निलंबन हटाने के आदेश के बावजूद हड़ताल पर अड़े राजस्व कर्मचारी, जिलों में असमंजस की स्थिति
- विभाग ने बहाली प्रक्रिया शुरू करने को कहा, लेकिन कर्मचारी पहले मांगें पूरी करने पर अड़े
- समाहर्ताओं ने कार्यभार ग्रहण को शर्त बताया, दो महीने से अधिक समय से ठप है कामकाज
पटना। बिहार में राजस्व कर्मचारियों की हड़ताल और निलंबन को लेकर स्थिति अभी भी पूरी तरह सामान्य नहीं हो पाई है। राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग द्वारा हड़ताली कर्मचारियों को निलंबन से मुक्त करने का आदेश जारी किए जाने के बावजूद कर्मचारी संघ अपनी हड़ताल समाप्त करने को तैयार नहीं है। इस मुद्दे पर विभाग और जिला प्रशासन के बीच भी व्याख्या को लेकर मतभेद सामने आ रहे हैं। कर्मचारी संघ का कहना है कि वे पिछले दो महीने से अधिक समय से अपनी मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे हैं, लेकिन उनकी किसी भी मांग पर ठोस कार्रवाई नहीं की गई। उलटे कई जिलों में कर्मचारियों को निलंबित कर दिया गया, जिससे नाराजगी और बढ़ गई है। अब जब विभाग की ओर से निलंबन समाप्त करने का निर्देश जारी किया गया है, तब भी जिला स्तर पर अधिकारी इसे अलग तरीके से लागू कर रहे हैं। जिलों में समाहर्ताओं और अधीनस्थ अधिकारियों का कहना है कि कर्मचारी पहले कार्य पर वापस लौटें, उसके बाद ही उनके निलंबन को समाप्त किया जाएगा। इस स्थिति को लेकर कर्मचारी संघ ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा है कि जब तक उनकी मांगों पर विचार नहीं किया जाता और स्पष्ट आदेश लागू नहीं होते, तब तक हड़ताल समाप्त करने का सवाल ही नहीं उठता। विभाग की ओर से यह स्पष्ट किया गया है कि राज्य में राजस्व कर्मचारियों की नियुक्ति और अनुशासनात्मक कार्रवाई का अधिकार जिला समाहर्ताओं के पास है। यह प्रावधान बिहार राजस्व कर्मचारी संवर्ग नियमावली 2025 के अंतर्गत आता है। इसी नियम के तहत 11 फरवरी से 19 अप्रैल 2026 के बीच विभिन्न जिलों में 224 कर्मचारियों को निलंबित किया गया था। अब विभाग ने इन कर्मचारियों के निलंबन को समाप्त करने की प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश दिए हैं। विभाग का कहना है कि 17 अप्रैल को कार्य पर लौटने वाले कर्मचारियों के लिए भी विशेष दिशा-निर्देश जारी किए गए थे, जिससे प्रशासनिक कार्यों को धीरे-धीरे सामान्य करने में मदद मिल रही है। इसके बावजूद कई जिलों में स्थिति अभी भी स्पष्ट नहीं हो पाई है। कुछ दिन पहले ही मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की सरकार ने 200 से अधिक निलंबित राजस्व कर्मचारियों की बहाली का निर्णय लिया था। इसके तहत विभाग के अपर सचिव डॉ. महेंद्र पाल ने सभी जिलाधिकारियों को पत्र भेजकर संबंधित कर्मियों की बहाली प्रक्रिया शुरू करने को कहा था। दरअसल, राजस्व कर्मचारी फरवरी महीने से ही अपनी मांगों को लेकर अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले गए थे। उस समय तत्कालीन राजस्व मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने हड़ताल को अनुशासनहीनता मानते हुए बड़ी संख्या में कर्मचारियों को निलंबित कर दिया था। इसके बाद से ही यह विवाद लगातार बना हुआ है। हड़ताल के कारण राज्य में राजस्व से जुड़े कई महत्वपूर्ण कार्य प्रभावित हो रहे हैं। जमीन से संबंधित दस्तावेज, दाखिल-खारिज, म्यूटेशन और अन्य प्रशासनिक कार्यों में देरी हो रही है, जिससे आम लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। सरकार और विभाग दोनों ही इस स्थिति को जल्द सामान्य करने के प्रयास में जुटे हैं, लेकिन अभी तक कोई ठोस समाधान नहीं निकल पाया है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस विवाद को सुलझाने के लिए स्पष्ट संवाद और पारदर्शी प्रक्रिया की आवश्यकता है। जब तक विभाग और कर्मचारी संघ के बीच सहमति नहीं बनती, तब तक प्रशासनिक कामकाज पूरी तरह पटरी पर लौटना मुश्किल होगा। फिलहाल स्थिति यह है कि एक ओर विभाग निलंबन हटाने की प्रक्रिया शुरू कर चुका है, वहीं दूसरी ओर कर्मचारी अपनी मांगों पर अड़े हुए हैं। ऐसे में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि आने वाले दिनों में दोनों पक्षों के बीच किस प्रकार का समाधान निकलता है और कब तक राज्य में राजस्व कार्य पूरी तरह सामान्य हो पाते हैं।


