जयप्रकाश विश्वविद्यालय में फर्जी अंक पत्र घोटाले का खुलासा, दलालों और कर्मचारियों की मिलीभगत की आशंका

  • अंक पत्र सुधार के नाम पर छात्रों से वसूले गए हजारों रुपये, जांच में कई दस्तावेज निकले फर्जी
  • विश्वविद्यालय प्रशासन ने शुरू की सख्त जांच, परीक्षा विभाग में बाहरी लोगों की आवाजाही पर रोक

छपरा। जयप्रकाश विश्वविद्यालय में फर्जी अंक पत्र जारी किए जाने का गंभीर मामला सामने आने के बाद शिक्षा जगत में हड़कंप मच गया है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने इस मामले को बेहद गंभीरता से लेते हुए जांच शुरू कर दी है। प्रारंभिक जांच में यह खुलासा हुआ है कि कई छात्र-छात्राओं को ऐसे अंक पत्र दिए गए, जिन्हें विश्वविद्यालय द्वारा आधिकारिक रूप से जारी ही नहीं किया गया था। मामले में विश्वविद्यालय के कुछ कर्मचारियों और दलालों की मिलीभगत की आशंका जताई जा रही है। विश्वविद्यालय के परीक्षा नियंत्रक डॉ. अशोक कुमार मिश्रा ने बताया कि इन दिनों विभिन्न परीक्षाओं के अंतर्गत अंक पत्रों में हुई त्रुटियों को सुधारने की प्रक्रिया चल रही है। इसी दौरान जब टेबुलेशन रजिस्टर की जांच की गई तो कई ऐसे अंक पत्र सामने आए, जिनका कोई आधिकारिक रिकॉर्ड विश्वविद्यालय के पास उपलब्ध नहीं था। जांच में यह स्पष्ट हुआ कि ये दस्तावेज फर्जी तरीके से तैयार किए गए थे। परीक्षा नियंत्रक के अनुसार, दो छात्रों से विस्तृत पूछताछ की गई है। दोनों छात्रों ने स्वीकार किया कि अंक पत्र में सुधार कराने के नाम पर कुछ दलालों ने उनसे पैसे लिए और नया अंक पत्र उपलब्ध कराया। बाद में जब उन अंक पत्रों का सत्यापन किया गया तो वे पूरी तरह गलत पाए गए। छात्रों ने बताया कि उनसे दो हजार से पांच हजार रुपये तक की राशि वसूली गई थी। विश्वविद्यालय प्रशासन का कहना है कि यह कोई छोटा मामला नहीं है, बल्कि इसके पीछे एक बड़े गिरोह के सक्रिय होने की आशंका है। जांच में यह भी संकेत मिले हैं कि कुछ साइबर कैफे के माध्यम से फर्जी अंक पत्र तैयार कर छात्रों को उपलब्ध कराए जा रहे थे। विश्वविद्यालय अब छात्रों के जरिए उन दलालों तक पहुंचने की कोशिश कर रहा है, जो इस अवैध कार्य में शामिल हैं। डॉ. अशोक कुमार मिश्रा ने कहा कि फिलहाल यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि विश्वविद्यालय के कौन-कौन कर्मचारी इस पूरे नेटवर्क से जुड़े हुए हैं। हालांकि उन्होंने इस संबंध में किसी कर्मचारी का नाम सार्वजनिक करने से इनकार किया। उनका कहना है कि जांच पूरी होने के बाद दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। विश्वविद्यालय प्रशासन ने इस मामले में प्राथमिकी दर्ज कराने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी है। परीक्षा विभाग ने साफ कर दिया है कि दोषी पाए जाने वाले किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा। साथ ही परीक्षा विभाग में बाहरी लोगों के प्रवेश पर अस्थायी रूप से रोक लगा दी गई है और सभी कर्मचारियों की गतिविधियों पर नजर रखी जा रही है। जांच के दौरान यह भी पाया गया कि कई छात्र-छात्राएं अपने अंक पत्र में सुधार कराने के लिए निर्धारित प्रक्रिया का पालन नहीं कर रहे थे। विश्वविद्यालय ने पहले ही स्पष्ट निर्देश जारी किए थे कि यदि किसी छात्र के अंक पत्र में त्रुटि हो तो वह अपने संबंधित महाविद्यालय में आवेदन जमा करे। महाविद्यालय द्वारा सत्यापित आवेदन ही विश्वविद्यालय परीक्षा विभाग तक भेजा जाएगा और उसके बाद ही सुधार की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। लेकिन कई छात्र दलालों के झांसे में आकर सीधे उनके संपर्क में पहुंच गए। इसका फायदा उठाकर दलालों ने फर्जी दस्तावेज तैयार कर छात्रों को सौंप दिए। विश्वविद्यालय प्रशासन का कहना है कि छात्रों को भी जागरूक होने की जरूरत है, ताकि वे ऐसे गिरोहों का शिकार न बनें। परीक्षा नियंत्रक ने छात्रों और अभिभावकों से अपील की है कि वे किसी भी प्रकार के दस्तावेज सुधार के लिए केवल अधिकृत प्रक्रिया का ही पालन करें। यदि किसी अंक पत्र, प्रमाण पत्र या अन्य दस्तावेज में गड़बड़ी हो तो संबंधित महाविद्यालय में आवेदन दें। सत्यापन के बाद ही विश्वविद्यालय स्तर पर सुधार किया जाएगा। इस घटना ने विश्वविद्यालय की कार्यप्रणाली और परीक्षा व्यवस्था पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। छात्रों और अभिभावकों में भी चिंता का माहौल है। कई लोगों का कहना है कि यदि समय रहते इस मामले का खुलासा नहीं होता तो बड़ी संख्या में छात्र फर्जी दस्तावेजों के आधार पर नौकरी या उच्च शिक्षा के लिए आवेदन कर सकते थे। शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि विश्वविद्यालयों में दस्तावेजों की डिजिटल निगरानी और सत्यापन प्रणाली को और मजबूत करने की जरूरत है। साथ ही छात्रों को यह समझाना भी आवश्यक है कि किसी भी शॉर्टकट या अवैध माध्यम का सहारा लेना भविष्य में गंभीर कानूनी परेशानी का कारण बन सकता है। फिलहाल विश्वविद्यालय प्रशासन पूरे मामले की गहराई से जांच कर रहा है। आने वाले दिनों में इस फर्जीवाड़े से जुड़े और भी बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।

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