September 9, 2026

पटना में क्या मोहल्ले की दुकानें बंद हो जाएंगी? नगर निगम के नोटिस से हजारों दुकानदारों में बेचैनी..

पटना। राजधानी पटना में आवासीय मकानों और परिसरों में चल रही व्यावसायिक गतिविधियों को लेकर नगर निगम की कार्रवाई ने छोटे दुकानदारों और आम लोगों की चिंता बढ़ा दी है। नगर निगम ने ऐसे संपत्ति मालिकों को नोटिस जारी किए हैं, जिनकी आवासीय संपत्तियों का इस्तेमाल बिना निर्धारित अनुमति के गैर-आवासीय या व्यावसायिक गतिविधियों के लिए किए जाने का आरोप है।

नगर निगम की ओर से जारी सार्वजनिक सूचना के मुताबिक यह कार्रवाई सुप्रीम कोर्ट के 25 मार्च, 20 मई, 9 जुलाई और 5 अगस्त 2026 के आदेशों के अनुपालन में की जा रही है। इसके तहत पटना नगर निगम क्षेत्र के सभी अंचलों में वार्डवार सर्वे कराया गया है और आवासीय क्षेत्र में हो रहे कथित अनधिकृत गैर-आवासीय उपयोग की पहचान की गई है।

26,745 से अधिक लोगों को नोटिस

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार नगर निगम ने करीब 26,745 मकान मालिकों को नोटिस जारी किया है। इनमें ऐसे परिसर शामिल हैं जहां आवासीय भवनों में दुकान, होटल, हॉस्टल समेत अन्य व्यावसायिक गतिविधियां संचालित होने की बात सामने आई है। नोटिस मिलने वालों में पटना की मेयर सीता साहू का नाम भी सामने आया है।

नगर निगम ने संबंधित लोगों से गैर-आवासीय उपयोग की अनुमति, स्वीकृत नक्शा और अन्य जरूरी दस्तावेज प्रस्तुत करने को कहा है। यानी सिर्फ नोटिस मिलने का मतलब यह नहीं है कि हर दुकान तत्काल बंद होने जा रही है।

जवाब नहीं देने पर सीलिंग की चेतावनी

मामले में सबसे बड़ी चिंता सीलिंग को लेकर है। रिपोर्टों के मुताबिक जिन संपत्ति मालिकों के पास अपने व्यावसायिक इस्तेमाल को सही साबित करने वाले आवश्यक दस्तावेज नहीं होंगे या जो नोटिस का जवाब नहीं देंगे, उनके खिलाफ नियमों के तहत कार्रवाई की जा सकती है। इसमें संबंधित परिसर को सील करने की कार्रवाई भी शामिल हो सकती है।

नगर निगम ने अब संबंधित लोगों को सुनवाई का मौका भी दिया है। आधिकारिक सूचना में साफ कहा गया है कि सर्वे किए गए स्थलों के मालिकों, बिल्डरों, डेवलपरों और गैर-आवासीय उपयोगकर्ताओं की संबंधित अंचल कार्यालय में सुनवाई निर्धारित की गई है।

आखिर विवाद क्या है?

विवाद का केंद्र यह है कि क्या आवासीय इलाकों में हर तरह की छोटी दुकान या कारोबार अवैध माना जाएगा?

मोहल्लों में बड़ी संख्या में किराना दुकान, मेडिकल स्टोर, दूध की दुकान, स्टेशनरी, छोटे कार्यालय और अन्य रोजमर्रा की जरूरतों से जुड़े कारोबार चलते हैं। इन दुकानों पर स्थानीय लोगों की दैनिक जरूरतें निर्भर करती हैं।

इसी वजह से दुकानदारों और जनप्रतिनिधियों की चिंता है कि यदि नियमों को बिना व्यावहारिक समाधान के सख्ती से लागू किया गया, तो छोटे कारोबारियों की रोजी-रोटी प्रभावित हो सकती है और लोगों को रोजमर्रा का सामान खरीदने के लिए दूर जाना पड़ सकता है।

सरकार ने बनाई समिति

मामले ने इतना तूल पकड़ा कि 25 अगस्त 2026 को मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने इस मुद्दे के समाधान के लिए उपमुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी की अध्यक्षता में एक समिति गठित की। समिति में नगर विकास एवं आवास मंत्री नीतीश कुमार मिश्र सहित अन्य मंत्री और विधान पार्षद शामिल हैं। सरकार ने समिति को इस पूरे मामले का अध्ययन कर व्यावहारिक और जनहितकारी समाधान निकालने की जिम्मेदारी दी है।

क्या पटना की सभी मोहल्ले की दुकानें बंद हो जाएंगी?

फिलहाल ऐसा कहना सही नहीं होगा। उपलब्ध आधिकारिक सूचना में सभी मोहल्ले की दुकानों को बंद करने का आदेश नहीं है। कार्रवाई उन संपत्तियों के संबंध में है जिनका आवासीय क्षेत्र में गैर-आवासीय उपयोग अनधिकृत पाया गया है और जिनके पास अपने उपयोग को वैध साबित करने के जरूरी दस्तावेज नहीं हैं।

इसलिए असली सवाल यह है कि कौन-सी दुकानें नियमों के दायरे में आती हैं, किन्हें राहत मिल सकती है और छोटे दुकानदारों के लिए सरकार क्या व्यावहारिक रास्ता निकालती है।

फिलहाल मामला सुनवाई और सरकार द्वारा गठित समिति के स्तर पर है। ऐसे में यह कहना कि पटना की हजारों मोहल्ले की दुकानें निश्चित रूप से बंद हो जाएंगी, अभी जल्दबाजी होगी।

सवाल अब सिर्फ नियमों का नहीं, बल्कि हजारों छोटे कारोबारियों की रोजी-रोटी और पटना के लाखों लोगों की रोजमर्रा की जरूरतों का भी है।

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