पटना की सड़कों पर महिला चालक संभालेंगी पिंक बस, सशक्तिकरण की दिशा में नई पहल
- प्रशिक्षण के दूसरे चरण में पहुंचीं महिला चालक, जल्द सौंपी जाएगी बसों की जिम्मेदारी
- राज्य परिवहन निगम की योजना, 100 पिंक बसों में महिलाओं की तैनाती से बढ़ेगा रोजगार और भागीदारी
पटना। बिहार की राजधानी पटना में सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है, जहां अब महिलाएं बसों की स्टीयरिंग संभालने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही हैं। पिंक बस योजना के तहत महिलाओं को चालक के रूप में तैयार करने की पहल अब जमीनी स्तर पर आकार लेती नजर आ रही है। यह पहल न केवल महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, बल्कि सामाजिक सोच में बदलाव का संकेत भी दे रही है। राजधानी की सड़कों पर इन दिनों महिला चालकों को बस चलाने का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। पहले चरण का प्रशिक्षण पूरा कर चुकी पांच महिला चालक आरती कुमारी, रागिनी कुमारी, सरस्वती कुमारी, गायत्री कुमारी और बेबी कुमारी अब दूसरे चरण में वास्तविक सड़कों पर अभ्यास कर रही हैं। ये महिलाएं पिछले कुछ दिनों से बेली रोड मार्ग पर अनुभवी प्रशिक्षकों की निगरानी में भारी मोटर वाहन का संचालन कर रही हैं। प्रशिक्षण के दौरान महिलाओं को भारी मोटर वाहन चलाने का लाइसेंस प्राप्त हो चुका है और अब उन्हें व्यावहारिक अनुभव दिया जा रहा है। अगले 15 दिनों तक उनका प्रशिक्षण जारी रहेगा, जिसके बाद उनकी दक्षता का मूल्यांकन किया जाएगा। सफल होने पर उन्हें पिंक बसों की जिम्मेदारी सौंपी जाएगी। यह पहल बिहार राज्य पथ परिवहन निगम द्वारा संचालित की जा रही है। निगम की योजना है कि राज्य में चलाई जाने वाली 100 पिंक बसों में महिला चालकों की नियुक्ति की जाए। इससे महिलाओं को रोजगार के नए अवसर मिलेंगे और सार्वजनिक परिवहन में उनकी भागीदारी भी बढ़ेगी। इस परियोजना के तहत केवल पांच ही नहीं, बल्कि 21 अन्य महिला चालकों को भी तैयार किया जा रहा है। इन्हें ड्राइविंग एवं यातायात अनुसंधान संस्थान में प्रशिक्षण दिया जा रहा है। यहां उन्हें केवल वाहन संचालन ही नहीं, बल्कि सड़क सुरक्षा, यातायात नियमों, इंजन की तकनीकी जानकारी और आपातकालीन परिस्थितियों से निपटने की भी जानकारी दी जा रही है। प्रशिक्षण की प्रक्रिया को आधुनिक और व्यवस्थित बनाया गया है। पहले चरण में सिमुलेटर के माध्यम से आभासी वातावरण में अभ्यास कराया जाता है, जिससे प्रशिक्षु सुरक्षित तरीके से वाहन संचालन की बारीकियां सीख सकें। इसके बाद उन्हें वास्तविक सड़कों पर उतारकर व्यावहारिक अनुभव दिया जाता है, जिससे वे आत्मविश्वास के साथ वाहन चला सकें। विशेषज्ञों का मानना है कि यह पहल महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इससे समाज में यह संदेश भी जाएगा कि महिलाएं किसी भी क्षेत्र में पीछे नहीं हैं और वे हर जिम्मेदारी को समान दक्षता के साथ निभा सकती हैं। सामाजिक दृष्टिकोण से भी यह बदलाव महत्वपूर्ण है। अब तक भारी वाहनों की ड्राइविंग को पुरुषों का क्षेत्र माना जाता रहा है, लेकिन यह पहल उस सोच को बदलने का काम कर रही है। महिला चालक अब इस क्षेत्र में अपनी क्षमता का प्रदर्शन कर रही हैं और नई मिसाल कायम कर रही हैं। सरकारी स्तर पर भी इस योजना को महिला सशक्तिकरण के एजेंडे से जोड़कर देखा जा रहा है। इससे न केवल महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनने का अवसर मिलेगा, बल्कि समाज में उनकी भूमिका भी और अधिक सशक्त होगी। स्थानीय लोगों के बीच भी इस पहल को लेकर सकारात्मक प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। लोग इसे एक प्रेरणादायक कदम मान रहे हैं, जो आने वाली पीढ़ियों के लिए नई दिशा तय करेगा। पटना की सड़कों पर पिंक बसों की स्टीयरिंग संभालती महिलाएं केवल वाहन नहीं चला रही हैं, बल्कि वे समाज में बदलाव की एक नई कहानी लिख रही हैं। यह पहल आने वाले समय में अन्य राज्यों के लिए भी एक उदाहरण बन सकती है, जहां महिलाएं हर क्षेत्र में अपनी भागीदारी बढ़ाने की दिशा में आगे बढ़ रही हैं।


