February 15, 2026

BIG BREAKING : केंद्रीय मंत्री तथा देश के शीर्षस्थ दलित राजनेता रामविलास पासवान का निधन, देश भर में शोक की लहर

पटना। रामविलास पासवान भारतीय दलित राजनीति के प्रमुख नेताओं में से एक हैं। वे लोक जनशक्ति पार्टी के अध्यक्ष एवं राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन की सरकार में केन्द्रीय मंत्री भी हैं। वे सोलहवीं लोकसभा में बिहार के हाजीपुर लोकसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते थे। रामविलास पासवान का आज 8 अक्टूबर 2020 को 74 वर्ष की आयु में दिल्ली में निधन हो गया है।
व्यक्तिगत जीवन
पासवान बिहार के खगरिया जिले के शाहरबन्नी गाँव से हैं। वह एक अनुसूचित जाति परिवार के लिए पैदा हुये थे। उन्होंने 1 9 60 के दशक में राजकुमारी देवी से शादी की। 2014 में उन्होंने खुलासा किया कि लोकसभा नामांकन पत्रों को चुनौती देने के बाद उन्होंने 1 9 81 में उन्हें तलाक दे दिया था। उनकी पहली पत्नी राजकुमारी से उषा और आशा दो बेटियां हैं। 1983 में, अमृतसर से एक एयरहोस्टेस और पंजाबी हिन्दू रीना शर्मा से विवाह किया। उनके पास एक बेटा और बेटी है। उनके बेटे चिराग पासवान एक अभिनेता से बने राजनेता हैं। गुरुवार, 8 अक्टूबर 2020 को 74 वर्ष की आयु में दिल्ली में उनका निधन हो गया।
राजनीतिक जीवन
श्री पासवान पिछले 32 वर्षों में 11 चुनाव लड़ चुके हैं और उनमें से नौ जीत चुके हैं. इस बार उन्होंने चुनाव नहीं लड़ा लेकिन इस बार सत्रहवीं लोकसभा में उन्होंने मोदी सरकार में एक बार फिर से उपभोक्ता मामलात मंत्री पद की शपथ ली। श्री पासवान जी के पास छ: प्रधानमंत्रियों के साथ काम करने का अनूठा रिकॉर्ड भी है।

शोक व्यक्त
वीआईपी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष मुकेश सहनी, बिहार प्रभारी संतोष कुशवाहा और निषाद विकास संघ के प्रदेश अध्यक्ष अशोक चौहान ने केंद्रीय मंत्री व लोजपा के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष रामविलास पासवान के निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया है। सभी ने कहा कि उनका निधन होना बिहार ही नही पूरे देश के लिए अपूरणीय क्षति है।उनके द्वारा किये गए विकास कार्यो को कभी भुलाया नही जा सकता।

सी पी आई (एम) के राज्य सचिव अवधेश कुमार, पटना जिला सचिव मनोज कुमार चंद्रवंशी ने सामाजिक न्याय के योद्धा एवम् केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान के निधन पर शोक व्यक्त करते हुए श्रद्धांजलि दी है। अवधेश कुमार ने रामविलास पासवान के निधन पर दुख व्यक्त करते हुए कहा कि वंचितों के अधिकार के प्रति बोलने वाले मुखर नेता थे। उनके निधन से देश एक दलित नेता को खो दिया।

 

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