पटना-गया मार्ग पर भीषण सड़क हादसा, डिवाइडर से टकराकर पलटी कार
- अंधेरे और चेतावनी संकेतों की कमी से हुआ हादसा, घायलों की पहचान अब तक अज्ञात
- स्थानीय लोगों में आक्रोश, सड़क व्यवस्था में सुधार की मांग तेज
पटना। राजधानी पटना से गया जाने वाले मुख्य मार्ग पर मंगलवार, 7 अप्रैल की देर रात एक गंभीर सड़क दुर्घटना सामने आई, जिसमें एक कार डिवाइडर से टकराकर बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई। यह हादसा गौरीचक थाना क्षेत्र के अंतर्गत गौरीचक-पलांकि मार्ग पर हुआ, जहां कार पटना की ओर जा रही थी। दुर्घटना के बाद कार के दोनों अगले पहिये टूट गए और वाहन पलट गया, जिससे उसमें सवार लोगों के गंभीर रूप से घायल होने की आशंका जताई जा रही है। घटना के तुरंत बाद आसपास के ग्रामीण मौके पर पहुंचे और उन्होंने कुछ घायलों को एक अज्ञात वाहन की मदद से अस्पताल भेजते हुए देखा। हालांकि, अब तक यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि कार में कुल कितने लोग सवार थे, उनकी पहचान क्या है और उनकी वर्तमान स्थिति कैसी है। इस संबंध में पुलिस और अस्पताल दोनों ही स्तर पर कोई ठोस जानकारी सामने नहीं आई है। स्थानीय पत्रकारों द्वारा बेलदारी चक स्थित नव्या अस्पताल से संपर्क किया गया, जहां से यह जानकारी मिली कि इस दुर्घटना से संबंधित कोई भी घायल वहां भर्ती नहीं हुआ है। इससे घटना को लेकर रहस्य और गहरा गया है। वहीं, गौरीचक थाना पुलिस भी फिलहाल इस बात की पुष्टि नहीं कर पाई है कि कार में सवार लोग कौन थे और उन्हें किस अस्पताल में ले जाया गया। घटनास्थल पर मौजूद लोगों के अनुसार, दुर्घटना का मुख्य कारण सड़क पर पर्याप्त प्रकाश व्यवस्था का अभाव और डिवाइडर पर चेतावनी संकेतों की कमी है। ग्रामीणों का कहना है कि गौरीचक पुल पार करने के बाद सड़क पर अंधेरा रहता है, क्योंकि वहां स्ट्रीट लाइटें काम नहीं कर रही हैं। ऐसे में रात के समय वाहन चालकों को डिवाइडर का अंदाजा नहीं लग पाता, जिससे हादसे की संभावना बढ़ जाती है। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि जिस स्थान पर यह दुर्घटना हुई, वहां डिवाइडर पर न तो परावर्तक पट्टियां लगी हैं और न ही कोई संकेतक बोर्ड है। इसके कारण वाहन चालकों को समय रहते सतर्क होने का अवसर नहीं मिलता। कई बार वाहन सीधे डिवाइडर से टकरा जाते हैं, जिससे गंभीर हादसे होते हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह कोई पहली घटना नहीं है। इस मार्ग पर पहले भी कई दुर्घटनाएं हो चुकी हैं, जिनमें कई लोगों की जान जा चुकी है। खासकर रात के समय स्थिति और भी खतरनाक हो जाती है, जब सड़क पर अंधेरा छा जाता है और दृश्यता कम हो जाती है। ग्रामीणों के अनुसार, कई बार ट्रक और अन्य भारी वाहन भी डिवाइडर पर चढ़ जाते हैं, जिससे स्थिति और गंभीर हो जाती है। स्थानीय नागरिकों ने सड़क निर्माण और रखरखाव के लिए जिम्मेदार विभागों और ठेकेदारों को इस तरह की घटनाओं के लिए जिम्मेदार ठहराया है। उनका कहना है कि यदि समय रहते सड़क पर प्रकाश व्यवस्था सुधारी जाती और डिवाइडर पर उचित संकेत लगाए जाते, तो इस तरह के हादसों को रोका जा सकता था। एक स्थानीय नागरिक ने कहा कि सड़क की बदहाल स्थिति और लापरवाही के कारण लोगों की जान जोखिम में है। उन्होंने प्रशासन से मांग की कि इस मार्ग पर जल्द से जल्द स्ट्रीट लाइटें चालू की जाएं और डिवाइडर पर आवश्यक सुरक्षा संकेत लगाए जाएं, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं से बचा जा सके। फिलहाल पुलिस पूरे मामले की जांच में जुटी हुई है और यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि दुर्घटना में घायल लोग कहां भर्ती हैं। साथ ही, वाहन के पंजीकरण के आधार पर सवार लोगों की पहचान की भी कोशिश की जा रही है। यह घटना एक बार फिर सड़क सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करती है और तत्काल सुधार की आवश्यकता को रेखांकित करती है।


