मुंगेर खानकाह में सुपुर्द-ए-खाक हुए वली रहमानी, फिर खुली सुरक्षा तैयारियों पर राज्य सरकार की कलई, फंसी पुलिस जवानों की राइफल
फुलवारी शरीफ। सुपुर्दे खाक हुए इमारते शरिया के अमीरे शरीयत सह सज्जादा नशीं खानकाह रहमानी मुंगेर हजरत मौलाना वली रहमानी को खानकाह रहमानी परिसर में ही गार्ड आफ आनर दिया गया। हालांकि इस दौरान एक बार फिर बिहार पुलिस की व्यवस्था की पोल खुल गयी। बताया जता है कि जब सिविल जमादार ने शोक सलामी के लिए जवानों को निर्देश दिया तो पुलिस के सभी जवानों का राइफल फंस गया और आसमानी फायरिंग नहीं हो पाई। काफी प्रयास के बाद सभी राइफलों को दुरूस्त करने के क्रम में 10 में से मात्र 4 राइफलों से सलामी दी गई। इससे पहले करीब दस मिनट तक पुलिस आफिसर जवानों के इंसास को ठीक करने में जुटे रहे।


जानकारी के मुताबिक राजकीय सम्मान दिये जाने के दौरान जवानों का राइफल फंसने पर मुंगेर के डीएम, डीआईजी एवं एसपी मूकदर्शक बन कर रह गए। बिहार, झारखंड एवं उड़ीसा के इमारते शरिया के अमीरे शरीयत हजरत मौलाना वली रहमानी के निधन के बाद बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार की घोषणा की थी।
मौलाना वली रहमानी के अंतिम दीदार को उमड़ पड़े लाखों अकीदतमंद
इमारत-ए-शरिया के अमीर-ए-शरियत हजरत मौलाना वली रहमानी सुपुर्द-ए-खाक हो गए। मुंगेर के खानकाह रहमानिया में उन्हें दोपहर 2 बजे दफन किया गया। उनकी आखिरी जियारत (अंतिम दर्शन) के लिए करीब 5 लाख लोगों की भीड़ जुटी थी। सरकारी आदेश के मुताबिक राजकीय सम्मान के साथ हजरत वली रहमानी का अंतिम रस्म अदा करना था, हजरत मौलाना वली रहमानी को खानकाह परिसर में गार्ड आॅफ आॅनर के साथ दफन किया गया। जनाजे की नमाज के पहले मुंगेर डीएम, डीआईजी और एसपी ने पहले उनके जनाजे पर तिरंगा ओढ़ाया, उसके बाद फूल-माला चढ़ाया, उसके बाद उन्हें राजकीय सम्मान दिया गया। खानकाह परिसर में ही उन्हें उनके दादा और उनके अब्बा के मजार के पास दफनाया गया।
हजरत वली रहमानी का पार्थिव शरीर पटना से देर रात मुंगेर खानकाह रहमानी पहुंची। उनका जनाजा मुंगेर पहुंचने के बाद उनकी आखिरी जियारत (अंतिम दर्शन) करने के लिए लोगों की ऐसी भीड़ उमड़ी की कोरोना पर अकीदत भारी पड़ गई। सड़क से लेकर खानकाह तक तिल रखने की जगह तक नहीं बची थी। आल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड और इमारत-ए-शरिया के अमीर-ए-शरियत मौलाना वली रहमानी के अंतिम दीदार को मुंगेर में उनके चाहने वाले अकीदतमंद उमड़ पड़े। लोगों में न कोरोना का भय था और न तेज पर रही धूप की चिंता। उनके चाहने वालों की जुबान पर बस उनके लिए दुआ ही दुआ थी। लोग दुआओं में एक ही बात कह रहे थे- परवर दिगार आपको जन्नत में आला मकाम दें, अल्लाह ताला हजरत को जन्नत में मकाम अता करें।

बता दें कि मौलाना हजरत वली रहमान का शनिवार को पटना के पारस अस्पताल में इंतकाल हो गया था। इसके बाद उनका पार्थिव शरीर मुंगेर ले जाया गया। वली रहमानी का मुंगेर में पैतृक घर है। उनके अंतिम दर्शन को आज सुबह से खानकाह की ओर लोगों का हुजूम उमड़ने लगा था। कोसी, सीमांचल, मिथिलांचल के जिलों से सैकड़ों गाड़ियां रात में ही पहुंच गई थीं। इतना ही नहीं, नौका से ही खगड़िया, बेगूसराय समेत अन्य जिलों से लोग पहुंच रहे थे।
इतनी भीड़ हो गई कि खानकाह रहमानी में लंबी लाइन लग गई। इसके बाद भी कई लोग उनका दीदार नहीं कर पा रहे थे। वे नम आंखों से दुआएं कर रहे थे। लोग एक-दूसरे से कहते नजर आ रहे थे कि रहमानी साहब अपनी तकरीर में हमेशा लोगों की सेवा करने की नसीहत देते थे। जरूरतमंद को भोजन और प्यासे को जल पिलाने को वे बड़ा धर्म का काम बताते थे। कहते थे कि लोगों की सेवा सभी को करनी चाहिए। तेज धूप और उमड़ते हुए लोगों को देखते हुए खानकाह रहमानी पथ पर युवा शरबत व फलों से सेवा कर रहे थे। सेवा करने में बच्चे, युवा से लेकर बुजुर्ग तक जुटे हुए थे। हालांकि, सुरक्षा को लेकर पुलिस की जिला प्रशासन की ओर से तैनाती की गई थी।

