मुजफ्फरपुर के बाल गृह से 10 बच्चे लापता, प्रशासन में मचा हड़कंप
- नरौली आश्रय गृह से एक साथ बच्चों के गायब होने से सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल
- पुलिस और प्रशासन जांच में जुटे, सीसीटीवी फुटेज खंगाले जा रहे
मुजफ्फरपुर। जिले से एक बेहद चौंकाने वाली घटना सामने आई है, जिसने बाल सुरक्षा व्यवस्था और प्रशासनिक निगरानी पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मुसहरी थाना क्षेत्र स्थित नरौली बृहद आश्रय गृह से एक साथ 10 बच्चों के रहस्यमय तरीके से लापता होने के बाद पूरे प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मच गया है। घटना के सामने आने के बाद इलाके में सनसनी फैल गई है और पुलिस बच्चों की तलाश में लगातार छापेमारी कर रही है। प्राप्त जानकारी के अनुसार 10 मई को आश्रय गृह में रहने वाले 10 बच्चे अचानक गायब पाए गए। जब आश्रय गृह के कर्मचारियों ने बच्चों की गिनती की तो पता चला कि कई बच्चे वहां मौजूद नहीं हैं। इसके बाद तत्काल प्रशासन और पुलिस को सूचना दी गई। घटना की जानकारी मिलते ही मुसहरी थाना पुलिस मौके पर पहुंची और जांच शुरू कर दी। मामले की गंभीरता को देखते हुए अनुमंडल पदाधिकारी (पूर्वी) तुषार कुमार भी स्वयं आश्रय गृह पहुंचे और पूरे मामले की समीक्षा की। प्रशासनिक अधिकारियों ने आश्रय गृह के कर्मचारियों से पूछताछ की और बच्चों के गायब होने की परिस्थितियों को समझने का प्रयास किया। प्रशासन का प्रारंभिक दावा है कि सभी बच्चे एक साथ आश्रय गृह से भाग निकले हैं। हालांकि इस घटना ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर इतनी बड़ी संख्या में बच्चे एक साथ कैसे गायब हो गए और आश्रय गृह प्रशासन को इसकी भनक तक कैसे नहीं लगी। स्थानीय लोगों का कहना है कि जिस संस्था की जिम्मेदारी बच्चों की सुरक्षा और देखभाल की है, वहां से एक साथ 10 बच्चों का गायब होना बेहद गंभीर लापरवाही को दर्शाता है। लोगों का मानना है कि यदि सुरक्षा व्यवस्था मजबूत होती, तो इतनी बड़ी घटना संभव नहीं होती। सूत्रों के अनुसार घटना के बाद आश्रय गृह की सुरक्षा व्यवस्था और प्रशासनिक निगरानी को लेकर भी जांच शुरू कर दी गई है। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि मामला सिर्फ बच्चों के भागने का है या इसके पीछे कोई साजिश या लापरवाही छिपी हुई है। पुलिस ने आसपास के क्षेत्रों में खोज अभियान शुरू कर दिया है। रेलवे स्टेशन, बस पड़ाव और अन्य सार्वजनिक स्थानों पर बच्चों की तलाश की जा रही है। साथ ही आश्रय गृह में लगे सीसीटीवी कैमरों की रिकॉर्डिंग भी खंगाली जा रही है, ताकि बच्चों के बाहर जाने की वास्तविक स्थिति का पता लगाया जा सके। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि आश्रय गृह के कर्मचारियों और सुरक्षाकर्मियों से भी पूछताछ की जा रही है। यह जांच की जा रही है कि घटना के समय कौन ड्यूटी पर था और बच्चों के निकलने की जानकारी किसी को क्यों नहीं हुई। बाल अधिकार और सामाजिक सुरक्षा से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि इस प्रकार की घटनाएं बच्चों की सुरक्षा व्यवस्था में गंभीर खामियों को उजागर करती हैं। आश्रय गृहों में रहने वाले बच्चों की मानसिक स्थिति, सुरक्षा और निगरानी पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता होती है। यदि समय-समय पर उचित निगरानी नहीं हो, तो बच्चे असुरक्षित महसूस कर सकते हैं। इस घटना के बाद पूरे बिहार में बाल संरक्षण व्यवस्था पर बहस शुरू हो गई है। सामाजिक संगठनों ने मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की बात कही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रशासन को सिर्फ बच्चों की तलाश तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि यह भी सुनिश्चित करना चाहिए कि भविष्य में ऐसी घटनाएं दोबारा न हों। आश्रय गृहों की सुरक्षा व्यवस्था और निगरानी तंत्र को और अधिक मजबूत बनाने की जरूरत है। फिलहाल प्रशासन का दावा है कि बच्चों को जल्द ही सुरक्षित बरामद कर लिया जाएगा। पुलिस लगातार खोज अभियान चला रही है और कई संभावित स्थानों पर छापेमारी की जा रही है। यह घटना न केवल मुजफ्फरपुर बल्कि पूरे राज्य के लिए चिंता का विषय बन गई है। अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि आखिर इन बच्चों के लापता होने की असली वजह क्या थी और प्रशासन उन्हें कब तक सुरक्षित वापस ला पाता है।


