पटना में इग्नू का हुआ 39वां दीक्षांत समारोह, रवीन्द्र भवन में 20608 छात्रों को मिली यूजी और पीजी की डिग्री
इंग्लिश लिटरेचर से पीजी की डिग्री प्राप्त करती अतिथि चौहान
- रवीन्द्र भवन में आयोजित कार्यक्रम, देशभर में लगभग तीन लाख शिक्षार्थियों को डिग्री
- मुख्य अतिथि फैजान मुस्तफा ने दूरस्थ शिक्षा की भूमिका को सराहा
पटना। इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय का 39वां दीक्षांत समारोह मंगलवार को पटना में उत्साह और गरिमा के साथ आयोजित किया गया। राजधानी स्थित रवीन्द्र भवन में आयोजित इस समारोह में बड़ी संख्या में विद्यार्थियों को स्नातक, स्नातकोत्तर, डिप्लोमा और प्रमाणपत्र की उपाधियां प्रदान की गईं। इस अवसर पर कुल 20,608 विद्यार्थियों को उनकी शैक्षणिक उपलब्धियों के लिए सम्मानित किया गया। समारोह का माहौल उत्सव जैसा रहा और विद्यार्थियों के साथ उनके परिजनों में भी खुशी और गर्व की भावना देखने को मिली।
दीप प्रज्ज्वलन से कार्यक्रम की शुरुआत
कार्यक्रम की शुरुआत मुख्य अतिथि फैजान मुस्तफा द्वारा दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुई। अपने संबोधन में उन्होंने दूरस्थ शिक्षा प्रणाली की उपयोगिता और महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि मुक्त शिक्षा प्रणाली ने समाज के उन वर्गों तक शिक्षा पहुंचाने का काम किया है, जो किसी कारणवश पारंपरिक शिक्षा व्यवस्था से नहीं जुड़ पाए थे। उन्होंने यह भी कहा कि शिक्षा का प्रसार देश के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है और विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को प्राप्त करने में इस प्रकार की संस्थाओं का योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण है।
हजारों विद्यार्थियों को मिली उपाधि
समारोह में कुल 20,608 विद्यार्थियों को उपाधियां प्रदान की गईं। इनमें 7,606 स्नातकोत्तर, 11,918 स्नातक, 935 डिप्लोमा और 149 प्रमाणपत्र प्राप्त करने वाले विद्यार्थी शामिल रहे। कुछ चयनित विद्यार्थियों को मंच पर व्यक्तिगत रूप से उपाधियां प्रदान की गईं, जबकि अन्य विद्यार्थियों को निर्धारित प्रक्रिया के माध्यम से उपाधि दी गई। कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों के चेहरे पर उपलब्धि की खुशी साफ दिखाई दे रही थी।
देशभर में एक साथ आयोजित हुआ समारोह
इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय का दीक्षांत समारोह केवल पटना तक सीमित नहीं रहा, बल्कि देशभर के विभिन्न क्षेत्रीय केंद्रों में एक साथ आयोजित किया गया। विश्वविद्यालय के लगभग 60 क्षेत्रीय केंद्रों के माध्यम से करीब 2,99,092 विद्यार्थियों को उपाधियां प्रदान की गईं। मुख्य समारोह नई दिल्ली स्थित विश्वविद्यालय मुख्यालय में आयोजित किया गया, जहां देश के उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। इस कार्यक्रम का सीधा प्रसारण पटना सहित अन्य केंद्रों में किया गया, जिससे विद्यार्थी समारोह से जुड़े रहे।
दूरस्थ शिक्षा की बढ़ती भूमिका
पटना क्षेत्रीय केंद्र के क्षेत्रीय निदेशक डॉ. ई. कृष्णा राव ने अपने संबोधन में विश्वविद्यालय की उपलब्धियों और विस्तार की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय का उद्देश्य शिक्षा को हर वर्ग तक पहुंचाना है। उन्होंने ‘अप्राप्य तक पहुंच’ के सिद्धांत को विश्वविद्यालय की प्रमुख विशेषता बताया। उनके अनुसार, दूरस्थ शिक्षा प्रणाली ने शिक्षा के क्षेत्र में एक नई दिशा प्रदान की है और विशेष रूप से उन लोगों के लिए उपयोगी साबित हुई है जो आर्थिक, सामाजिक या भौगोलिक कारणों से नियमित शिक्षा नहीं प्राप्त कर पाते।
स्वर्ण पदक से सम्मानित हुए विद्यार्थी
समारोह के दौरान पटना क्षेत्रीय केंद्र के विद्यार्थी मुकेश कुमार को ‘बीएकेएसएच कार्यक्रम’ में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए स्वर्ण पदक प्रदान किया गया। उनकी इस उपलब्धि ने न केवल उनके परिवार बल्कि पूरे क्षेत्रीय केंद्र को गौरवान्वित किया। उनकी सफलता ने अन्य विद्यार्थियों को भी प्रेरित किया कि मेहनत और लगन से किसी भी लक्ष्य को प्राप्त किया जा सकता है।
कामकाजी और दूरदराज के विद्यार्थियों के लिए उपयोगी व्यवस्था
कार्यक्रम में वक्ताओं ने इस बात पर जोर दिया कि मुक्त शिक्षा प्रणाली ने विद्यार्थियों को पढ़ाई में लचीलापन प्रदान किया है। इस प्रणाली के माध्यम से कामकाजी लोग, गृहिणियां और दूरदराज के क्षेत्रों में रहने वाले विद्यार्थी भी अपनी पढ़ाई पूरी कर सकते हैं। यह शिक्षा व्यवस्था विद्यार्थियों को अपनी सुविधानुसार समय निर्धारित करने का अवसर देती है, जिससे वे अपनी जिम्मेदारियों के साथ-साथ शिक्षा भी प्राप्त कर सकें।
शिक्षा को सामाजिक परिवर्तन का माध्यम बताया
समारोह के अंत में वक्ताओं ने कहा कि शिक्षा केवल उपाधि प्राप्त करने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने का माध्यम भी है। शिक्षित व्यक्ति न केवल अपने जीवन को बेहतर बनाता है, बल्कि समाज के विकास में भी योगदान देता है। विद्यार्थियों को संदेश दिया गया कि वे अपने ज्ञान का उपयोग समाज के हित में करें और देश के विकास में सक्रिय भूमिका निभाएं।
विद्यार्थियों के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि
पटना में आयोजित यह दीक्षांत समारोह विद्यार्थियों के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि साबित हुआ। यह कार्यक्रम उनके परिश्रम और समर्पण का परिणाम था। इस आयोजन ने यह भी दिखाया कि दूरस्थ शिक्षा प्रणाली आज शिक्षा के क्षेत्र में कितनी प्रभावी भूमिका निभा रही है। आने वाले समय में भी इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय जैसे संस्थान शिक्षा के प्रसार और समाज के विकास में महत्वपूर्ण योगदान देते रहेंगे।


