संसद परिसर में मोदी और राहुल की मुलाकात चर्चा में, फुले जयंती कार्यक्रम बना केंद्र
- राजनीतिक विरोध के बीच दोनों नेताओं की संक्षिप्त बातचीत का वीडियो हुआ वायरल
- प्रधानमंत्री ने महात्मा फुले को श्रद्धांजलि देकर उनके विचारों को बताया प्रेरणास्रोत
नई दिल्ली। संसद भवन परिसर में शनिवार को एक ऐसा दृश्य देखने को मिला, जिसने राजनीतिक गलियारों के साथ-साथ सामाजिक माध्यमों पर भी खासा ध्यान आकर्षित किया। आमतौर पर एक-दूसरे पर तीखे राजनीतिक हमले करने वाले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी के बीच हुई संक्षिप्त बातचीत का वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है। यह घटना महान समाज सुधारक ज्योतिराव फुले की जयंती के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम के दौरान की है। बताया जा रहा है कि 11 अप्रैल को संसद परिसर स्थित प्रेरणा स्थल पर महात्मा फुले की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित करने के लिए कई प्रमुख नेता मौजूद थे। इस दौरान लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला, केंद्रीय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल तथा राज्यसभा के पूर्व उपसभापति हरिवंश भी वहां उपस्थित थे। कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उपस्थित सभी नेताओं से एक-एक कर अभिवादन किया। इसी क्रम में जब वे राहुल गांधी के सामने पहुंचे, तो दोनों कुछ क्षणों के लिए रुककर बातचीत करते नजर आए। हालांकि बातचीत का विषय सार्वजनिक नहीं हो सका है, लेकिन वीडियो में दोनों नेताओं के बीच सामान्य और सौहार्दपूर्ण संवाद का दृश्य स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है। राजनीतिक रूप से विरोधी माने जाने वाले इन दोनों नेताओं की यह मुलाकात लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गई है। इस पूरे घटनाक्रम का वीडियो सामाजिक माध्यमों पर तेजी से साझा किया जा रहा है। कई लोग इसे लोकतांत्रिक परंपराओं का सकारात्मक उदाहरण बता रहे हैं, जहां राजनीतिक मतभेदों के बावजूद सार्वजनिक मंच पर शालीनता और संवाद की भावना देखने को मिलती है। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य महात्मा ज्योतिराव फुले की जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करना था। प्रधानमंत्री मोदी ने इस अवसर पर अपने संदेश में फुले के योगदान को याद करते हुए कहा कि उनका जीवन समानता, न्याय और शिक्षा के आदर्शों के लिए समर्पित रहा। उन्होंने कहा कि फुले ने समाज के वंचित वर्गों, विशेषकर महिलाओं और पिछड़े समुदायों के अधिकारों के लिए उल्लेखनीय कार्य किया। प्रधानमंत्री ने सामाजिक माध्यम मंच ‘एक्स’ पर भी अपने विचार साझा किए। उन्होंने लिखा कि महात्मा फुले के 200वें जयंती वर्ष के समारोहों का आरंभ हो रहा है और उनके विचार आज भी समाज को आगे बढ़ने की प्रेरणा देते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि फुले के प्रयासों से शिक्षा समाज में सशक्तीकरण का एक मजबूत माध्यम बनी। महात्मा ज्योतिराव फुले का जन्म 11 अप्रैल 1827 को महाराष्ट्र में हुआ था। उन्होंने अपने जीवनकाल में सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ संघर्ष किया और शिक्षा के प्रसार को बढ़ावा दिया। विशेष रूप से महिलाओं की शिक्षा और दलितों के अधिकारों के लिए उनके प्रयासों को भारतीय समाज में ऐतिहासिक महत्व प्राप्त है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि संसद परिसर में इस तरह की मुलाकातें लोकतांत्रिक संस्कृति की एक अहम पहचान होती हैं। जहां एक ओर राजनीतिक दलों के बीच वैचारिक मतभेद बने रहते हैं, वहीं दूसरी ओर सार्वजनिक कार्यक्रमों में आपसी सम्मान और संवाद की परंपरा लोकतंत्र को मजबूत करती है। फिलहाल, यह वीडियो लोगों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है और इसे विभिन्न दृष्टिकोणों से देखा जा रहा है। कुछ इसे सामान्य औपचारिकता मान रहे हैं, तो कुछ इसे राजनीतिक सौहार्द का संकेत बता रहे हैं। महात्मा फुले की जयंती के अवसर पर आयोजित इस कार्यक्रम ने न केवल उनके विचारों को याद करने का अवसर दिया, बल्कि राजनीतिक परिदृश्य में संवाद और शिष्टाचार की एक झलक भी प्रस्तुत की।


