इसी घटनाक्रम की छाया मंगलवार को भी देखने को मिली, जब बिहार स्टेट पावर होल्डिंग कंपनी लिमिटेड के नवनियुक्त इंजीनियरों को नियुक्ति पत्र सौंपे गए, लेकिन इस बार कार्यक्रम को लेकर कई असामान्य फैसले सामने आए।
नवनियुक्त इंजीनियरों को सौंपे गए नियुक्ति पत्र
मंगलवार को पटना में आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने बिहार स्टेट पावर होल्डिंग कंपनी लिमिटेड के नए इंजीनियरों को नियुक्ति पत्र प्रदान किए। इस अवसर पर उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और विजय सिन्हा भी मंच पर मौजूद रहे। कार्यक्रम सामान्य रूप से एक सरकारी आयोजन था, लेकिन इसकी सबसे खास बात यह रही कि इसमें मीडिया की एंट्री पूरी तरह से प्रतिबंधित रखी गई। न तो किसी पत्रकार को कार्यक्रम स्थल पर जाने की अनुमति दी गई और न ही इसका लाइव प्रसारण किया गया।
कार्यक्रम का बदला हुआ स्वरूप
सोमवार को हुए आयुष डॉक्टरों के नियुक्ति पत्र वितरण कार्यक्रम का सीधा प्रसारण किया गया था और मीडिया की मौजूदगी भी रही थी। लेकिन मंगलवार के कार्यक्रम में यह स्थिति पूरी तरह बदल गई। पत्रकारों को बाहर रखा गया और केवल आधिकारिक तौर पर चयनित फोटो और वीडियो ही जारी किए गए। इस फैसले को सोमवार की घटना से जोड़कर देखा जा रहा है। माना जा रहा है कि सरकार इस बार किसी भी तरह की विवादास्पद स्थिति से बचना चाहती थी।
सोमवार की घटना और विवाद की शुरुआत
विवाद की जड़ सोमवार का वह कार्यक्रम है, जब मुख्यमंत्री नीतीश कुमार आयुष डॉक्टरों को नियुक्ति पत्र दे रहे थे। इस दौरान एक महिला डॉक्टर नुसरत परवीन का हिजाब मुख्यमंत्री ने अपने हाथ से हटा दिया। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया और देखते ही देखते यह राजनीतिक मुद्दा बन गया। वीडियो में दिखा कि मुख्यमंत्री ने नियुक्ति पत्र देने के बाद महिला डॉक्टर की ओर देखकर हिजाब के बारे में पूछा और फिर उसे हटाने का इशारा किया। इसके बाद उन्होंने खुद अपने हाथ से हिजाब हटा दिया, जिससे महिला डॉक्टर कुछ क्षणों के लिए असहज हो गई। घटना के दौरान मंच पर मौजूद उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी मुख्यमंत्री को रोकने की कोशिश करते हुए उनकी आस्तीन खींचते नजर आए। आसपास मौजूद कुछ लोग हंसते भी दिखाई दिए, जिससे मामला और संवेदनशील बन गया। कार्यक्रम में मौजूद अधिकारियों ने स्थिति संभालते हुए महिला डॉक्टर को फिर से नियुक्ति पत्र दिया और वहां से जाने का संकेत किया।
विपक्षी दलों का तीखा हमला
इस घटना के सामने आने के बाद विपक्षी दलों ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर जमकर निशाना साधा। कांग्रेस ने बयान जारी कर कहा कि जब राज्य का मुखिया सार्वजनिक मंच पर इस तरह का व्यवहार करता है, तो महिलाओं की सुरक्षा को लेकर क्या भरोसा किया जा सकता है। पार्टी ने मुख्यमंत्री से इस्तीफे की मांग तक कर दी। राष्ट्रीय जनता दल ने भी इस घटना को गंभीर बताते हुए सोशल मीडिया पर वीडियो साझा किया और मुख्यमंत्री की मानसिक स्थिति पर सवाल उठाए। राजद का आरोप था कि नीतीश कुमार अब पूरी तरह संघ के एजेंडे पर काम कर रहे हैं और अल्पसंख्यक समुदाय का अपमान किया जा रहा है। समाजवादी पार्टी ने भी इस मुद्दे पर कड़ा रुख अपनाया और घटना की निंदा की।
राष्ट्रीय और क्षेत्रीय नेताओं की प्रतिक्रियाएं
इस मामले में राष्ट्रीय स्तर पर भी प्रतिक्रियाएं सामने आईं। एआईएमआईएम अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने अपनी पार्टी के बयान को री-पोस्ट करते हुए मुख्यमंत्री से माफी की मांग की। वहीं, श्रीनगर की मुस्लिम महिला नेता जायरा वसीम ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि महिलाओं की गरिमा और मर्यादा के साथ इस तरह का व्यवहार किसी भी हाल में स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने बिना शर्त माफी की मांग की। जम्मू-कश्मीर की पीडीपी अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती ने भी इस घटना पर गहरी नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार को वह एक अनुभवी और सम्मानित नेता मानती थीं, लेकिन इस घटना ने उन्हें आहत किया है। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या यह उम्र का असर है या मुसलमानों को सार्वजनिक रूप से अपमानित करने की बढ़ती प्रवृत्ति का हिस्सा।
सरकार और सहयोगी दलों का बचाव
विवाद के बीच बिहार सरकार में मंत्री जमा खान ने मुख्यमंत्री का बचाव किया। उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार सभी धर्मों और जातियों का सम्मान करते हैं और अल्पसंख्यक समुदाय के प्रति उनका रवैया हमेशा सकारात्मक रहा है। उन्होंने आरोप लगाने वालों से अपील की कि किसी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले मुख्यमंत्री के पूरे कार्यकाल और योगदान को ध्यान में रखा जाए।
मीडिया बैन पर उठते सवाल
मंगलवार को इंजीनियरों के नियुक्ति पत्र वितरण कार्यक्रम में मीडिया की एंट्री पर रोक और लाइव प्रसारण न होने को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सोमवार की घटना से सबक लेते हुए सरकार ने इस बार अतिरिक्त सावधानी बरती। हालांकि, इससे यह बहस भी तेज हो गई है कि क्या पारदर्शिता और जवाबदेही से दूरी बनाई जा रही है। एक नियुक्ति पत्र वितरण कार्यक्रम से शुरू हुआ यह मामला अब राजनीतिक, सामाजिक और प्रशासनिक बहस में बदल चुका है। आने वाले दिनों में यह विवाद किस दिशा में जाएगा, यह इस पर निर्भर करेगा कि सरकार और मुख्यमंत्री इस पर क्या रुख अपनाते हैं और क्या कोई औपचारिक प्रतिक्रिया या कदम सामने आता है।