पश्चिम बंगाल की पहली भाजपा सरकार के बड़े फैसले, सीमा सुरक्षा से स्वास्थ्य योजना तक कई घोषणाएं

  • शुभेंदु अधिकारी की पहली मंत्रिमंडल बैठक में कई महत्वपूर्ण निर्णय लागू
  • सीमा पर बाड़बंदी, आयुष्मान भारत योजना और भारतीय न्याय संहिता लागू करने का ऐलान

कोलकाता। पश्चिम बंगाल में पहली बार बनी भारतीय जनता पार्टी की सरकार ने सत्ता संभालते ही कई बड़े और महत्वपूर्ण फैसलों की घोषणा की है। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के नेतृत्व में आयोजित पहली मंत्रिमंडल बैठक में सीमा सुरक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं, शिक्षा और कानून व्यवस्था से जुड़े कई अहम निर्णय लिए गए, जिन्हें तत्काल प्रभाव से लागू करने की बात कही गई है। इन फैसलों को राज्य की नई सरकार की प्राथमिकताओं के रूप में देखा जा रहा है। सरकार का सबसे बड़ा और चर्चित फैसला बांग्लादेश सीमा से जुड़े इलाकों की जमीन सीमा सुरक्षा बल को सौंपने का है। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने जानकारी दी कि सीमा से सटी जमीन को सीमा सुरक्षा बल को हस्तांतरित किया जाएगा ताकि वहां प्रभावी तरीके से बाड़बंदी की जा सके। सरकार का मानना है कि इससे अवैध घुसपैठ और सीमा पार गतिविधियों पर नियंत्रण लगाने में मदद मिलेगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि जमीन हस्तांतरण की प्रक्रिया सोमवार से ही शुरू कर दी जाएगी और अगले 45 दिनों के भीतर इसे पूरा कर लिया जाएगा। इसके बाद सीमा सुरक्षा बल द्वारा बाड़बंदी का कार्य शुरू किया जाएगा। उन्होंने कहा कि लंबे समय से राज्य अवैध घुसपैठ की समस्या से जूझ रहा है और इस निर्णय से इस समस्या पर काफी हद तक नियंत्रण पाया जा सकेगा। नई सरकार ने स्वास्थ्य क्षेत्र में भी बड़ा फैसला लेते हुए पश्चिम बंगाल में आयुष्मान भारत योजना लागू करने की घोषणा की है। इससे पहले ममता बनर्जी सरकार ने केंद्र सरकार की इस योजना को राज्य में लागू नहीं किया था। अब राज्य के लोगों को भी इस योजना के तहत स्वास्थ्य सुविधाओं का लाभ मिल सकेगा। सरकार का कहना है कि इससे गरीब और जरूरतमंद परिवारों को बेहतर चिकित्सा सहायता प्राप्त होगी। शिक्षा क्षेत्र में भी नई सरकार ने अहम घोषणा की है। स्कूल शिक्षकों की नियुक्ति के लिए आवेदन करने वाले अभ्यर्थियों की अधिकतम आयु सीमा में पांच वर्ष की बढ़ोतरी की गई है। यह घोषणा चुनाव प्रचार के दौरान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा किए गए वादे का हिस्सा मानी जा रही है। इससे बड़ी संख्या में ऐसे अभ्यर्थियों को राहत मिलने की उम्मीद है, जो उम्र सीमा के कारण आवेदन नहीं कर पा रहे थे। सरकार ने राज्य में भारतीय न्याय संहिता लागू करने का भी निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि अब तक राज्य में इसे लागू नहीं किया गया था, जो संविधान की भावना के विपरीत था। उन्होंने स्पष्ट किया कि अब पश्चिम बंगाल में भी देश के अन्य राज्यों की तरह भारतीय न्याय संहिता लागू होगी। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि पूर्ववर्ती सरकार ने गृह मंत्रालय द्वारा जारी जनगणना संबंधी दिशा-निर्देशों को भी लागू नहीं किया था। अब नई सरकार ने उस प्रक्रिया को भी आगे बढ़ाने का निर्णय लिया है। सरकार का दावा है कि प्रशासनिक व्यवस्था को अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनाने के लिए सभी लंबित प्रक्रियाओं को जल्द पूरा किया जाएगा। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भाजपा सरकार ने अपनी पहली ही मंत्रिमंडल बैठक में यह संकेत देने की कोशिश की है कि वह चुनाव के दौरान किए गए वादों को गंभीरता से लागू करना चाहती है। सीमा सुरक्षा, स्वास्थ्य योजना और कानून व्यवस्था से जुड़े फैसलों को भाजपा की प्रमुख राजनीतिक और प्रशासनिक प्राथमिकताओं के रूप में देखा जा रहा है। पश्चिम बंगाल के राजनीतिक इतिहास में यह पहली बार है जब भारतीय जनता पार्टी ने राज्य में सरकार बनाई है। ऐसे में लोगों की नजर नई सरकार की नीतियों और फैसलों पर टिकी हुई है। भाजपा नेतृत्व का कहना है कि राज्य में विकास, सुरक्षा और सुशासन को प्राथमिकता दी जाएगी। हालांकि विपक्ष ने सरकार के कुछ फैसलों पर सवाल भी उठाने शुरू कर दिए हैं। विपक्षी दलों का कहना है कि सरकार को केवल घोषणाएं करने के बजाय जमीनी स्तर पर उनके प्रभावी क्रियान्वयन पर ध्यान देना चाहिए। फिलहाल नई सरकार के शुरुआती फैसलों ने राज्य की राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है। सीमा सुरक्षा से लेकर स्वास्थ्य और शिक्षा तक लिए गए फैसलों को राज्य की दिशा बदलने वाले कदम के रूप में देखा जा रहा है। अब लोगों की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि सरकार इन घोषणाओं को कितनी तेजी और प्रभावशीलता के साथ लागू कर पाती है।