January 28, 2026

किशनगंज में 1 लाख रिश्वत लेते अमीन गिरफ्तार, निगरानी विभाग की टीम ने रंगे हाथ दबोचा

किशनगंज। बिहार के किशनगंज जिले में एक बार फिर सरकारी तंत्र में व्याप्त भ्रष्टाचार का पर्दाफाश हुआ है। निगरानी विभाग की टीम ने गुरुवार को बड़ी कार्रवाई करते हुए सदर प्रखंड के दौला पंचायत में पदस्थापित अमीन निरंजन कुमार को एक लाख रुपये रिश्वत लेते हुए रंगेहाथ पकड़ लिया। यह गिरफ्तारी किशनगंज बस स्टैंड के पास की गई, जहां आरोपी घूस की रकम लेने पहुंचा था।
जमीन अधिग्रहण में मांगी गई घूस
इस मामले की शुरुआत उस वक्त हुई जब जिले के निवासी जमील अख्तर ने निगरानी विभाग में शिकायत दर्ज कराई। शिकायत के अनुसार, जमील की जमीन सरकार द्वारा बांध निर्माण के लिए अधिग्रहित की गई थी। इसके मुआवजे की प्रक्रिया के दौरान अमीन निरंजन कुमार ने जमील से एक लाख रुपये की रिश्वत की मांग की। अमीन का स्पष्ट कहना था कि बिना चढ़ावा दिए मुआवजा नहीं मिलेगा।
निगरानी विभाग ने शुरू की जांच
शिकायत दर्ज होने के बाद निगरानी विभाग ने मामले को गंभीरता से लिया और जांच शुरू कर दी। प्रारंभिक जांच में ही आरोप सही पाए गए। इसके बाद टीम ने एक योजनाबद्ध तरीके से आरोपी को रंगेहाथ पकड़ने के लिए जाल बिछाया। योजना के तहत जमील अख्तर ने घूस की रकम तय समय पर बस स्टैंड पर देने की सहमति जताई।
जाल में फंसा अमीन, रंगेहाथ गिरफ्तारी
गुरुवार को जैसे ही अमीन निरंजन कुमार बस स्टैंड के पास जमील से घूस की रकम ले रहा था, निगरानी विभाग की टीम ने मौके पर धावा बोल दिया। अमीन को रंगेहाथ रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार कर लिया गया। टीम ने उसके पास से पूरे एक लाख रुपये बरामद किए, जो पहले से ही केमिकल से मार्क किए गए थे।
कार्रवाई से मचा हड़कंप
इस कार्रवाई से पूरे जिले के सरकारी महकमे में हड़कंप मच गया है। आम तौर पर शांत समझे जाने वाले किशनगंज जिले में यह कोई पहला मामला नहीं है। इससे पहले भी कई बार सरकारी कर्मियों को घूस लेते पकड़ा जा चुका है, लेकिन भ्रष्टाचार की प्रवृत्ति पर अंकुश नहीं लग सका है।
स्थानीय लोगों ने की कार्रवाई की सराहना
इस खुलासे के बाद स्थानीय जनता ने निगरानी विभाग की कार्रवाई की सराहना की है। लोगों का कहना है कि इस प्रकार की सख्त कार्रवाइयों से ही भ्रष्टाचारियों में डर पैदा होगा और सरकारी कार्यप्रणाली में पारदर्शिता आएगी। जनता ने मांग की है कि केवल गिरफ्तारियों तक ही बात न रहे, बल्कि दोषियों को सजा दिलाने की प्रक्रिया में भी तेजी लाई जाए।
भ्रष्टाचार पर लगातार उठ रहे सवाल
बिहार में सरकारी योजनाओं और मुआवजा वितरण से जुड़े मामलों में भ्रष्टाचार की शिकायतें आम हो गई हैं। खासकर ग्रामीण क्षेत्रों में आम नागरिकों को छोटे-छोटे कामों के लिए भी रिश्वत देनी पड़ती है। अमीनों, लेखपालों और अन्य अधिकारियों द्वारा किसानों और गरीबों से घूस मांगना अब एक खुला राज बन चुका है।
सरकारी महकमे की कार्यशैली पर सवाल
बार-बार घूसखोरी के मामलों का सामने आना यह दर्शाता है कि सरकारी विभागों में निगरानी और जवाबदेही की व्यवस्था कमजोर है। अगर समय रहते ऐसे मामलों में कठोर कदम नहीं उठाए गए, तो भ्रष्टाचार का यह जाल और गहरा होता जाएगा। किशनगंज में अमीन की गिरफ्तारी सिर्फ एक व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई नहीं है, बल्कि यह पूरे तंत्र में सुधार की आवश्यकता को उजागर करता है। जनता की उम्मीदें अब इस बात पर टिकी हैं कि निगरानी विभाग ऐसी कार्रवाइयों को जारी रखेगा और भ्रष्टाचार पर सख्त शिकंजा कसेगा। यदि इस दिशा में निरंतरता बनी रही, तो आने वाले समय में जनता को राहत और न्याय दोनों मिल सकते हैं।

You may have missed