महंगाई की नई मार, मुंबई में ब्रेड और नाश्ते से जुड़े उत्पादों के दाम बढ़े

  • पेट्रोल-डीजल महंगा होने के बाद अब ब्रेड, पाव और सैंडविच की कीमतों में पांच रुपये तक की वृद्धि
  • कच्चे माल, पैकेजिंग और परिवहन लागत बढ़ने से बेकरी उद्योग पर दबाव, आम लोगों की जेब पर बढ़ा बोझ

मुंबई। मध्य पूर्व एशिया में जारी तनाव और वैश्विक आर्थिक अस्थिरता का असर अब भारत में आम लोगों की रसोई तक पहुंचने लगा है। बीते कुछ दिनों में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी के बाद अब खाद्य पदार्थों के दाम भी तेजी से बढ़ रहे हैं। सोना, चांदी, दूध और अन्य जरूरी वस्तुओं के महंगे होने के बाद अब सुबह के नाश्ते से जुड़ी चीजें भी महंगाई की चपेट में आ गई हैं। देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में ब्रेड और उससे जुड़े कई उत्पादों की कीमतों में भारी बढ़ोतरी कर दी गई है, जिससे आम उपभोक्ताओं की चिंता बढ़ गई है। मुंबई में 16 मई से विभिन्न प्रकार की ब्रेड के दामों में पांच रुपये तक की वृद्धि लागू कर दी गई है। शहर में बड़ी संख्या में लोग अपने दिन की शुरुआत पाव, सैंडविच, वड़ा पाव और अन्य ब्रेड आधारित खाद्य पदार्थों से करते हैं। ऐसे में कीमतों में यह बढ़ोतरी सीधे तौर पर आम जनता की जेब पर असर डालने वाली मानी जा रही है। खासकर नौकरीपेशा लोग, मजदूर, छात्र और दैनिक कामकाज में व्यस्त रहने वाले नागरिक सबसे अधिक प्रभावित होंगे। बेकरी उद्योग से जुड़े लोगों का कहना है कि कीमतों में अचानक हुई इस वृद्धि के पीछे कई बड़े कारण हैं। इनमें सबसे प्रमुख कारण ब्रेड की पैकेजिंग में इस्तेमाल होने वाले प्लास्टिक आधारित कच्चे माल की बढ़ती कीमतें हैं। भारत में इस सामग्री का बड़े पैमाने पर आयात किया जाता है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारतीय रुपये की कीमत में गिरावट आने के कारण इसका आयात पहले की तुलना में काफी महंगा हो गया है। इसके अलावा पेट्रोल और डीजल की बढ़ती कीमतों ने परिवहन लागत को भी प्रभावित किया है। बेकरी उत्पादों को शहर के अलग-अलग हिस्सों तक पहुंचाने में अब पहले से अधिक खर्च आ रहा है। इसके साथ ही ब्रेड में इस्तेमाल होने वाले परिरक्षक रसायनों और अन्य खाद्य सामग्री की कीमतों में भी वृद्धि हुई है। इन सभी कारणों से उत्पादन लागत बढ़ गई है, जिसका बोझ अब उपभोक्ताओं पर डाला जा रहा है। नई कीमतों के अनुसार मुंबई में 400 ग्राम सैंडविच ब्रेड की कीमत 40 रुपये से बढ़ाकर 45 रुपये कर दी गई है। इसी प्रकार साबुत गेहूं से बने ब्रेड की कीमत 55 रुपये से बढ़कर 60 रुपये हो गई है। बहु-अनाज ब्रेड अब 60 रुपये के बजाय 65 रुपये में मिलेगा। छोटे भूरे रंग के ब्रेड की कीमत 28 रुपये से बढ़ाकर 30 रुपये कर दी गई है। वहीं सफेद ब्रेड की कीमत 20 रुपये से बढ़कर 22 रुपये और बड़े भूरे ब्रेड की कीमत 45 रुपये से बढ़कर 50 रुपये हो गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि ब्रेड की कीमतों में यह बढ़ोतरी केवल एक उत्पाद तक सीमित नहीं रहेगी। क्योंकि मुंबई जैसे शहर में बड़ी संख्या में लोग वड़ा पाव, मिसल पाव, सब्जी पाव और सैंडविच जैसे खाद्य पदार्थों पर निर्भर रहते हैं, इसलिए इनसे जुड़े अन्य खाद्य उत्पादों की कीमतें भी बढ़ सकती हैं। इससे रोजाना का खर्च बढ़ेगा और आम आदमी का घरेलू बजट प्रभावित होगा। बेकरी संचालकों का कहना है कि लगातार बढ़ती लागत के कारण उद्योग पर दबाव बढ़ता जा रहा है। उनका कहना है कि प्लास्टिक पैकेजिंग, परिवहन, आयातित कच्चे माल और ईंधन की बढ़ती कीमतों ने उत्पादन लागत को काफी बढ़ा दिया है। हाल ही में दूध की कीमतों में हुई वृद्धि ने भी खाद्य पदार्थों की लागत को और अधिक प्रभावित किया है। आर्थिक जानकारों के अनुसार वैश्विक संकट और ऊर्जा बाजार में अस्थिरता का असर आने वाले समय में और अधिक दिखाई दे सकता है। यदि कच्चे तेल की कीमतों में तेजी बनी रही तो खाद्य उत्पादों और रोजमर्रा की जरूरत की अन्य वस्तुओं की कीमतों में भी और बढ़ोतरी संभव है। फिलहाल मुंबई में ब्रेड की बढ़ी हुई कीमतों ने आम लोगों के दैनिक जीवन पर असर डालना शुरू कर दिया है। लोग अब महंगाई के कारण अपने खर्चों में कटौती करने को मजबूर हो रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि जल्द राहत नहीं मिली तो आने वाले दिनों में महंगाई का दबाव और अधिक बढ़ सकता है।

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