February 18, 2026

BIHAR : उपराष्ट्रपति ने प्रकृति के साथ सामंजस्य बनाकर जीने पर दिया जोर

  • उपराष्ट्रपति ने किया नालंदा विश्वविद्यालय में छठे धर्म धम्म अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का उद्घाटन

नालंदा। दुनिया में शांति और सद्भावना की स्थापना के लिए उपराष्ट्रपति एम वेंकैया नायडू ने कोविड-19 महामारी के मद्देनजर हमारी जीवनशैली और सोच के हर पहलू का पुनर्मूल्यांकन करने का आह्वान किया। उन्होंने यह भी कहा कि हमें लोगों के जीवन में तनाव घटाने और उन्हें सुखी और प्रसन्न बनाने का मार्ग खोजना होगा।
कोविड-19 के बाद विश्व व्यवस्था के निर्माण में धर्म धम्म परंपराओं की भूमिका पर नालंदा में छठे धर्म धम्म अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का उद्घाटन करते हुए उन्होंने कहा कि दूसरी धार्मिक मान्यताओं के साथ हिंदू धर्म और बौद्ध धर्म की धर्म-धम्म परंपराओं में कोविड के बाद विश्व के सामने उभरती चुनौतियों के लिए समग्र और समावेशी जवाब मौजूद हैं। साथ ही उन्होंने यह भी विश्वास जताया कि हिन्दू धर्म और बौद्ध धर्म की शिक्षाओं को समझ कर और अपने जीवन में उतार कर कोई भी व्यक्ति अपने अंतर्मन और बाह्य जगत में शांति को प्राप्त कर सकता है।


श्री नायडू ने कहा कि सम्मेलन इस बात का परीक्षण करने का अवसर प्रदान करता है कि हमारे आसपास की दुनिया में सामने आ रही चुनौतियों को हल करने के लिए धर्म और धम्म की शिक्षाओं और प्रथाओं को किस हद तक लागू किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि धर्म-धम्म की धारणा सत्य और अहिंसा, शांति और सद्भाव, मानवता और आध्यात्मिक संबंध और सार्वभौमिक बंधुत्व व शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व सहित अपनी कई अभिव्यक्तियों में एक नैतिक स्रोत के रूप में कार्य करती है, जिसने सदियों से भारतीय उपमहाद्वीप के लोगों का इस दिशा में मार्गदर्शन किया है।
जलवायु परिवर्तन के भयंकर परिणामों के बारे में चेताते हुए उपराष्ट्रपति ने प्रकृति के साथ सामंजस्य बनाकर जीने पर जोर दिया। अपनी जड़ों की ओर लौटने पर बल देते हुए उन्होंने कहा कि हमें अपने पूर्वजों की उस पारंपरिक जीवनशैली को पुन: अपनाना चाहिए, जिसमें वे अपने पर्यावरण और प्रकृति के साथ मैत्रीवत जीवन जीते थे। इस अवसर पर उपराष्ट्रपति ने दुनिया के सबसे बड़े आत्मनिर्भर नेट-जीरो कैंपस बनाने की दिशा में प्रयास करने के लिए नालंदा विश्वविद्यालय की सराहना की।
इस मौके पर राज्यपाल फागू चौहान, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, श्रीलंका सरकार के परिवहन मंत्री, पवित्रा वन्नियाराची, नालंदा विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. सुनैना सिंह, इंडिया फाउंडेशन के निदेशक ललिता कुमार मंगलम एवं ध्रुव कटोच के अलावा अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।

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