PATNA : आधुनिक तकनीक से मानसिक-विकलांगों का पुनर्वास हुआ आसान
परसा में वात्सल्य मेंटल हेल्थ एंड रिहैब्लिटेशन इंस्टिच्यूट का हुआ उद्घाटन

फुलवारी शरीफ। सारे संसार में विकालांगजनों का उपचार और पुनर्वास सदियों से मानव-समुदाय के लिए चुनौती का विषय रहा है। विकलांगों की श्रेणी में शारीरिक रूप से विकलांग, वाक् श्रवण विकलांगता, दृष्टि विकलांगता, मानसिक विकलांगता, बहु-विकलांगता समेत कई अन्य प्रकार की भी विकलांगता को सूचीबद्ध किया गया है। इनमें मानसिक विकलांगता सदा से ही सबसे चुनौती भरा रहा है। आज भी यह सबसे बड़ी चुनौती है। किंतु यह परितोष की बात है कि आधुनिक पुनर्वास विज्ञान और सम्यक रूप से प्रशिक्षित विशेषज्ञों के कुशल हस्तक्षेप से यह अत्यंत कठिन कार्य अब बहुत हद तक सरल हो गया है। किंतु ऐसे विशेषज्ञ-पुनर्वासकर्मियों और केंद्रों का अब भी घोर अभाव है, जिससे लक्ष्य पाने में बाधा हो रही है। उक्त बातें गुरुवार को परसा में मानसिक-विकलांगों के पुनर्वास के लिए स्थापित किए गए ‘वात्सल्य मेंटल हेल्थ एंड रिहैब्लिटेशन इंस्टिच्यूट’ का उद्घाटन करते हुए इंडियन इंस्टिच्युट आफ हेल्थ एडुकेशन एंड रिसर्च के निदेशक-प्रमुख और बिहार हिन्दी साहित्य सम्मेलन के अध्यक्ष डॉ. अनिल सुलभ ने कही।
डॉ. सुलभ ने कहा कि संपूर्ण भारतवर्ष में और विशेषकर बिहार में ऐसे पुनर्वास-केंद्रों और विशेषज्ञों का चिंताजनक अभाव है। मानसिक विकलांगता के क्षेत्र में दीर्घ अनुभव रखने वाले कुशल विशेषज्ञ डॉ. सुधाकांत पांडेय द्वारा स्थापित यह केंद्र निश्चित रूप से मानसिक विकलांग व्यक्तियों और विशेष बच्चों के लिए लाभकारी होगा और इस कमी को दूर करने में भी सहायक होगा। यह संस्थान एक नशा-विमुक्ति केंद्र के रूप में भी कार्य करेगा यह और बड़ी बात है।
उद्घाटन समारोह की अध्यक्षता करते हुए वरिष्ठ फिजिÞयोथेरापिस्ट डॉ. नरेंद्र कुमार सिन्हा ने कहा कि आज के विषाक्त वातावरण के कारण सामान्य लोग भी तनाव और मानसिक रोगों के शिकार हो रहे हैं। ऐसी समस्याओं के समाधान में भी यह संस्थान अपनी भूमिका अदा कर सकती है। इसके पूर्व अतिथियों का स्वागत करते हुए केंद्र के निदेशक डॉ. सुधाकांत पांडेय ने कहा कि इस केंद्र में एक साथ 50 मानसिक समस्याओं से जूझ रहे लोगों और नशे के शिकार व्यक्तियों की आवासीय व्यवस्था उपलब्ध है। प्रतिदिन नए रोगियों को देखा जाएगा।
समारोह के विशिष्ट अतिथि और नेत्र-रोग विशेषज्ञ डॉ. संतोष कुमार, मनोवैज्ञानिक डॉ. कीर्ति ने भी अपने विचार व्यक्त किए। मंच का संचालन डॉ. उपेन्द्र उपाध्ययाय ने तथा धन्यवाद-ज्ञापन चंद्र भूषण पांडेय ने किया।

