क्या पटना में पैरवीकारों को नसीब हो रहा एंटीजन टेस्ट की सुविधा ?
पटना। बिहार में स्वास्थ्य महकमा कागजों पर चल रहा है। तरह-तरह के दावे किए जा रहे हैं। जबकि वस्तुस्थिति इसके ठीक उलट है। एंटीजन टेस्ट को लेकर सरकार की ओर से लाखों रूपये का विज्ञापन अखबारों में देकर दावे किए गए कि लोगों को पटना के 25 केंद्रों पर टेस्ट की सुविधा उपलब्ध करायी गयी है, लेकिन अधिक संख्या में आम लोगों का टेस्ट हो भी रही है या नहीं, यह बड़ा सवाल है। राजधानी में आम लोगों के बीच चर्चा यह है कि केंद्रों पर एंटीजन टेस्ट ज्यादातर पैरवीकारों को हो रहा है। लोग घंटों समय बिताकर केंद्र से लौटने को मजबूर हैं।
हमारे संवाददाता ने रविवार को एक युवक को एंटीजन टेस्ट के लिए जब सरकार द्वारा जारी पटना के 25 अस्पतालों में से तीन अस्पतालों गर्दनीबाग 6 सी अस्पताल, गर्दनीबाग अस्पताल और होटल पाटलीपुत्रा अशोक, जिसे कोविड आइसोलेशन वार्ड बनाया गया है, में जांच संबंधित जानकारी के लिए फोन किया। सबसे पहले गर्दनीबाग 6 सी में फोन करने पर बताया गया कि आज जांच करने वाली टीम आयी ही नहीं, इस दौरान उक्त व्यक्ति से फोन लेकर किसी व्यक्ति ने कहा कि यहां का स्वास्थ्य विभाग ही वेंटिलेटर पर है तो जांच कैसे होगी। मैं सुबह 9 बजे से ही जांच के लिए आया हूं, लेकिन यहां देखने-सुनने वाला कोई नहीं हैं। अस्पताल के परिसर में दर्जनों लोग इसी इंतजार में बैठे हुए हैं। उसके बाद गर्दनीबाग अस्पताल में सरकार द्वारा जारी मोबाईल नं. पर फोन किया तो यहां फोन तो घनघनाती रही, लेकिन उधर से किसी ने कोई जवाब नहीं दिया। उसके बाद पाटलीपुत्रा अशोक में फोन किया, दो मर्तबा कोशिश करने के बाद एक महिला डॉक्टर ने मोबाईल उठाया तो कहा कि कोरोना जांच करानी है। उधर से महिला डॉक्टर ने पूछा कि सिस्टम्स क्या हैं तो बताया कि खाना खाने में स्वाद नहीं लग रही, इस पर उधर से बताया कि यह गंभीर लक्षण नहीं है, ज्यादा पैनिक होने की जरूरत नहीं है। उन्होंने कोरोना संदिग्ध को होम आईसोलेट में रहने की सलाह दी और जैसा मैं बता रही हूं उसी के अनुसार ट्रीटमेंट लें। हां, अगर सांस लेने में दिक्कत, बुखार, खांसी है तो आइसोलेट होने की जरूरत है।
आज गर्दनीबाग 6 सी स्वास्थ्य केंद्र में जांच के लिए जाने पर युवक को पता चला कि प्रतिदिन एक सेंटर पर 20-25 लोगों का ही सैंपल लिया जा रहा है। लेकिन लोगों ने आरोप लगाया कि जो पैरवी वाले लोग हैं उनका सैंपल सबसे पहले लिया जा रहा है, जबकि आम लोगों को पूछने वाला कोई नहीं है। ऐसे में सवाल उठता है कि सरकार ने आम लोगों के जांच की लिए सुविधा के लिए लाखों रूपये विज्ञापन पर खर्च किया लेकिन उसका सबसे अधिक फायदा पैरवीकारों को नसीब हो रहा है। ऐसे में आम लोग जाएं तो जाएं कहां।


